- मानकों के मुताबिक जेल में होने चाहिए पांच वॉच टावर मगर जिला जेल में एक भी नहीं बना

- 2016 के जेल बवाल में तोड़े गए कैमरों की भी नहीं हो सकी मरम्मत

जेल या बंदी सुधार गृह, एक ऐसी जगह है जहां रास्ता भटक कर अपराध की राह पर चल निकले लोगों को सुधारने की कोशिश की जाती है. इसका एक सबसे जरूरी तरीका है कि यहां बंद लोगों की 24 घंटे निगरानी होती है और बाहरी दुनिया से मिलने-जुलने, सुविधाओं के उपभोग पर भी पहरा होता है. मगर वाराणसी जिला जेल का हाल कुछ और ही है, यहां निगरानी के लिए जरूरी संसाधन ही नहीं है. कहने को जेल है मगर भीतर अलग ही कहानी चल रही है.

मुख्यालय नहीं दिखा रहा रुचि

मानकों के मुताबिक, जेल में निगरानी के लिए पांच वॉच टावर होने चाहिए. चार जेल की चहारदीवारी के चार कोनों पर और एक जेल परिसर के बीच में. वॉच टावर की ऊंचाई कम से कम 50 फीट होनी चाहिए ताकि इससे चारों तरफ नजर रखी जा सके और रात की निगरानी के लिए इसपर ड्रैगन लाइट भी लगी होनी चाहिए. प्रदेश की संवेदनशील जेलों में एक वाराणसी जिला जेल में एक भी वॉच टावर नहीं हैं. जेलर बताते हैं कि इसके लिए कई बार जेल मुख्यालय को पत्र लिखा जा चुका है मगर अब तक कोई पहल नहीं हो सकी है. नतीजतन, घनी आबादी के बीच बनी जेल में अक्सर बाहर से मोबाइल या रुपये फेंकने के मामले सामने आते हैं.

दो साल बाद भी नहीं बने कैमरे

2 अप्रैल-2016 को वाराणसी जिला जेल में बंदियों ने बवाल काटा था. जेल को कब्जे में लेकर जेल अधीक्षक को सात घंटे तक बंधक बनाया गया. साक्ष्य मिटाने के लिए बंदियों ने पहले ही सर्किल और जेल के भीतरी परिसर में लगे हाई रिजॉल्यूशन कैमरे तोड़ दिए थे. तत्कालीन अफसरों ने कहा था कि कैमरे महीने भर में दोबारा बन जाएंगे मगर दो साल बीतने के बाद भी पुराने कैमरों की मरम्मत और नए लगाने का काम नहीं हो सका. लिहाजा जेल के भीतरी परिसर में निगरानी नहीं के बराबर है.

जैमर भी नाम का

लंबे प्रयास के बाद 2016 में ही जेल में जैमर लगाया गया. यह बुल्गारिया से मंगाया गया था. मगर लगने के बाद पता चला कि जैमर 2जी से ऊपर की बैंड-विड्थ के लिए कारगर नहीं है. इसकी क्षमता सुधार के लिए भी मुख्यालय को प्रस्ताव भेजा गया है. हाल यह है कि जेल में बंदी धड़ल्ले से मोबाइल का इस्तेमाल कर रहे हैं. आए दिन बंदियों के पास से मोबाइल पकड़े जा रहे हैं. फोर्स और निगरानी के संसाधनों की कमी के कारण जेल अफसर भी लाचार हैं.

वाराणसी जिला जेल : एक नजर

- 1,834 बंदी हैं वाराणसी जिला जेल में

- 7,47 है जिला जेल की क्षमता

- 4 एकड़ में फैली है जेल की चहारदीवारी

- 3 सर्किल और 13 बैरकें

- बैरकों और सर्किल की निगरानी के लिए नहीं है कोई व्यवस्था

बयान

जेल के भीतर-बाहर निगरानी के लिए वॉच टावर जरूरी हैं. इसके लिए मुख्यालय को कई बार पत्र लिखे जा चुके हैं. पुराने कैमरों की मरम्मत भी नहीं हो सकी है. फिलहाल गेट के पास लगे कैमरे से ही काम चल रहा है.

पवन त्रिवेदी, जेलर, जिला जेल वाराणसी