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महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के सेंट्रल लाइब्रेरी में अब स्टूडेंट्स को बुक्स सर्च करने के लिए बहुत मशक्कत नहीं करनी पड़ेगी. लाइब्रेरी में ऑनलाइन पब्लिक एक्सेस कैटलॉग सिस्टम लगाया जा रहा है. इसके साथ ही इलेक्ट्रॉनिक कैटलॉग का काम भी शुरू कर दिया गया है. हर दिन इसमें अधिक से अधिक किताबों को जोड़ा जा रहा है, ताकि नए सेशन से पहले पहले कंप्यूटराइज्ड कैटलॉग का कार्य पूरा किया जा सके. ऐसे में अब स्टूडेंट्स को अपनी मनचाही किताब ढूंढने में ज्यादा मशक्कत नहीं करनी पड़ेगी.

महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ प्रशासन ने सेंट्रल लाइब्रेरी को टेक्नो फ्रेंडली बनाने का कार्य शुरू कर दिया है. इसके तहत लाइब्रेरी में ऑनलाइन पब्लिक एक्सेस कैटलॉग सिस्टम लगाया जा रहा है. इस क्रम में इलेक्ट्रॉनिक कैटलॉग का काम भी शुरू कर दिया गया है. अब तक दस हजार से अधिक किताबों का डेटा कंप्यूटर में फीड किया जा चुका है.

कैंपस स्थित डॉ. भगवान दास केंद्रीय पुस्तकालय में करीब 3.50 लाख किताबें मौजूद हैं. वही पुस्तकालय को डिजिटलाइजेशन किये जाने का खाका काफी पहले तैयार किया गया था. लेकिन इसे अब तक मूर्त रूप नहीं दिया जा सका था. लंबे प्रयास के बाद ऑनलाइन पब्लिक एक्सेस कैटलॉग को सिस्टम पर किया गया है. खास बात यह है यह कार्य विद्यापीठ अपने संसाधन से करा रहा है. हर दिन इसमें अधिक से अधिक किताबों को जोड़ा जा रहा है, ताकि नए सेशन से पहले पहले कंप्यूटराइज्ड कैटलॉग का कार्य पूरा किया जा सके. ऐसे में अब छात्रों को अपनी मनचाही किताब ढूंढने में ज्यादा परेशानी नहीं होगी. एक क्लिक करने पर किताबों की पूरी लिस्ट आपके सामने होगी.

एक क्लिक पर शोध प्रबंध भी

विद्यापीठ प्रशासन ने रिसर्च थिसिस (शोध प्रबंध) भी अपलोड करने का निर्णय लिया है. शोध प्रबंधों को एक महीने के भीतर अपलोड करने का लक्ष्य है. इसके लिए एक लाख रुपये खर्च कर विशेष सॉफ्टवेयर खरीदा गया है. शोध प्रबंधों के अपलोड होने के बाद बस एक क्लिक पर इन्हें सर्च किया जा सकेगा.

आरएफआईडी से भी होगा लैस

टेक्नो फ्रेंडली के तहत लाइब्रेरी को अपग्रेड करने की व्यापक योजना बनाई गई है. फिलहाल छात्र पुस्तकालय के काउंटर पर लगे कंप्यूटर पर की-बोर्ड व माउस के माध्यम से अपने विषय की किताब सर्च करेंगे. इसके लिए पांच सिस्टम लगाने का कार्य चल रहा है. इसके बाद लाइब्रेरी को रेडियोफ्रेक्वेंसी आईडेंटीफिकेशन (आरएफआईडी) से लैस करने की योजना है. आरएफआईडी से लैस होने के बाद छात्र मशीन में लगे स्क्रीन पर टच कर किताबों को सर्च कर सकेंगे. यही नहीं तब लाइब्रेरी की किताबें ऑनलाइन भी हो जाएंगी. जिससे कहीं से भी किताबों को सर्च करने के साथ ही पढ़ा जा सकेगा.

लाइब्रेरी को टेक्नो फ्रेंडली बनाने के पीछे स्टूडेंट्स को अधिक से अधिक सुविधाएं उपलब्ध कराना मेन मकसद है. इससे उनका समय बचेगा. इसके लिए नए सेशन से पहले कंप्यूटराइज्ड कैटलॉग का कार्य तेजी से कराया जा रहा है. नए सत्र से पहले यह कार्य पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है.

-ओमप्रकाश, रजिस्ट्रार

काशी विद्यापीठ

हाईलाइटर---

-एक्सेस कैटलॉग सिस्टम से लैस हुई लाइब्रेरी

-पुस्तकालय में मैनुअल के बजाय अब कंप्यूटराइज कैटलॉग की सुविधा जल्द

-अब तक दस हजार से अधिक किताबों का डेटा कंप्यूटर में हुआ फीड