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LUCKNOW : सहारनपुर में पिछले साल हुए जातिगत संघर्ष में अरेस्ट किये गए भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर उर्फ रावण पर लगी रासुका को प्रदेश सरकार ने हटाने का निर्णय लिया है। उसके साथ ही दो अन्य आरोपियों पर से भी रासुका हटाते हुए इन सभी को रिहा करने के निर्देश जारी किये गए हैं। सरकार के इस निर्णय के सियासी मायने निकाले जा रहे हैं।

छह पर लगी थी रासुका
मई 2017 में सहारनपुर में हुए जातीय संघर्ष के मामले में कई एफआईआर दर्ज की गई थीं। इन मामलों के भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर उर्फ रावण, सोनू उर्फ सोनपाल, सुधीर, विलास उर्फ राजू, सोनू और शिवकुमार पर रासुका तामील की गई थी। तभी से ये सभी जेल में बंद थे। कई संगठन इनकी रिहाई की मांग कर रहे थे। प्रमुख सचिव गृह अरविंद कुमार ने बताया कि बीती 6 सितंबर को सोनू उर्फ सोनपाल, सुधीर और विलास से रासुका हटाते हुए उन्हें अगले दिन रिहा कर दिया गया था। उन्होंने बताया कि चंद्रशेखर उर्फ रावण की मां के प्रार्थनापत्र पर सरकार ने सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए उस पर से रासुका हटाते हुए रिहा करने के निर्देश दिये हैं। इसके साथ ही दो अन्य आरोपी सोनू व शिवकुमार को भी रावण के साथ ही रिहा किया जाएगा।

तलाशे जा रहे सियासी मायने
चंद्रशेखर उर्फ रावण व उसके पांच साथियों से रासुका हटाते हुए उन्हें रिहा करने के प्रदेश सरकार के निर्णय के सियासी मायने भी निकाले जा रहे हैं। जानकार इसे आगामी लोकसभा चुनाव में सपा-बसपा के संभावित गठबंधन की काट के तौर पर देख रहे हैं। एससी-एसटी एक्ट को लेकर संविधान संशोधन व रावण की रिहाई कर प्रदेश सरकार दलितों को यह संदेश देना चाह रही है कि बीजेपी सरकार ही उसकी असल चिंता कर रही है।

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