क्त्रन्हृष्ट॥ढ्ढ : नाबालिग बच्ची को घर में रख शारीरिक-मानसिक रुप से प्रताडि़त करने वाले इंस्पेक्टर उमेश ठाकुर से जुड़े केस की स्टेटस रिपोर्ट सीआईडी एडीजी अजय कुमार सिंह ने रांची पुलिस से मांगी है. उन्होंने कहा कि पूरे मामले की छानबीन की जाएगी. इस बाबत फाइल को फिर से खंगाला जाएगा. गौरतलब है कि नाबालिग बच्ची पर जुल्म करने के मामले में सस्पेंड रह चुके इंस्पेक्टर उमेश ठाकुर को मिशनरीज से जुड़े संस्थाओं से बच्चों के बेचे जाने के मामले की जांच का जिम्मा दिए जाने पर सवाल उठ रहे हैं.

जांच में दोषी पाए गए थे इंस्पेक्टर

नाबालिग मेड के साथ प्रताड़ना के मामले में सीआईडी इंस्पेक्टर उमेश ठाकुर दोषी पाए गए थे. इंस्पेक्टर को विभाग ने सस्पेंड कर दिया था. सीआईडी एसपी जया रॉय ने 2016 में पूरे मामले की जांच करने के बाद रिपोर्ट एडीजी अजय भटनागर को सौंप दी थी. इसमें उन्होंने कहा था कि नाबालिग को इंस्पेक्टर, उनकी पत्‍‌नी और उसके परिजन प्रताडि़त कर रहे थे.

भगोड़ा घोषित किया था इंस्पेक्टर को !

नाबालिग बच्ची पर जुल्म करने के आरोप में इंस्पेक्टर उमेश ठाकुर के खिलाफ नामकुम थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी. इसके बाद से ही वह फरार हो गया था. ऐसे में रांची पुलिस ने उसे भगोड़ा घोषित कर दिया था. इतना ही नहीं, उसे सस्पेंड भी किया गया था. दूसरी तरफ, बच्ची के रेस्क्यू कराए जाने के लिए बनाई गई टीम के सदस्यों को इंस्पेक्टर के एक रिश्तेदार द्वारा धमकी दिए जाने का भी मामला सामने आया था.