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PATNA: पशुपालन के लिए राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत होने के बाद बिहार सरकार ने अपने पशुधन की हिफाजत की पहल तेज कर दी है. राज्य सरकार की ओर से पालतू पशुओं की नस्ल सुधारने एवं उनके बेहतर स्वास्थ्य के लिए सभी प्रकार की बीमारियों के इलाज की व्यवस्था की जा रही है.

दोनों सरकार करेगी खर्च

राष्ट्रीय पशुधन स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण योजना के तहत चालू वित्तीय वर्ष में इसके लिए 22.85 करोड़ रुपए की व्यवस्था की गई है. इस काम में निजी संस्थाओं एवं टीकाकर्मियों की भी मदद ली जाएगी. योजना पर आने वाली लागत की 60 फीसद राशि केंद्र और शेष 40 फीसद राशि राज्य सरकार की ओर से खर्च की जाएगी. निजी संस्थाओं या टीकाकर्मियों को प्रति टीका के हिसाब से भुगतान किया जाएगा. योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए पशुपालन निदेशक को जिम्मेवारी दी गई है. योजना का मुख्य मकसद राज्य के संक्रामक रोगों से पशुओं की हिफाजत के लिए एफएमडी का टीका लगाकर पशुपालकों को होने वाले नुकसान से बचाना है.

घर में लगेगा टीका

टीका लगाने के लिए किसानों को पशुओं को अस्पताल तक लाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. स्वास्थ्य कर्मचारी घर-घर जाकर टीका लगाएंगे. योजना को समय पर पूरा करने के लिए केंद्र सरकार के हिस्से के 12 करोड़ 39 लाख रुपये बिहार को दे दिए गए हैं. राज्य सरकार को अपनी ओर से 10 करोड़ 46 लाख रुपये खर्च करने हैं. निजी टीकाकरण के लिए प्रति टीका मात्र तीन रुपये का भुगतान किया जाएगा. योजना का क्रियान्वयन अभियान के रूप में किया जाना है. छह माह से अधिक के सभी जानवरों को टीका लगाया जाना है.

बिहार को पशुपालन खासकर टीकाकरण में उल्लेखनीय कामयाबी के लिए 25 अक्टूबर को बेस्ट स्टेट का अवार्ड मिल चुका है. गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने पशु व मत्स्य संसाधन मंत्री पशुपति पारस और सचिव डॉ. एन विजयलक्ष्मी को यह अवार्ड दिया था.