रोडवेज बसों के लिए रोडवेज फिर करेगा नए रूट पर मंथन

Meerut. शहर को जाम से मुक्ति दिलाने के लिए टै्रफिक पुलिस द्वारा तैयार किया गया रोडवेज बसों का रूट डायवर्जन प्लान किराया बढ़ते ही फ्लॉप हो गया. यात्रियों की जेब पर बोझ और समय की बर्बादी को देखते हुए प्रशासन ने इस डायवर्जन प्लान को कैंसिल कर दिया. जिसके बाद रोडवेज बसों का शहर के अंदर से संचालन शुरू होते ही भैंसाली डिपो तक आने वाले सभी मार्ग और चौराहे जाम से ग्रस्त होने लगे हैं. यही नहीं प्रशासन ने जिस जनता को राहत देने के लिए डायवर्जन प्लान कैंसिल किया था, वही जनता अब सुबह-शाम जाम से जूझने लगी है.

बना था प्लान

दरअसल, गत माह ट्रैफिक पुलिस ने रोडवेज बसों को परतापुर से भैंसाली डिपो तक जाने के लिए वाया रोहटा रोड और कंकरखेड़ा का रुट प्लान तैयार किया था. जिससे दिल्ली रोड, मैट्रो प्लाजा और घंटाघर पर लगने वाले जाम को कम किया जा सके.

लगने लगा जाम

रूट डायवर्जन प्लान कैंसिल होते ही दिल्ली रोड पर नवीन सब्जी मंडी गेट, टीपीनगर कट, बागपत चौराहा, मेट्रो प्लाजा, रेलवे रोड चौराहों पर भयंकर जाम की स्थिति बनने लगी है. शुक्रवार को दिनभर शहर के लोग जाम से जूझते रहे और देर शाम तक दिल्ली रोड से लेकर बेगमपुल तक वाहन घंटों सड़कों पर रेंगते दिखे.

भैंसाली डिपो पर लंबा जाम

सबसे अधिक विकराल स्थित भैंसाली डिपो पर बनी रही. रुट डायवर्जन होने के कारण शहर के अंदर आने वाली अन्य डिपो की बसें सवारियों को बाहर बाईपास पर उतार रही थीं. हालांकि अंदर रूट बहाल होने पर उन बसों की आवाजाही भी दोबारा डिपो तक शुरू हो गई है. जिसके कारण भैंसाली डिपो पर बसों की संख्या के कारण दिनभर जाम की स्थिति बनी रही. बस अड्डे के बाहर घंटों दिल्ली, मुजफ्फनगर, हरिद्वार, नोएडा, गाजियाबाद से आने वाली बसों की कतारें लगी रही.

डग्गामार बसों भी कतार में

रूट डायवर्जन के चलते शहर के अंदर डग्गमार बसों का संचालन प्रभावित हुआ था. शहर के अंदर आने के लिए 10 किमी अतिरिक्त चक्कर लगाने के बचने के लिए डग्गामार बसों को परतापुर तक ही संचालित किया जा रहा था. हालांकि अब दोबारा रूट खुलने से डग्गामार बसों की आवाजाही भी बस डिपो के बाहर तक बढ़ चुकी है.

रूट डायवर्जन के नए प्लान पर विचार चल रहा है. ऐसा विकल्प तलाशा जाएगा, जिससे किराया भी ना बढे़ और यात्रियों के समय की भी बचत हो.

नीरज सक्सेना, आरएम रोडवेज

बसों के कारण जाम लगना तो आम बात है लेकिन अब इस समस्या को ई-रिक्शा व ऑटो ने और भी बढ़ा दिया है. बसों के साथ इनके रूट पर भी कोई योजना बननी चाहिए.

साहिल

निगम बसों का संचालन जारी रहे लेकिन डग्गेमार बसों पर प्रतिबंध लगना चाहिए. इससे काफी हद तक जाम की समस्या खत्म हो जाएगी. किशन

सबसे अधिक बुरा हाल मेट्रो प्लाजा चौराहा और घंटाघर का रहता है. इन दोनों चौराहों पर बडे़ वाहनों के संचालन का समय निर्धारित करना या रूट बदलना जरूरी है.

अमित