जेल में निरुद्ध मां को बच्चों का भविष्य संवरता दिखा

सामाजिक संस्थाओं द्वारा ड्रेस और किताब कॉपियों की व्यवस्था

आगरा. जिला जेल में विभिन्न अपराधों में निरुद्ध चल रही महिला बंदियों में कुछ ऐसी भी हैं जिनके बच्चे हैं. ये महिला बंदी अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंताग्रस्त हैं. जेल की चारदीवारी उनके भविष्य का रास्ता रोक कर खड़ी है. जेल अधीक्षक ने जब इस बात को जाना तो बच्चों को शिक्षा दिलाने का फैसला लिया. सामाजिक संस्थाओं के माध्यम से बच्चों को पढ़ने के लिए स्कूल भेजा गया है.

20 महिला बंदी बच्चों के साथ

जेल में विभिन्न आरोपों में निरूद्ध महिला बंदियों की संख्या वर्तमान में 118 महिला है. जिसमें 20 महिला बंदी अपने बच्चों के साथ निरूद्ध है. जिनमें से यह महिला बंदी अपने बच्चों के भविष्य को लेकर परेशान थीं. चार से छह साल की उम्र बच्चों को स्कूल भेजना चाहती थीं. इससे की बच्चे पढ़ लिखकर एक बेहतर और सफल इंसान बन सकें.

कहीं बच्चों का जीवन न हो बर्बाद

बड़े होकर वह उनकी तरह ऐसी कोई गलती ना करे जिससे कि उनका जीवन प्रभावित हो. महिला बंदियो की चिंता देख जिला जेल अधीक्षक शशिकात मिश्रा ने बच्चों को अच्छे स्कूल में पढ़ाने का फैसला किया. इसके लिए अपनी ओर से कोशिशें शुरू कर दी. विभागीय प्रकिया के साथ ही होली पब्लिक स्कूल प्रबंधन से बातचीत की. स्कूल बच्चों को प्रवेश देने के लिए राजी हो गया.

सामाजिक संस्था से की बात

इसके बाद जेल अधीक्षक ने कुछ सामाजिक संस्थाओं से बातचीत की उन्होंने बच्चों को ड्रेस अन्य सामान उपलब्ध करा दिया. शनिवार को इन बच्चों को जब स्कूल भेजा गया तो बंदी भी उन्हें छोड़ने आए. शशिकात मिश्रा ने बताया कि समाजसेवी वियज बंसल द्वारा बच्चों की कापी किताब और स्कूल ड्रेस की व्यवस्था की गई है.

प्रदेश की पहली जेल बनी आगरा

यहां जिला जेल में निरूद्ध महिला बंदियों के बच्चों को स्कूल भेजने वाली आगरा जिला जेल प्रदेश की पहली जेल बन गई है. इससे पहले महिला बंदियों केबच्चों को जेल में ही टीचर पढ़ाने आते थे.

अन्य महिला बंदियो को भी बंधी उम्मीद

जेल में निरूद्ध अन्य 16 महिला बंदियों को अपने बच्चों के बेहतर भविष्य की उम्मीद बंध गई हैं. ये महिला बंदी भी अपने बच्चों के साथ में जेल में विभिन्न अपराध में बंद हैं.