- सिनकाईशियल वायरस डाल रहा बड़ों के रेस्पेरेटरी सिस्टम पर प्रभाव

- सर्दी, जुखाम, हाईग्रेड फीवर के बाद होती है खांसी और चेस्ट प्रॉब्लम

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KANPUR: बारिश का सीजन खत्म होने को है, लेकिन नमी की वजह से बीमारियों ने सिर उठाना शुरू कर दिया है. वायरस और बैक्टीरिया की वजह से फीवर, डेंगू, मलेरिया के मामले तेजी से बढ़े हैं. वहीं हर साल की तरह इस बार भी वायरल इंफेक्शन में बदलाव आया है. आम तौर पर बच्चों पर प्रभाव डालने वाले सिनकाईशियल वायरस ने अब बड़ों पर प्रभाव डाला है. क्योंकि मौसम में नमी और प्रदूषण इसमें वायरस की मदद कर रहे हैं. जिसके चलते बुखार के साथ रेस्पेरेटरी सिस्टम पर भी असर पड़ रहा है. खुद डॉक्टर्स भी इसे लेकर परेशान हैं, क्योंकि इसके इलाज में कोई सेट लाइन ऑफ ट्रीटमेंट नहीं है.

पावरफुल वायरस बड़ों पर असरदार

आमतौर पर रेस्पेरेटरी सिनकाईशियल वायरस का असर बच्चों और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों पर होता है. जिसकी वजह से उन्हें सर्दी, जुखाम की प्रॉब्लम होती है. इसके बाद बच्चों को हाईग्रेड फीवर आता है. जिसके बाद सीने में जकड़न और तेज खांसी की शुरुआत होती है,लेकिन इस बार इसका असर काफी व्यापक है. यह युवाओं और महिलाओं को बीमार कर रहा है. वायरस के असर से बॉडी में पेन भी हो रही है.

इन पर सबसे ज्यादा प्रभाव

- बच्चों पर

- डायबिटीज के मरीजों पर

- कम खाना खाने वालों पर

- कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों पर

- प्रदूषित माहौल में ज्यादा रहने पर

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इनकी वजह से वायरस का असर ज्यादा-

- मौसम में नमी का ज्यादा असर वायरस के तेजी से फैलने में सबसे ज्यादा मददगार

- प्रदूषण की वजह से धूलकणों के साथ भी वायरस का ज्यादा असर

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वायरस के असर से यह प्रॉब्लम

फस्टर् स्टेज-

सर्दी, जुखाम आना 3 से 4 दिन तक

सेकेंड स्टेज- हाईग्रेड फीवर आना खांसी की शुरुआत

थर्ड स्टेज- चेस्ट में प्रॉब्लम सांस फूलना

ाइनल स्टेज- निमोनिया होना या फिर लंग्स और जरूरी आर्गन पर प्रभाव

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वर्जन-

यह वायरस तेजी से फैल रहा है. इसमें मरीजों के इलाज के लिए कोई तय लाइन ऑफ ट्रीटमेंट नहीं है. ऐसे में हर मरीज का उसके लक्षणों के हिसाब से अलग अलग तरह से इलाज करना पड़ता है.

- डॉ. विशाल गुप्ता, एसोसिएट प्रोफेसर,मेडिसिन विभाग

वायरल इंफेक्शन मौसम के साथ तेजी से फैल रहा है. अलग अलग वायरस व बैक्टीरिया के असर पर माइक्रोबायोलॉजी व पैथोलॉजी विभाग की तरफ से भी अपडेट मिल रही है. लगातार ओपीडी में पेशेंट्स बढ़े हैं.

- प्रो. रिचा गिरि, एचओडी व डायरेक्टर, मेडिसिन विभाग, जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज