PATNA: पटना हाईकोर्ट ने अनुकंपा के आधार पर होने वाली नियुक्तियों का दायरा और बढ़ा दिया है। एक महत्वपूर्ण फैसले से अदालत ने यह तय किया कि किसी सरकारी कर्मी की दूसरी शादी (पहली पत्नी के रहते हुए) हो जाती है तो उससे उत्पन्न संतान की भी अनुकंपा पर नियुक्तिहो सकती है। पटना हाईकोर्ट की तीन सदस्यीय खंडपीठ ने यह शर्त रखी है कि अवैध दूसरी शादी करने के लिए उक्तव्यक्तिको विभागीय कार्रवाई के तहत दंडित नहीं किया गया हो।

इस मामले में आया फैसला

न्यायाधीश अश्वनी कुमार सिंह, न्यायाधीश बिरेन्द्र कुमार एवं न्यायाधीश अनिल कुमार उपाध्याय की पूर्ण पीठ ने बिहार सरकार की तरफ से दायर उस अपील को निष्पादित कर दिया जिसमें कार्मिक विभाग से निर्गत 23 जून 2005 के परिपत्र में कानूनी त्रुटि पायी गयी थी। जिसके तहत अवैध रूप से दूसरी शादी करने वाले सरकारी कर्मी की दूसरी पत्‍‌नी के बच्चे की अनुकंपा बहाली पर रोक लगायी गयी थी।

तो नियुक्ति कैसे अवैध

पूर्ण पीठ ने केंद्र सरकार बनाम बीआर त्रिपाठी के मामले का उदाहरण देते हुए फैसला सुनाया। एससी ने उसमें तय किया है कि हिन्दू विवाह अधिनियम के तहत दो विवाह अवैध होने पर भी दूसरी शादी से पैदा संतान वैध है। खंडपीठ ने कहा कि जब दूसरी पत्‍‌नी से पैदा संतान वैध है तो अनुकंपा पर नियुक्ति कैसे अवैध हो सकती है। दूसरी पत्‍‌नी से पैदा संतान से भेदभाव संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन होगा।