क्त्रन्हृष्ट॥ढ्ढ: कन्फ्यूजन ही कन्फ्यूजन है.. सॉल्यूशन के रास्तों की तलाश है. चैंबर चुनाव में जीत की जमीन सुनिश्चित करने के लिए कैंडिडेट्स को कई पगडंडियां पार करनी होगी. सोशल मीडिया ने राहें थोड़ी बहुत आसान भले कर दी हों लेकिन विभिन्न बाजारों की भीड़ को चीरते हुए कैंडिडेट्स को वोटरों के पास तो जाना ही होगा. चैंबर चुनावों में एक टीम सशक्त नजर आती है तो उसके कई ऐसे भी कैंडिडेट्स हैं जिन्हें दूसरी टीम के जुझारू कैंडिडेट्स कड़ी चुनौती दे सकते हैं. टीम मारू में कई चेहरे नए हैं तो टीम आरडी ने अपनी टीम को लेकर अभी पत्ते नहीं खोले हैं. टीम आरडी में कई ऐसे नगीने हैं जो टीम मारू की टीम के कई कैंडिडेट्स को चुनौती दे सकते हैं.

व्यावसायिक हित सर्वोपरि: अमित शर्मा

नई सोच, नई पीढ़ी और नया जज्बा. चुनावी मुद्दों में समग्र राज्य के विकास की बात है साथ ही रोजगारपरक उद्योगों की स्थापना की उम्मीद दिखती है. टीम मारू के युवा कैंडिडेट अमित शर्मा की सोच है कि आम नागरिकों, आम व्यवसायियों और उद्यमियों के हितों की रक्षा करना उनका कर्तव्य होगा. व्यापारियों की समस्याओं को उचित मंच पर ले जाना और उसके निष्पादन के लिए प्रयास करना उनकी प्राथमिकता होगी. औद्योगिक विकास में चैंबर की भूमिका महत्वपूर्ण होती है और चैंबर के विचारों को दरकिनार कर कोई भी सरकार राज्य का विकास नहीं कर सकती है. अमित कहते हैं कि विकास की नई सोच को स्थान देना है ताकि व्यावसायिक और औद्योगिक विकास के साथ-साथ राज्य के विकास में भी चैंबर अपनी भूमिका निभा सके. अगर वो चुनाव जीतते हैं तो व्यावसायिक हित उनके लिए सर्वोपरि होगा. अमित चैंबर से बीते 2-3 सालों से जुड़े हुए हैं.

चैंबर में विजन स्टेटमैन जरूरी: आदित्य मल्होत्रा

टीम आरडी सिंह के आदित्य मल्होत्रा कहते हैं कि किसी भी संस्थान, सरकार या व्यापार में दूरदर्शी सोच होना अतिआवश्यक है. चूंकि चैंबर ट्रेड की शीर्ष संस्था हैं और राज्य के विकास में इसका अहम योगदान रहा है. इसलिए चैंबर को एक विजन स्टेटमैन बनना होगा. हमें मूल्यांकन करना होगा कि आखिर राज्य में सुविधाओं की कमी की वजह क्या है. क्यों राजस्व नहीं बढ़ रहा, क्यों राज्य विकास नहीं कर पा रहा. आदित्य कहते हैं कि अगर उन्हें अवसर मिला तो वे व्यवसायियों के लिए संघर्ष करेंगे और चैंबर में एक ऐसा विजन डॉक्यूमेंट तैयार करेंगे जिससे व्यवसायियों और उद्यमियों को एक मंच देने का रास्ता प्रशस्त हो सके. चैंबर में इस वक्त नई सोच की जरूरत है. उनका कहना है कि चैंबर में राजनीति नहीं होनी चाहिए बल्कि चैंबर के बहु उद्देशीय मूल्यों के संव‌र्द्धन के लिए काम करना होगा. चैंबर को व्यक्तिगत लाभ से उबारना होगा. आदित्य मल्होत्रा बीते 14-15 वर्षो से चैंबर से जुड़े हुए हैं. वे झारखंड बिजनेस डेवलपमेंट फोरम के कोषाध्यक्ष हैं और रोटरी क्लब से भी जुड़े रहे हैं. उन्हें सोशल वर्कर के रूप में ज्यादा जाना जाता है.