क्त्रन्हृष्ट॥ढ्ढ: राज्य में बाल हित का काम करनेवाले बाल अधिकार कार्यकर्ता वैद्यनाथ कुमार पर महिला व बाल विकास की कैबिनेट मंत्री मेनका गांधी ने नेशनल कमिशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स(एनसीपीसीआर) की अध्यक्ष स्तुति कक्कड़ को कानूनी कार्रवाई करने का आदेश दिया है. कहा है कि जब एक व्यक्ति पर नाबालिग से शादी रचाने का आरोप है तो उसे किस प्रकार से सीडब्ल्यूसी मेंबर बनाया गया. इसके पूर्व वैद्यनाथ कुमार पर खूंटी थाने में ऑनलाइन प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए आवेदन दिया गया था. इस आवेदन पर खूंटी पुलिस कार्रवाई कर रही है.

एनसीपीसीआर ने दिया था निर्देश

इस संबंध में लोहरदगा के बाल अधिकार कार्यकर्ता विनय कुमार ने एनसीपीसीआर नई दिल्ली को एक पत्र दिया था. पत्र में कहा गया था कि कोई व्यक्ति जो खुद मानव तस्करी रोकता है, बाल विवाह को रुकवाने का काम करता है, वह खुद नाबालिग से शादी कर जेजे एक्ट का उल्लंघन किया है. ऐसे में बाल संरक्षण आयोग अधिनियम 13(1)(जे) प्रकरण के तहत बाल अधिकार का उल्लंघन की श्रेणी में आता है. जानकारी के मुताबिक, वर्तमान में वह व्यक्ति बाल न्यायालय का सर्वोपरि बना हुआ है. जबकि उस व्यक्ति के बारे में नाबालिग से विवाह रचाने का खुलासा होने के बाद एनसीपीसीआर ने रांची के तत्कालीन डीसी को जांच करने का निर्देश दिया था. निर्देश के आलोक में उपायुक्त ने बाल संरक्षण इकाई को जांच करने का जिम्मा सौंपा था.

क्या है पूरा मामला

जब बाल अधिकार कार्यकर्ता ने बाल संरक्षण इकाई की अध्यक्ष व सीडब्ल्यूसी की एक मेंबर पर चाइल्ड राइट्स हनन का आरोप लगाया तो इकाई ने मामले की जांच की. इसमें पाया गया कि इस बाल अधिकार कार्यकर्ता ने 2016 में बिहार में एक नाबालिग से शादी रचाई थी. जब बाल संरक्षण इकाई ने उक्त व्यक्ति से लड़की का ओरिजिनल सर्टिफिकेट मांगा तो उसने मुखिया से लड़की का फर्जी प्रमाणपत्र बनवाकर उसे बालिग बना दिया. उसकी उम्र 23 वर्ष कर दी. जबकि बिहार विद्यालय परीक्षा निगरानी समिति की रिपोर्ट में उसकी जन्मतिथि 10 फरवरी, 1999 है. जबकि बाल अधिकार कार्यकर्ता ने मैट्रिक प्रमाण पत्र में छेड़छाड़ करते हुए 10 फरवरी, 1992 दर्शा दिया और बाल संरक्षण इकाई के सुपुर्द कर दिया.