सीएचसी-पीएचसी से रिफर हुए केसेज का फालोअप करना होगा जरूरी

वॉट्सअप ग्रुप बनाकर करना होगा सूचना का आदान-प्रदान

कर्मचारियों को दी गई ट्रेनिंग, मेंटेन करना होगा रजिस्टर

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ALLAHABAD: गांव के सामुदायिक केंद्रों से शहर के सरकारी हॉस्पिटल्स में रेफर हुए केसेज का अब फॉलोअप मेंटेन करना होगा. ध्यान रखना होगा कि मरीज का सही इलाज हुआ या नही. इसका पूरा फीडबैक अब सरकार को भेजना होगा. जच्चा-बच्चा को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करने के लिए सरकार कदम उठाने जा रही है. इसको लेकर सीएचसी-पीएचसी के स्टाफ को ट्रेंड किया जा रहा है.

गंभीर मामलों पर सीरियस हुई सरकार

पिछले कुछ दिनों में ऐसे कई मामले सामने आए जिसमें ग्रामीण हॉस्पिटल्स से रेफर किए गए केसेज में उचित इलाज नहीं किया गया. कहीं मरीज सरकारी हॉस्पिटल नहीं पहुंचा तो कहीं प्राइवेट संस्थान में भर्ती हो गया. यही कारण है कि अब सरकार चाहती है कि रेफर किए मामलों का रजिस्टर मेंटेन किया जाए. मरीज को रेफर करते समय रेफरल हॉस्पिटल को मरीज की कंडीशन और दिए गए इलाज की पूरी जानकारी दी जाए. ताकि बेहतर फॉलोअप होने से मरीज को तत्काल उचित इलाज मुहैया कराया जा सके.

एक क्लिक में पहुंचाइए जानकारी

सरकारी आदेश में यह भी कहा गया है कि जिले की तमाम सीएचसी-पीएचसी के मेडिकल ऑफिसर्स और शहर के डफरिन हॉस्पिटल व मेडिकल कॉलेज के बीच एक वॉट्सअप ग्रुप बनाकर ऐसी सूचनाओं का तत्काल आदान-प्रदान किया जाए. हो सके तो मरीज के पहुंचने से पहले संबंधित डॉक्टर और स्टाफ को केस हिस्ट्री पता चल जाए. गर्भवती महिलाओं व जच्चा-बच्चा से जुड़े गंभीर केसेज को फ‌र्स्ट रेफरल यूनिट सहित डफरिन हॉस्पिटल व एसआरएन हॉस्पिटल भेजा जाता है. इसीलिए इनके बीच वॉट्सअप ग्रुप बनाने की बात की जा रही है.

दिनभर चली ट्रेनिंग

महत्वपूर्ण योजना को शुरू करने के लिए बुधवार को सीएमओ ऑफिस में ट्रेनिंग का आयोजन किया गया. इसमें टेक्निकल सपोर्ट यूनिट सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने रेफरल मामलों के फॉलोअप के तरीके बताए. इसमें सीएचसी-पीएचसी के मेडिकल आफिसर्स सहित डफरिन और एसआरएन हॉस्पिटल का स्टाफ भी मौजूद रहा.

फैक्ट फाइल

जिले में कुल सीएचसी व पीएचसी- 20

अतिरिक्त पीएचसी- 60

प्रतिदिन रेफर होने वाले मामले- 40 से 50

रेफर मामलों की फालोअप रखना अधिक जरूरी है. इससे मरीज को बेहतर इलाज प्रदान करने के साथ जच्चा-बच्चा मृत्यु दर को भी कम किया जा सकता है. फिलहाल ट्रेनिंग देकर सभी को फालोअप मेंटेन का तरीका बताया जा रहा है.

-डॉ. सत्येंद्र राय, प्रभारी एनएचएम स्वास्थ्य विभाग