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PATNA: भईया उठो न..तैयार हो जाओ.. आज राखी है, कब तक सोते रहोगे. हम दोनों भाई जब तक उठ नहीं जाते, वह हमें जगाती रहती. राखी की थाली सजाए, हमारे तैयार होने का इंतजार करती. हर साल उसे एक ही त्योहार का इंतजार रहता. वह है राखी. वह हमेशा कहती, भईया आप लोग ही मेरी जिंदगी हो. इसलिए शायद भगवान ने मुझे मंद बुद्घि बनाया, जिससे मैं कभी भी आपको छोड़कर न जाऊं. वादा किया था उसने हम भाईयों से कि हमारी कलाई कभी सूनी नहीं रहेगी. लेकिन आज उसने यह वादा तोड़ दिया. पिछले दो महीने से वह गायब है. मैंने उसे कहां-कहां नहीं खोजा. पर कहीं नहीं मिली. किसी ने कहां पटना के शेल्टर होम में है. तो यहां भी हर शेल्टर होम की धूल फांक ली लेकिन वो न मिली. इस बार हम भाईयों की कलाई सूनी रह जाएगी. यह कहते ही वह फूट-फूटकर रोने लगा. यह कहानी एक ऐसे भाई की जो पिछले दो महीने से अपनी बहन को खोज रहा है. किसी ने उसे बताया कि उसकी बहन पटना के शेल्टर होम में है. उसने पटना के सारे शेल्टर होम भी खोज डाले. हारकर वह पटना के कलेक्टर से मिलने आया लेकिन वहां भी उसे निराशा ही हाथ लगी. लेकिन उसे आज भी आस है उसकी बहन आएगी. उसकी कलाई सूनी नहीं रहेगी.

शहर-शहर भटक रहा मुकेश

भागलपुर जिले के भवानी कोल थानांतर्गत मधुरापुर बाजार निवासी मुकेश कुमार पिता बालेश्वर गुप्ता अपनी बहन की खोज में कलेक्ट्रेट, पटना पहुंच गए. उन्होंने बताया कि 28 जून को दरभंगा रेलवे स्टेशन से उनकी बहन रेखा कुमारी गायब हो गई थी. वह उस समय मां और मौसी के साथ घर लौट रही थी. जिसके बाद से वह लगातार उसे एक शहर से दूसरे शहर में जाकर ढूंढ़ रहे हैं लेकिन वह मिल नहीं रही है. जहां भी कोई बताता है वह बहन की तलाश में उस शहर में पहुंच जाता है.

चक्कर लगाता रह गया भाई

मुकेश को किसी ने बताया था कि वह अपनी को शेल्टर होम जाकर ढूंढ़े. इस दौरान पटना के शेल्टर होम की काउंसलर ने उन्हें राजीव नगर थाना में जाकर शिकयत करने के लिए कहा. इस दौरान जब वह थाना गए तो उन्हें वहां से कलेक्ट्रेट जाने के लिए बोला. कलेक्ट्रेट पहुंचने पर यहां के कर्मचारियों ने मुकेश को दिलासा ही दिया लेकिन उसकी बहन कहां मिलेगी यह कोई नहीं बता पाया. अपनी आस को जिंदा रखे.

दरभंगा स्टेशन में दर्ज कराई थी गुमशुदगी

मुकेश ने बताया कि घर में मेरा एक छोटा भाई और मां है. वह हम सभी की लाडली थी. उसके लापता होने के बाद हमने दरभंगा रेलवे स्टेशन पर ही गुमशुदगी दर्ज कराई थी लेकिन उनकी बहन की तलाश में तत्परता नहीं दिखाई. उस दिन से वह आज तक अपनी बहन को ढूंढ़ने के लिए बिहार और झारखंड के कई शहरों का चक्कर लगा चुके हैं लेकिन सफलता नहीं मिली. उन्होंने बताया कि रेखा बचपन से ही मंद बुद्धि की हैं. जिसकी वजह से उनकी शादी नहीं हो सकी. वह हमेशा यह कहती थी कि भगवान ने मुझे जानबूझकर ऐसा बनाया है जिससे मेरी शादी न हो और मैं हमेशा अपने भाईयों के साथ ही रहूं.