रांची : फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट (एफसीआरए) के तहत विदेश से चंदे के रूप में मिलने वाले करोड़ों रुपये से पीडि़त मानवता की सेवा की आड़ में अपनी महत्वाकांक्षा साध रहे रांची के 38 एनजीओ के ठिकानों पर सीआइडी की टीम ने शुक्रवार को एक साथ छापेमारी की. सीआइडी के एडीजी अजय कुमार सिंह के आदेश पर अलग-अलग गठित इंस्पेक्टर-दारोगा व पुलिसकर्मियों की 38 टीम बनाई गई थी, जो प्रत्येक एनजीओ में पहुंची और वहां तलाशी ली. टीम को कई महत्वपूर्ण दस्तावेज हाथ लगे हैं, जिसकी जांच की जाएगी, ताकि विदेशी फंड के दुरुपयोग से संबंधित जानकारी मिल सके.

मच गई अफरातफरी

सीआईडी की अलग-अलग टीमों के अचानक पहुंचने से मिशनरी संस्थाओं में अफरा-तफरी का माहौल देखा गया. हालांकि जांच के दौरान क्या-क्या पाया गया यह भी सामने नहीं आ पाया है. सीआईडी सूत्रों के अनुसार जांच अभी लंबी चलेगी. जांच पूरा होने के उपरांत ही पूरी जानकारी दी जाएगी.

जमा किए थे कागजात

विदेशी फंड मामले की जांच सीआईडी को मिलने के बाद, सीआईडी के द्वारा सभी मिशनरी संस्थाओं को नोटिस भेजकर उन से 10 बिंदुओं पर जवाब मांगा गया था. इनमें एनजीओ का रजिस्ट्रेशन सोसायटी रजिस्ट्रेशन एक्ट, कंपनी एक्ट या इंडियन ट्रस्ट एक्ट में से किसके तहत है. संस्था बनने की तिथि, कार्यक्षेत्र, ऑफिस बेयरर के नाम और पते, फंडिंग का स्त्रोत एफसीआरए है या कोई दूसरा भी स्त्रोत है.

रांची के इन एनजीओ पर छापा

-बेथल मिशन

-ब्रदर्स ऑफ सेंट गैब्रियल एजुकेशन सोसाइटी

- कैपुचिन फ्रियर्स माइनर सोसाइटी

कैथोलिक हेल्थ एसोसिएशन

डाउटर्स ऑफ सेंट अनेरंची

डॉन बास्को टेक्निकल स्कूल

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मांगे गए हैं ये डॉक्यूमेंट्स

- एफसीआरए रजिस्ट्रेशन पेपर

- एफसीआरए बैंक खाता व एफसीआरए सब एकाउंट

- एफसीआरए फंड का एमओयू पेपर

- कैश बुक, लेजर, स्टांप पेमेंट रजिस्टर, कैश बुक

परचेज कमेटी फाइल, कार्यकारिणी कमेटी रजिस्टर,

डोनर फाइनल रिपोर्ट, एक्टिविटी रिपोर्ट

- संपत्ति, बिल वाउचर, लॉगबुक भ्रमण व फिल्ड रिपोर्ट

- एफसीआरए रजिस्टर्ड ई-मेल आइडी व ई-मेल आइडी

- संस्था द्वारा संचालित अस्पताल, स्कूल, सेल्टर होम का पता

- सभी रजिस्टर की कॉपी, गाड़ी, जमीन आदि के कागजात लेने हैं

रडार पर हैं 88 एनजीओ

झारखंड पुलिस के अपराध जांच विभाग (सीआईडी) के रडार पर 88 एनजीओ हैं. इन एनजीओ पर कुल 265 करोड़ रुपये की विदेशी धन का दुरुपयोग करने का आरोप है. सीआईडी की ओर से इन्हें नोटिस जारी कर जवाब देने को कहा गया है. उनसे यह भी पूछा गया है कि क्या वे प्रासंगिक कानून के तहत पंजीकृत है या नहीं, साथ ही उनके पदाधिकारियों का विवरण, विदेश सहित धन का स्त्रोत और बीते पांच साल के खर्च व आय का विवरण व अन्य जानकारियां मांगी गई हैं. इतना ही नही, इन एनजीओ ने कथित तौर पर वार्षिक आयकर दाखिल नहीं किया और इन्होंने अपने आय व खर्च के स्त्रोत को छिपाया है.