टीईटी रिजल्ट में फेर बदल से परीक्षा की तिथि बदलने के आसार

हाईकोर्ट के निर्देश के बाद टीईटी 2018 का रिजल्ट बदलना तय

prauyagarj@inext.co.in

PRAYAGRAJ: सूबे के परिषदीय प्राथमिक स्तर के स्कूलों में सहायक अध्यापक के 69000 पदों पर नियुक्ति के लिए होने वाली लिखित परीक्षा की तिथि बढ़ने के पूरे आसार है। 6 जनवरी को होने वाली लिखित परीक्षा पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश का सीधा असर पड़ेगा। यूपी टीईटी 2018 में पूछे गए तीन प्रश्नों के गलत जवाब पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने अभ्यर्थियों को समान अंक देने का निर्देश दिया है। ऐसे में बड़ी संख्या में यूपी टीईटी 2018 का परिणाम बदलने के आसार हैं। इसके बाद परीक्षा संस्था को अब नए सिरे से पुन: परिणाम ऑनलाइन जारी करने के बाद लिखित परीक्षा के लिए फिर से आवेदन लेना होगा।

आसंर की आने के बाद विवाद

यूपी टीईटी का आयोजन करने वाली संस्था परीक्षा नियामक प्राधिकारी की ओर से आंसर की पर आपत्तियां लेने के बाद प्राथमिक स्तर में छह व उच्च प्राथमिक स्तर पर तीन सवालों के जवाब बदले गए थे। यही नहीं प्राथमिक स्तर में एक प्रश्न के आंसर के सभी विकल्पों को गलत मानते हुए सभी को समान अंक देने का निर्णय लिया गया था। जबकि प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्तर पर दो-दो ऐसे प्रश्न थे, जिनके आंसर के विकल्पों में दो-दो विकल्प सही थे। इसके बाद विवाद शुरू हो गया।

14 प्रश्नों के आंसर पर सवाल

यूपी टीईटी 2018 में अभ्यर्थियों ने कुल 14 प्रश्नों के जवाब को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। इसमें से ¨हदी के दो और उर्दू के एक प्रश्न के उत्तर को गलत मानकर कोर्ट ने सभी अभ्यर्थियों को समान अंक देने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट के आदेश में सबसे विशेष बात यह रही कि हिन्दी के जिन प्रश्नों के आंसर में दो-दो विकल्प सही माने गए थे। उन्हीं प्रश्नों के समान अंक देने का कोर्ट ने निर्देश दिया है।

अब डेट बढ़ाना ही विकल्प

टीईटी 2018 के संबंध में हाईकोर्ट की ओर से बुधवार को आए आदेश के बाद फिलहाल परीक्षा नियामक प्राधिकारी के पास लिखित परीक्षा की डेट बढ़ाने के अलावा कोई विकल्प नहीं दिख रहा है। तीन प्रश्नों के समान अंक देने के हाईकोर्ट के निर्देश के बाद परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय या तो संशोधित रिजल्ट जारी करे या फिर इसे हाईकोर्ट की डबल बेंच में चुनौती दे। दोनों ही परिस्थितियों में छह जनवरी को आयोजित होने वाली लिखित परीक्षा के आसार कम ही हैं। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण ये है कि रिजल्ट देने में ऑनलाइन आवेदन लेना होगा। जिसमें समय लगेगा।

अभी तक कोर्ट के आदेश की कापी नहीं मिली है। कापी मिलने के बाद निर्देशों का पालन किया जाएगा।

अनिल भूषण चतुर्वेदी

सचिव, परीक्षा नियामक प्राधिकारी