क्त्रन्हृष्ट॥ढ्ढ: घाघरा में 50 से अधिक भू-माफिया एक्टिव हैं. वे डोरंडा, हिनू समेत कई इलाकों में एक बिल्डिंग में ऑफिस खोलकर बैठते हैं, फिर वहीं से ही जमीन की डील करते हैं. जमीन के हेराफेरी मामले में भू माफिया एक्टिव हैं. डोरंडा के घाघरा इलाके में फिलहाल हजारों एकड़ आदिवासी जमीन उपलब्ध है, जिसे बेचने और जबरन कब्जा करने में भू-माफिया जुटे हैं. वो मोटी रकम का लालच देकर आदिवासियों से जमीन लेकर बड़े कारोबारियों के बीच बेच रहे हैं. जिन जमीनों पर कब्जा नहीं हो रहा है, या-भूमाफिया के रास्ते में कोई रोड़ा बन रहा है उसकी हत्या करवा दी जा रही है. ऐसे में डीआईजी ने एरिया के इंस्पेक्टर और डीएसपी को जमीन कारोबारियों की सूची इकट्ठा करने का आदेश दिया है, ताकि उनलोगों पर शिकंजा कसा जा सके.

वर्चस्व की लड़ाई

राजधानी रांची और इसके आसपास के क्षेत्रों में जमीन विवाद में हत्या होना अब आम बात हो गई है. अधिकतर जमीन पर वर्चस्व की लड़ाई चल रही है. लेकिन डोरंडा थाना क्षेत्र के घाघरा और बड़ा घाघरा इलाके में इन दिनों जमीन को लेकर खूनी खेल ज्यादा देखने को मिल रहा है. घाघरा की कीमती जमीन पर जमीन माफिया अपनी गिद्ध नजर गड़ाए हुए हैं.

रिंग रोड ने बढ़ाई जमीन की कीमत

डोरंडा से नामकुम रिंग रोड को जोड़ने की वजह से बड़ा घाघरा में जमीन की कीमत आसमान छू रही है. बड़ा घाघरा में सैकड़ों एकड़ जमीन खाली पड़ी हुई है. रैयत इस पर खेती करते हैं, लेकिन गांव के कुछ भू-माफिया औने-पौने दाम में जमीन का सौदा कर रहे हैं. इस क्षेत्र की 80 फीसदी जमीन सीएनटी से प्रभावित है और विवादित भी. इसके बावजूद भू-माफिया जमीन की खरीद-फरोख्त धड़ल्ले से कर रहे हैं.

भू माफिया के खिलाफ खोला मोर्चा

स्थानीय भू-माफिया को जमशेदपुर, धनबाद के अलावा बिहार और यूपी के ब्रोकर भी सहयोग कर रहे हैं. जमीन पर कब्जा करने या कराने के लिए बकायदा बाहर से शूटर मंगवाए जा रहे हैं. मंगलवार की देर रात शंकर सुरेश पर हुई गोलीबारी और सामू की हत्या से आक्रोशित ग्रामीणों ने अब भू-माफिया के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. ग्रामीण अपनी जमीनों की घेराबंदी कर उस पर माफिया के खिलाफ चेतावनी भी लिख रहे हैं.