- आलोक वर्मा की विदाई का सबब बने यूपी के कई मामले
- सीवीसी ने अपनी जांच में कई मामलों में पड़ताल की बताई जरूरत
- दागी अफसरों की तैनाती, बैंक फ्रॉड, एनआरएचएम केस बना वजह
- ईडी के एक अफसर का सीबीआई के मामलों में दखल भी शामिल


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LUCKNOW: सेंट्रल विजिलेंस कमीशन (सीवीसी) ने आलोक वर्मा पर लगे आरोपों की जांच के दौरान इन मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि भले ही इसमें अभी पुख्ता सबूत हासिल नहीं हुए हैं पर इसकी गहन पड़ताल करना आवश्यक है। यही वजह है कि आलोक वर्मा का गुरुवार रात सिर्फ तबादला करने का निर्णय लिया गया। दैनिक जागरण आई नेक्स्ट ने पहले ही यह संकेत दिया था कि आलोक वर्मा को लेकर सीबीआई में छिड़े विवाद की जड़ यूपी के कई चर्चित मामले हैं। सीवीसी की प्रारंभिक जांच में इसकी पुष्टि हो गयी है।

दागी अफसरों की तैनाती का प्रयास
सीवीसी जांच में आलोक वर्मा पर लगे आरोपों में सीबीआई में दागी अफसरों की तैनाती का प्रयास भी शामिल है। सूत्रों की मानें यह मामला यूपी कैडर के एक आईपीएस से जुड़ा है जिनको सीबीआई में लाने के लिए आलोक वर्मा ने एड़ी चोटी का जोर लगा दिया था। इसमें सफलता न मिलने पर इस अफसर को यूपी कैडर में ज्वाइनिंग देनी पड़ी थी। इसके अलावा सीबीआई लखनऊ की स्पेशल क्राइम ब्रांच में बैंक फ्रॉड से जुड़ा एक मामला भी अचानक तब सुर्खियों में आ गया जब इसे एंटी करप्शन ब्रांच में ट्रांसफर करने का एसपी ने विरोध करते हुए सीबीआई के एक ज्वाइंट डायरेक्टर पर घोटालेबाजों को बचाने के तमाम आरोप जड़ दिए। वहीं सीबीआई ने ज्वाइंट डायरेक्टर को क्लीन चिट देने में देर नहीं की। इसके विपरीत एससीबी के एसपी के खिलाफ ही कानूनी कार्रवाई अंजाम दी जाने लगी। इसे लेकर सीबीआई कैडर में असंतोष पनपने लगा और देश की शीर्षतम जांच एजेंसी में बड़े पैमाने पर गुटबाजी शुरू हो गयी। सीवीसी ने अपनी जांच में कहा कि इस मामले में विस्तृत जांच करना जरूरी है। कुछ ऐसा ही एनआरएचएम घोटाले के एक आरोपी को लेकर भी सामने आया जिसमें सीबीआई ने उस पर कानून का शिकंजा कसने में हीलाहवाली की। सीवीसी ने यह भी कहा कि यूपी एटीएस के एएसपी राजेश साहनी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के मामले की जांच को टेकओवर न करके कुछ आईपीएस को बचाने की कोशिश भी की गयी।

ईडी भी विवाद की बड़ी वजह
इसके अलावा ईडी को भी सीबीआई में शुरू हुए विवाद की बड़ी वजह माना जा रहा है। सीबीआई के सूत्रों की मानें तो बीते दो साल में ईडी और सीबीआई के कुछ अफसरों की जुगलबंदी की वजह से यह नौबत आई। इसकी शुरुआत ईडी के असिस्टेंट डायरेक्टर एनबी सिंह को रिश्वत लेते हुए सीबीआई द्वारा गिरफ्तार करने से हुई थी। इस मामले की गंूज दिल्ली तक हुई और ईडी के अफसर को ट्रैप करने वाले सीबीआई के एसपी को अफसरों की गहरी नाराजगी का सामना करना पड़ा। इतना ही नहीं, एसपी को सीबीआई में एक्सटेंशन देने के बजाय उनके मूल कैडर में वापस भेज दिया गया। सूत्र बताते हैं कि यादव सिंह कांड से लेकर एनआरएचएम घोटाले के आरोपी एक पूर्व मंत्री के मामले को लंबा लटकाना तमाम अफसरों को अखर रहा था जिसका दोनों एजेंसियों में अंदरखाने विरोध शुरू हो गया था।

ये मामले बनते गये वजह
- यूपी कैडर के एक आईपीएस को सीबीआई में तैनात कराने की कोशिश
- बैंक फ्रॉड से जुड़े मामले में सीबीआई के ज्वाइंट डायरेक्टर को बचाने का प्रयास
- बसपा सरकार में एनआरएचएम घोटाले के आरोपी पूर्व मंत्री को क्लीन चिट देने की कोशिश
- एटीएस एएसपी राजेश साहनी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत की जांच को लेने से इंकार
- ईडी के असिस्टेंट डायरेक्टर को ट्रैप करने वाले एसपी को सीबीआई में एक्सटेंशन न देना
- ईडी के एक अफसर का सीबीआई के कई मामलों की जांच में दखल देने से नाराजगी

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