-आईआईटी ने प्रोजेक्ट किया तैयार, अगर सफल रहा तो कानपुर के नालों में बहेगा ट्रीटेड वाटर

-गंगा में गिर रहे नालों पर ही अब बनाए जाएंगे एसटीपी, फ‌र्स्ट फेज में एक नाला बनेगा मॉडल

-अर्बन रिवर मैनेजमेंट प्लान के तहत गंगा व पांडु नदी को साफ करने की नए सिरे से कोशिश

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KANPUR : आप इमेजिन करिए कि शहर में बहने वाले नालों में गंदा बदबूदार पानी बहने के बजाय साफ-सुथरा ट्रीटेड वाटर बह रहा है। पढ़ने और सुनने में आपको ये एक सपना लग रहा होगा। तो आप सही हैं, क्योंकि ये सपना आईआईटी कानपुर ने देखा है और सबकुछ प्लान के मुताबिक रहा तो ये सपना सच हो जाएगा। आईआईटी के इस सपने के सच होते ही गंगा किनारे बसे शहरों के लिए यह एक नजीर साबित होगा। हालांकि इसमें कितना टाइम लगेगा अभी तय नहीं है। लेकिन कसरत शुरू हो चुकी है। अर्बन रिवर मैनेजमेंट प्लान के तहत नगर निगम में आईआईटी, नगर निगम, केडीए, नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ अर्बन अफेयर्स, फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के साथ इस प्रोजेक्ट पर ज्वॉइंट मीटिंग हुई। तय हुआ कि गंगा किनारे बह रहे छोटे-बड़े 32 नालों में से किसी एक नाले को इस मॉडल के लिए चुनकर इसमें कार्य किया जाएगा। पांडु नदी को भी इस योजना के तहत निर्मल किया जाएगा।

इस प्रकार होगा कार्य

आईआईटी प्रोफेसर विनोद तारे के मुताबिक नालों में साफ पानी बहाने की परिकल्पना को साकार करने के लिए आईआईटी बहने वाले सीवेज को पाइप लाइन के अंदर से बहाएगा। जबकि सीवेज को ट्रीट करके उसी नाले में साफ पानी छोड़ दिया जाएगा। अंत में इस पानी को जमीन के अंदर छोड़ दिया जाएगा। इसके लिए नालों पर छोटे-छोटे एसटीपी बनाए जाएंगे। नालों को अब सुखाने की बजाय उसमें लगातार सीवेज बहता रहे, इसके लिए हाउस होल्ड कनेक्शन बड़े पैमाने पर किए जाने आवश्यक हैं। यह कार्य पूरा होने के साथ ही नालों के किनारे ग्रीनरी और पाथवे भी बनाया जाएगा। जिससे लोग इनके किनारों पर टहल सकें।

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1 महीने में तय होगा

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ अर्बन अफेयर्स के अधिकारी विक्टर शिंदे के मुताबिक 1 महीने में सभी डिपार्टमेंट के साथ मिलकर कार्य शुरू कर दिया जाएगा। किस नाले को मॉडल के लिए सेलेक्ट करना है, पहले यह तय होगा। इसके बाद डीपीआर तैयार कर फंड आते ही कार्य शुरू किया जाएगा।

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सर्वे होगा शुरू

शहर में विभागों के साथ-साथ ग्राउंड लेवल पर सर्वे किया जाएगा। डाटा कलेक्ट कर उसकी एनालिसिस आईआईटी के एक्सप‌र्ट्स की देखरेख में की जाएगी। नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा की असिस्टेंट इन्वॉयरमेंट प्लानर शिवानी सक्सेना के मुताबिक नालों के आसपास ग्रीनरी को डेवलप किया जाएगा। नालों में साफ पानी के बाद लोग उसे गंदा न करें, इसके लिए पाथवे भी बनाए जाएंगे।

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शहर के प्रमुख बड़े नाले

-रफाका नाला

-सीसामऊ नाला

-सीओडी नाला

-म्योर मिल नाला

-टैफ्को नाला

-सरसैयाघाट नाला

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36 बस्तियां कर रहीं गंगा को मैला

गंगा बैराज से लेकर सिद्धनाथ घाट तक 12 किमी। के एरिया में गंगा किनारे 3 दर्जन से अधिक बस्तियां हैं। इन सभी का सीवेज सीधे गंगा में जाता है। अब तो लोगों ने घरों के सीवेज पाइप गंगा में ही खोल दिए हैं, जो गंभीर समस्या है।

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गंगा किनारे बनेगा पाथवे

गंगा बैराज से बिठूर तक गंगा किनारे 15 किमी। पाथवे डेवलप किया जाएगा। ग्रीनरी भी डेवलप की जाएगी। इसके माध्यम से गंगा किनारे घाटों पर मौजूद गंदगी भी खत्म होगी। लोगों को गंगा की निर्मलता के प्रति प्रेरित करने के लिए समय-समय पर मैराथन और दौड़ का भी आयोजन किया जाएगा।

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गंगा में जा रहा सीवेज

गंगा में रोजाना चोर नालों के माध्यम से रोजाना 2 करोड़ लीटर से ज्यादा सीवेज गिर रहा है। घाटों किनारे बड़ी मात्रा में छोटे-छोटे नालों की धाराएं गंगा में मिल रही हैं। परमट, भैरोघाट, रानीघाट, सिद्धनाथ घाट, भगवतदास घाट, सरसैया घाट, बाबा घाट, कोयला घाट समेत अन्य स्थानों से सीवेज गंगा में जा रहा है।

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नमामि गंग के तहत अर्बन रिवर मैनेजमेंट प्लान की अगुवाई करने के लिए कानुपर को पायलट सिटी चुना गया है। विभागों के साथ यह पहली बैठक थी। 1 महीने में सर्वे का कार्य शुरू कर दिया जाएगा।

-संतोष कुमार शर्मा, नगर आयुक्त।

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नालों को साफ पानी की नदियों में बदलने के लिए यह एक शुरुआत है। भविष्य में यकीनन इसके अच्छे रिजल्ट मिलेंगे। फिलहाल योजना पर कार्य शुरू है। 1 नाले को मॉडल बनाकर कार्य आगे बढ़ाएंगे।

-विनोद तारे, प्रोफेसर, आईआईटी कानपुर।