क्त्रन्हृष्ट॥ढ्ढ : राज्य में बाल हित का काम करनेवाले बाल अधिकार कार्यकर्ता ने खुद ही एक नाबालिग से शादी रचा डाली थी. इस बात का खुलासा तब हुआ जब बाल अधिकार कार्यकर्ता ने बाल संरक्षण ईकाई की अध्यक्ष व सीडब्ल्यूसी की एक मेंबर पर चाइल्ड राइट्स हनन का आरोप लगाया. बाल संरक्षण ईकाई ने जब मामले की जांच की पता चला कि बाल अधिकार कार्यकर्ता ने 2016 में बिहार में एक नाबालिग से शादी रचा ली थी. वर्तमान में वह खूंटी सीडब्ल्यूसी का मेंबर है.

बना डाला फर्जी सर्टिफिकेट

बाल संरक्षण ईकाई ने जब बाल अधिकार कार्यकर्ता से उसकी पत्नी का का ओरिजिनल सर्टिफिकेट मांगा तो उसने मुखिया से लड़की का फर्जी प्रमाण पत्र बनवाकर उसे बालिग बना डाला. इसमें उसकी उम्र 23 वर्ष थी, जबकि बिहार विद्यालय परीक्षा निगरानी समिति की की रिपोर्ट में उसकी जन्म तिथि 10 फरवरी, 1999 है. जबकि बाल अधिकार कार्यकर्ता ने मैट्रिक प्रमाण पत्र में छेड़छाड़ करते हुए 10 फरवरी, 1992 कर दिया.

एनसीपीसीआर ने दिया था जांच का निर्देश

लोहरदगा के बाल अधिकार कार्यकर्ता विनय कुमार ने इस मामले में एनसीपीसीआर नई दिल्ली को एक पत्र भेजा था. इसमें कहा गया था कि जिसपर बाल विवाह को रोकने की जिम्मेदारी है, वही अगर नाबालिग से शादी कर ले तो यह जेजे एक्ट का उल्लंघन किया है. ऐसे में एनसीपीसीआर ने रांची के तत्कालीन डीसी को जांच करने का निर्देश दिया था. निर्देश के आलोक में डीसी ने बाल संरक्षण इकाई को जांच करने का जिम्मा सौंपा था.

14 माह तक दबा रहा मामला

बाल अधिकार कार्यकर्ता द्वारा नाबालिग से शादी किए जाने का मामला 14 माह तक बाल संरक्षण ईकाई में दबा रहा. जब जिला बाल संरक्षण इकाई के मेंबर पर चाइल्ड राइटस हनन का आरोप लगा तो उन्होंने बाल कार्यकर्ताओं पर कानूनी कार्रवाई की मांग की. ऐसे में बाल संरक्षण इकाई ने इस साल 11 जनवरी को बिहार विद्यालय परीक्षा समिति को पत्र लिखकर संबंधित दस्तावेज मंगा लिए. हालांकि, फिर उसने दबाव बनाकर मामले को दबा दिया, लेकिन लीगल कम प्रोवेशन ऑफिसर(डीसीपीयू) दुर्गा शंकर ने सीडब्ल्यूसी रांची को जांच रिपोर्ट दी. जांच रिपोर्ट में नाबालिग लड़की के नाबालिग होने को प्रमाणित किया गया है.