सीबीएसई को सताई स्टूडेंटस के सेहत की चिंता

9वीं से लेकर 12 तक इस सत्र से

हेल्थ एंड फिजिकल एजुकेशन जरूरी

MEERUT। स्टूडेंट्स में पढ़ाई का बोझ व गैजेट्स के प्रति बढ़ते रूझान के चलते उनमें आउटडोर एक्टिविटिज काफी कम हो गई हैं। जिससे न केवल बच्चों के सेहत खराब हो रही है बल्कि उनमें कम उम्र में ही बीमारियां भी पनप रही है। इसके मददेनजर सीबीएसई ने इस सेशन से नौंवी से 12वीं के स्टूडेंट्स के लिए हेल्थ एंड फिजिकल एजुकेशन यानि एचपीई अनिवार्य कर दिया है।

डेवलपमेंट के लिए हुआ जरूरी

स्कूलों में फिजिकल एजुकेशन पर अधिक ध्यान न देने की वजह से सीबीएसई ने एचपीई को मैन स्ट्रीम में शामिल किया है। अभी तक सिर्फ 11वीं और 12वीं में यह विषय ऑप्शनल था। दूसरे देशों की तर्ज पर स्टूडेंट्स के ऑवर ऑल डेवलपमेंट और उनको फिजिकली और मेंटली फिट रखने के लिए यह कदम उठाया है। इसके लिए स्कूलों में डेली 40 से 45 मिनट का एक पीरियड इस सब्जेक्ट के लिए रखना होगा। इसके अलावा इसके मा‌र्क्स को भी दूसरे सब्जेक्टस के साथ जोड़ा जाएगा। हालांकि इस फैसले को शहर के स्कूल संचालक व पैरेंट्स दोनों की बेहतर शुरुआत बता रहे हैं।

इनका है कहना

यह सीबीएसई का अच्छा फैसला है। अभी तक स्टूडेंट्स पर सिर्फ पढ़ाई का बोझ ही बना हुआ था। इससे उनका एकेडमिक्स व फिटनेस भी इम्प्रूव होगी।

प्रीति मल्होत्रा, प्रिंसिपल, द अायर्स स्कूल

बदलते लाइफस्टाइल में यह फैसला स्टूडेंट्स की सेहत के लिए बेहतर और जरूरी है। स्पो‌र्ट्स और फिटनेस के प्रति वह अवेयर होंगे। अभी पूरी गाइडलाइन आनी बाकी है।

चंद्रलेखा जैन, प्रिंसिपल, सेंट जोंस सीनियर सेकेंडी स्कूल

बच्चों में पढ़ाई का बोझ बहुत ज्यादा है। फिजिकल एजुकेशन कोगैर जरूरी मानकर स्कूल और पैरेंट्स दोनों की ध्यान नहीं देते। इसे अनिवार्य कर देने से इस सोच में बदलाव आएगा।

शैंकी वर्मा,ैरेंट्स

दूसरे देशों के स्कूलों में फिजिकल फिटनेस पर काफी ध्यान दिया जाता है। सीबीएसई के इस फैसले से हमारे यहां के स्टूडेंट्स भी शुरु से ही हेल्थ के प्रति अवेयर होंगे।

विशाखा,ेरेंट्स

स्टूडेंट्स को कॅरियर की एक और स्ट्रीम मिलेगी। अभी बहुत कम बच्चों का रूझान इस तरफ है। मेन स्ट्रीम में एचपीई के आने से बच्चों को काफी फायदा होगा।

अनमोल, पेरेंट्स