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BAREILLY : वैशाख मास की पूर्णिमा इस बार शनिवार यानि आज विशाखा नक्षत्र में मनाई जाएगी। इस दिन विशाखा नक्षत्र के कारण पीपल पूजन एवं शिव, शनि पूजन से विशेष फल मिलेगा। वृष, कन्या, वृश्चिक, धनु एवं मकर लग्न या राशि वाले जातकों को पीपल पूजन, हनुमान पूजन, शनिदेव पूजन एवं महादेव के पूजन से विशेष लाभ मिलेगा।

व्रत से दूर हुई थी दरिद्रता
बालाजी ज्योतिष संस्थान के पंडित राजीव शर्मा ने बताया कि इस दिन भगवान विष्णु का 23वां अवतार भगवान बुद्ध के रूप में हुआ था। इसलिए वैशाखी पूर्णिमा को बुद्ध पूर्णिमा और सत्य विनायक पूर्णिमा भी कहते हैं। भगवान श्री कृष्ण के बचपन के सहपाठी दरिद्र ब्राह्माण सुदामा जब द्वारिका उनके पास मिलने पहुंचे, तब श्री कृष्ण ने उन्हें सत्य विनायक व्रत का विधान बताया। इसी व्रत के प्रभाव से सुदामा की सारी दरिद्रता हुई।

शिव की कृपा प्राप्ति का दिन
वैशाख पूर्णिमा विशाखा नक्षत्र शनिवार को तुला राशि में शुभ योग का निर्माण होता है, वैशाख माह के शनिवार को पूर्णिमा का संयोग होने के कारण तथा इस परिधावी सम्वतसर 2076 का राजा भी शनि होने के कारण अनिष्ट योगों के निवारण के लिए श्री महामृत्युंजय मंत्र के जाप, रूद्राष्टाध्यायी का पाठ, शिव लिंगार्चन, अभिषेक, स्तोत्र पाठ, पूजा आदि से देवाधिदेव शिव की कृपा प्राप्त की जा सकती है। महर्षि मार्कण्डेय ने इसी शुभ योग पर अल्पायु के अशुभ योग से मुक्ति के लिए शिव की पूजा उपासना की थी। इस शुभ योग में पवित्र नदी में स्नान का विशेष महत्व है। इस दिन कुश के आसन पर बैठ क उत्तर-पूर्व की दिशा की ओर मुख कर शिव के मंत्र का जाप, पारद शिवलिंग की पूजा-अर्चना विशेष फलदायक होती है। शिव मंदिर में जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।

पूर्णिमा पर करें पीपल पूजन
आर्थिक कष्ट, धनाभाव को दूर करने के लिए पीपल के नीचे भगवान शिव की मूर्ति स्थापित करके चन्दन, पुष्प, अक्षत, जल चढ़ा कर ऊं नम: शिवाय: मंत्र का यथा संभव जाप करें। शनि की अशुभ दृष्टि दूर करने के लिए इस पूर्णिमा से पीपल पर नियमित जल चढ़ायें। प्रत्येक शनिवार पश्चिम दिशा की ओर मुंह करके वृक्ष के नीचे दीपक जलायें। शनि की पूजा कर कष्ट निवारण की प्रार्थना करें। मंगल द्वारा होने वाले कष्ट निवारण के लिए पीपल के नीचे हनुमान जी के मंत्रों का जाप करें। इस वैशाखी पूर्णिमा से आरम्भ कर प्रति मंगलवार ऊँ ह्रीं हनुमते श्री राम दूताय नम: का यथा सम्भव जाप करें। इस दिन अलग-अलग पुण्य कर्म करने से अलग-अलग फलों की प्राप्ति होती है। इस दिन एक समय भोजन करके पूर्णिमा, चन्द्रमा अथवा सत्य नारायण का व्रत करें तो सब प्रकार के सुख, सम्पदा और श्रेय की प्राप्ति होती है। इस पूर्णिमा से स्वाति नक्षत्र तथा छत्र योग में पीपल, हनुमान, शनिदेव, शिव भगवान की पूजा मंत्र जाप का आरम्भ विशेष कामनाओं की पूर्ति करने वाला होगा।

-वृष, कन्या, वृश्चिक, धनु एवं मकर राशि वाले जातकों को पीपल पूजन करना रहेगा शुभ

- हनुमान पूजन, शनिदेव पूजन एवं महादेव के पूजन से भी मिलेगा विशेष लाभ

पूजा का विशेष समय

प्रात: 06:00 बजे से 07:00 बजे अमृत चौघडि़या में

प्रात: 09:00 बजे से 10:00 बजे शुभ के चौघडि़या में

अपरान्ह 01:30 बजे से सांय 06:00 बजे तक चर, लाभ, अमृत के चौघडि़या में।