रेलवे आफिसर की मौत के मामले में ठेकेदार समेत 4 पर चार्जशीट

प्वाइंटर---

-ईमानदार अफसर पर भारी पड़ा था रेलवे का भ्रष्ट तंत्र, परेशान होकर कर लिया था सुसाइड

-आंदोलन के बाद किया गया था मामला सीबीआई के सुपुर्द

देहरादून: हर कदम पर भ्रष्टाचार की हार चाहने वाले इस खबर से सुकून महसूस कर सकते हैं. रेलवे के भ्रष्ट तंत्र के खिलाफ मोर्चा खोलने पर जान गंवाने वाले एकाउंट ऑफिसर सुनील बलूनी के गुनहगारों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हो गई है. सीबीआई ने रेलवे के ठेकेदार समेत चार लोगों के खिलाफ दून स्थित सीबीआई की लोअर कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी है. इसमें चारों को बलूनी की खुदकुशी के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है. बलूनी ने दो दिसंबर 2014 को लिंक एक्सप्रेस के नीचे आकर जान दे दी थी. सीबीआई ने बलूनी के खिलाफ रेलवे विजिलेंस की कार्रवाई को भी कटघरे में खड़ा किया है. विश्वस्त सूत्रों ने बताया कि चार्जशीट में जांच करने वालों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की सिफारिश की गई है.

रेलवे रैकेट से जुड़ा था मामला

प्रेमनगर के पंडितवाड़ी निवासी 42 वर्षीय सुनील कुमार बलूनी रेलवे में बतौर एकाउंट ऑफिसर देहरादून में तैनात थे. दो दिसंबर 2014 को हरिद्वार बाईपास पुलिस चौकी के पास लिंक एक्सप्रेस के नीचे आकर सुनील ने आत्महत्या कर ली थी. आत्महत्या से दो हफ्ते पहले सुनील को रेलवे विजिलेंस ने छह हजार रुपये घूस लेने के आरोप में पकड़ा था. तब से वे निलंबित चल रहे थे. पुलिस को सुनील की जेब से तीन पेज का सुसाइड नोट मिला था. सुसाइड नोट में बलूनी ने अपनी मौत के लिए रेलवे में सक्रिय एक सहगल नाम के दलाल समेत रेलवे ऑफिसर सत्येंद्र और हेमंत वासुदेव को जिम्मेदार ठहराया था.

चार्जशीट में बड़े सवाल

सूत्रों के मुताबिक सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में नवंबर 2014 में सुनील बलूनी को ट्रैप करने में शामिल रेलवे विजिलेंस के अधिकारियों की भूमिका को भी कटघरे में खड़ा किया है. सीबीआई ने अपनी जांच में यह माना है कि रेलवे विजिलेंस के अधिकारियों ने कुछ दलालों के प्रभाव में आकर बलूनी को रिश्वत के फर्जी मामले में ट्रैप किया था. सीबीआई ने चार्जशीट में ये सवाल उठाए हैं कि जब बलूनी को ट्रैप किया गया, तो आधुनिक और वैज्ञानिक विधि क्यों नहीं अपनाई गई. इसके अलावा ट्रैप करते वक्त स्थानीय गवाहों को क्यों नहीं शामिल किया गया. ट्रैप करने के दौरान बलूनी के फिंगर प्रिंट क्यों नहीं लिए गए. सीबीआई ने बलूनी के सुसाइड नोट को भी बड़ा आधार माना है.

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..तो दलालों ने फंसाया था?

रेलवे आफिसर सुनील बलूनी ने देहरादून से आने जाने वाले सभी रेलवे पार्सल और माल पर दलालों द्वारा किए जाने वाले गोलमाल पर नकेल कस दी थी. यही कारण था कि कुछ रेलवे ऑफिसर और रेलवे ट्रांसपोर्ट से जुड़े ठेकेदार उनके दुश्मन बन गए थे. सुनील ने अक्टूबर 2014 कई बार रेलवे की मालगाड़ी से ले जाए जाने वाले माल में गड़बडि़यों को उजागर किया था.