- एडीजी इंटेलिजेंस की जांच में सामने आएगा बुलंदशहर कांड का सच

- एसएसपी ने मौके पर नहीं भेजी पर्याप्त फोर्स, हालात बेकाबू होते रहे

- साजिश की जांच कर रही एसआईटी, बड़ा बवाल कराने की थी तैयारी

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LUCKNOW: बुलंदशहर में गोकशी के बाद भड़की हिंसा में इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह के शहीद होने की वजह उनकी पर्सनल पिस्टल बन गयी. सूत्रों की मानें तो ग्रामीणों के पथराव के बाद जान बचाकर भाग रहे पुलिसकर्मियों का जब पीछा होने लगा तो इंस्पेक्टर सुबोध ने अपनी पर्सनल पिस्टल से फायरिंग शुरू कर दी जिसमें से एक गोली सीधे स्थानीय युवक सुमित के सीने में जा धंसी. सुमित को गोली लगते ही ग्रामीणों का गुस्सा और भड़क गया और उन्होंने पथराव से घायल इंस्पेक्टर की पिस्टल छीनकर उन्हें गोली मार दी. बुलंदशहर में हुए इस घटनाक्रम की अभी आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं हुई है पर आलाधिकारियों की मानें तो क्राइम सीन कुछ ऐसी ही गवाही दे रहा है. हालांकि यह आशंका भी जताई जा रही है कि इंस्पेक्टर को गोली मारने वाला कोई साधारण ग्रामीण नहीं, बल्कि कोई पेशेवर मुजरिम है.

चार घंटे तक फंसे रहे पुलिसकर्मी

बुलंदशहर हिंसा के मामले में डीजीपी मुख्यालय के अधिकारी लगातार पूरे घटनाक्रम की समीक्षा कर रहे हैं. इसमें सामने आया है कि दो जाट बाहुल्य गांवों के नजदीक गोकशी की घटना किसी सुनियोजित साजिश के तहत की गयी ताकि बुलंदशहर के साथ पूरे प्रदेश को संाप्रदायिक तनाव की आग में झोंका जा सके. सुबह नौ बजे शुरू हुए इस घटनाक्रम के चार घंटे बाद तक स्थानीय आलाधिकारी मामले की गंभीरता को भांपने में नाकाम रहे नतीजतन सीओ समेत तमाम पुलिसकर्मियों को पुलिस चौकी के एक कमरे में खुद को बंद करके जान बचानी पड़ी. बाद में वे कमरे में एक सुराख कर बाहर निकले तब तक बाहर फंसे सुबोध कुमार सिंह शहीद हो चुके थे. पुलिस चौकी को करीब 300 ग्रामीणों ने घेर रखा था और सीओ लगातार आलाधिकारियों से अतिरिक्त पुलिस बल भेजने की गुहार लगा रहे थे. यह भी पता चला है कि सीओ का फोन आने पर एसएसपी बुलंदशहर केबी सिंह ने आसपास के थानों की फोर्स तो मौके पर भेजी पर वे मामले की संवेदनशीलता को ठीक से भांप नहीं सके नतीजतन तमाम पुलिसकर्मियों की जान पर बन आई.

छह दिसंबर की थी तैयारी

घटनाक्रम की पड़ताल से यह आशंका भी जताई जा रही है कि गोकशी की यह वारदात सुनियोजित साजिश के तहत रची गयी. इसमें शामिल अराजक तत्वों का सीधा मकसद छह दिसंबर से पहले प्रदेश में सांप्रदायिक तनाव फैलाना था. इसके लिए बुलंदशहर के जाट बाहुल्य गांवों को चुना गया ताकि नजदीक चल रहे एक बड़े आयोजन तक इसकी चिंगारी को भड़काया जा सके. इसे देखते हुए यह संभावना भी जताई जा रही है कि इस मामले की गाज बुलंदशहर के एसएसपी केबी सिंह समेत कई जिम्मेदार अफसरों पर गिर सकती है. इससे डीजीपी मुख्यालय भी अछूता नहीं रहेगा. इसका फैसला एडीजी इंटेलिजेंस की शासन को जल्द सौंपी जाने वाली रिपोर्ट के आधार पर लिया जाएगा.

योगेश राज ने खुद को बताया निर्दोष

वहीं दूसरी ओर इंस्पेक्टर की हत्या के मुख्य आरोपी योगेश राज का बुधवार को एक वीडियो सामने आया जिसमें वह खुद को निर्दोष करार दे रहा है. बुलंदशहर में बजरंग दल के जिला संयोजक योगेश राज ने इस वीडियो में दावा किया है कि वह इंस्पेक्टर की हत्या के दौरान स्याना कोतवाली में गोकशी की एफआईआर दर्ज करा रहा था और घटनास्थल पर मौजूद नहीं था. ध्यान रहे कि पुलिस ने योगेश राज समेत तमाम आरोपितों के खिलाफ इंस्पेक्टर की हत्या का मुकदमा दर्ज किया है जिसके बाद से वह फरार चल रहा है.