- जजों की मदद से हाईकोर्ट में नौकरी दिलाने वाले गैंग से जुड़ा मामला

- एसटीएफ ने 15 दिन पहले किया था गैंग के कई सदस्यों को गिरफ्तार

- 24 अप्रैल को यूपी एसटीएफ ने किया खुलासा

- 1400 लोगों को गैंग ने बनाया था शिकार

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LUCKNOW : 'इलाहाबाद और पटना हाईकोर्ट में नौकरी दिलाने के नाम पर फर्जीवाड़ा करने वाले गिरोह की वजह से जजों की साख दांव पर लग गयी है। इस मामले की जांच सीबीआई से करायी जाए ताकि न्यायपालिका की ख्याति और आम आदमी का उस पर भरोसा कायम रह सके, साथ ही इस मामले की जड़ तक भी पहुंचा जा सके। यह लाइनें उस लेटर की है जो इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ के जज रंगनाथ पांडेय ने चीफ जस्टिस को लिखा है। बीस दिन पहले यूपी एसटीएफ द्वारा हाईकोर्ट में नौकरी दिलाने के नाम पर फर्जीवाड़ा करने वाले गिरोह का पर्दाफाश होने के बाद उन्होंने चीफ जस्टिस से पूरे प्रकरण की जांच सीबीआई से कराने की मांग की है.

50 करोड़ रुपये जुटाए|
जस्टिस आरएन पांडेय ने अपने लेटर में लिखा है कि जालसाजों के इस गैंग के द्वारा हाईकोर्ट के जजों के नाम पर 50 करोड़ रुपये जुटाने की बात मीडिया रिपो‌र्ट्स में कही गयी है। रिपोर्ट के मुताबिक हाईकोर्ट में क्लास थ्री और फोर के कर्मचारियों की भर्ती के लिए अप्लाई करने वालों को रिश्वत देने पर नौकरी देने का वादा किया गया था। यदि ये रिपो‌र्ट्स सही हैं तो हमारे नाम से इस तरह का कृत्य किये जाने से हमारा सिर शर्म से झुक गया है। यह ज्यूडिशियरी के लिए दुखद दिन है क्योंकि इससे आम आदमी के बीच यह धारणा बनेगी कि संविधान की रक्षा करने वालों की सत्यनिष्ठा ही संदेह के घेरे में है। यदि हाईकोर्ट पर ही क्लर्क की भर्ती में रिश्वत लेने के आरोप होंगे तो हम लोगों को न्याय दिलाने का भरोसा कैसे कायम रख पाएंगे। जस्टिस आरएन पांडेय ने यह पत्र लिखने की बात तो स्वीकारी है, लेकिन इस पर कोई कमेंट करने से इंकार कर दिया।

1400 लोगों को बनाया था शिकार
बताते चलें कि बीती 24 अप्रैल को यूपी एसटीएफ ने एक ऐसे गैंग को दबोचा था जो अब तक 1400 लोगों को इलाहाबाद हाईकोर्ट, पटना हाईकोर्ट, इनकम टैक्स, सिंचाई विभाग, सेतु निगम में नौकरी का झांसा देकर करोड़ों रुपये ऐंठ चुका था। गैंग का सरगना शमीम खुद को इलाहाबाद हाईकोर्ट का डिप्टी रजिस्ट्रार बताता था। एसटीएफ ने इसका सुराग मिलने पर इलाहाबाद के शिवकुटी में छापेमारी कर मोहम्मद शमीम अहमद सिद्दीकी, अंबेडकर नगर निवासी राघवेंद्र सिंह, प्रयागराज निवासी नीरज पराशर और रमेश चंद्र यादव उर्फ गुड्डू को अरेस्ट किया था।

देश भर में तैयार किया था नेटवर्क
सरगना मो। शमीम सिद्दीकी ने बताया था कि वह इलाहाबाद हाईकोर्ट के कोऑपरेटिव सोसायटी में अकाउंटेंट के पद पर वर्ष 1978 से तैनात है। लेकिन, कोर्ट कैंपस के बाहर वह अपना परिचय लोगों को डिप्टी रजिस्ट्रार हाईकोर्ट इलाहाबाद के रूप में देता था। इसी बात के झांसे में आकर लोग उससे जुड़ने लगे। इसी दौरान उसे नौकरी के नाम पर लोगों को ठगने का प्लान सूझा। अपने साथियों की मदद से उसने देश भर में अपना नेटवर्क तैयार किया और तमाम लोगों को ठग कर करोड़ों रुपये जुटाए जिससे उसने प्रयागराज के सोरांव कस्बे में देवास मोटर्स, देवास एसेसरीज, देवास यामाहा एजेंसी खोलीं। इसके अलावा प्रयागराज में ही तमाम जगहों पर जमीनों में भी निवेश किया।