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DEHRADUN:
जिला चिकित्सालय में एक गर्भवती महिला की प्रसव के दौरान बच्चे समेत मौत हो गई. परिजनों का आरोप है कि डॉक्टरों की लापरवाही से ही जच्चा-बच्चे की मौत हुई है. आक्रोशित परिजनों और नगर के लोगों ने बुधवार को जिला चिकित्सालय में हंगामा किया.

परिजनों ने अस्पताल में किया हंगामा

कांडा सिमतोली की 30 वर्षीय आशा देवी पत्नी सुभाष चंद्र को परिजनों ने मंगलवार सुबह नौ बजे प्रसव पीड़ा के चलते जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया. डॉक्टरों की देखरेख में वह लगभग 13 घंटे तक रही. इस बीच डॉक्टर परिजनों को बताते रहे कि महिला का सामान्य प्रसव हो जाएगा. मंगलवार रात नौ बजे महिला की तबियत बिगड़ने लगी. रात 11 बजे स्थिति नियंत्रण से बाहर होने पर जिला अस्पताल के स्टाफ ने परिजनों को महिला को हायर सेंटर ले जाने के लिए कहा. परिजनों के अनुसार बच्चे का सिर बाहर आ चुका था, ऐसी स्थिति में ही उसे रेफर कर दिया गया. परिजन जैसे-तैसे महिला को श्रीनगर बेस चिकित्सालय लाए, लेकिन इससे पहले ही रास्ते में महिला की मौत हो चुकी थी. परिजन महिला के शव को बुधवार सुबह रुद्रप्रयाग जिला चिकित्सालय लेकर आए, उसका पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम कराया गया. मृतक गर्भवती महिला रुद्रप्रयाग में किराये पर रहती थी और उसकी सात वर्ष की एक लड़की भी है. महिला की मौत पर परिजन व नगर के लोगों ने जिला चिकित्सालय में हंगामा किया और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की. इस बीच पुलिस क्षेत्राधिकारी श्रीधर बुडोला के नेतृत्व में पुलिस फोर्स भी बड़ी संख्या में जिला चिकित्सालय पहुंचे. मृतक महिला के देवर मनोज थपलियाल ने बताया कि मंगलवार को भर्ती कराते समय डॉक्टरों ने सामान्य प्रसव की बात कही और रात्रि नौ बजे तक सामान्य प्रसव होने की बात कहते रहे, लेकिन इसके बाद अचानक उन्होंने तबीयत बिगड़ने की बात कही. उन्होंने आरोप लगाया कि डॉक्टरों ने प्रसव के दौरान घोर लापरवाही बरती, बच्चे को गलत तरीके से बाहर निकालने का प्रयास किया गया, इससे बच्चेदानी फट गई. श्रीनगर के डॉक्टरो ने स्पष्ट किया कि इसी कारण मौत हुई है. जब बच्चे का सिर बाहर निकल गया था, इस स्थिति में उसे रेफर किया गया जबकि यह नहीं किया जाना चाहिए था. अपर जिलाधिकारी श्री गुणवंत ने कहा कि मजिस्ट्रेटी जांच कराई जाएगी, इसमे जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.

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