क्त्रन्हृष्ट॥ढ्ढ : शुक्रवार को 3, कांके रोड स्थित सीएम हाउस लगभग दो सालों के बाद गुलजार दिखा. इसे फूलों से सजाया-संवारा गया था. दिनभर अतिथियों का आना-जाना लगा रहा. हो भी क्यों न. आखिर सभी मिथकों को दरकिनार करते हुए मुख्यमंत्री रघुवर दास आधिकारिक सीएम आवास में शिफ्ट कर रहे थे. इससे पहले यहां पूरे विधि-विधान के पूजा-अर्चना हुई. मुख्यमंत्री के सीएम आवास में शिफ्ट करने से उन भ्रमों पर विराम लग गया कि वास्तु दोष की वजह से वे शायद यहां शिफ्ट नहीं करेंगे और धुर्वा स्थित अपने आवास में रहकर ही कामकाज करेंगे.

कैफोर्ड हाउस बना सीएम हाउस

कैफोर्ड आवास, जिसे अब सीएम हाउस के नाम से जाना जाता है के मुख्यमंत्री रघुवर दास 121 वें निवासी बन गए हैं. 1853 में बंगाल के लेफ्टिनेंट गर्वनर के प्रिंसिपल एजेंट कमिश्नर एलियन ने इस हाउस की नींव रखी थी. इसके बाद एलियन का ट्रांसफर हो गया कैफोर्ड ने पदभार संभाला. उनके पद संभालते ही भवन निर्माण में तेजी आई और महज एक ही साल में यह बनकर तैयार था. 1854 में ब्रिटिश हुकूमत ने कमिश्नरी सिस्टम इंप्लीमेंट कर दिया. कैफोर्ड छोटानागपुर के पहले कमिश्नर बनाए गए. इस तरह इस हाउस में रहने वाले वे पहले अधिकारी बन गए. इसी वजह से इस भवन का नाम कैफोर्ड हाउस रखा गया.

डाल्टन रहे सबसे ज्यादा दिन

छोटानागपुर के पहले कमिश्नर कैफोर्ड का भी तबादला एक साल में हो गया. 1855 में कैप्टन इलियट डाल्टन छोटानागपुर के कमिश्नर बने. डाल्टन के नाम कैफोर्ड हाउस में सबसे ज्यादा रहने का रिकॉर्ड है. वे इस हाउस में 1875 तक रहे. कमिश्नर फिलिप इस आवास में रहनेवाले अंतिम अंग्रेज अधिकारी थे. डाल्टन के अलावे इस आवास में कोई भी अधिकारी दो साल से अधिक नहीं रहा. 2000 में झारखंड के अलग राज्य बनने तक साउथ छोटानागपुर के कमिश्नर फूल सिंह यहां रहते थे. इसके बाद इस आवास को सीएम आवास का दर्जा दिया गया.

मेन गेट की बदली दिशा

वास्तु शास्त्र के हिसाब से सीएम हाउस में कई बदलाव किए गए हैं. यहां का मेन गेट पहले कांके रोड की ओर खुलता था, लेकिन इसे अब बदल दिया गया है. सीएम हाउस का मेन गेट अब रांची यूनिवर्सिटी के हॉस्टल की ओर कर दिया गया है. अब इसी गेट से सीएम आना-जाना करेंगे.

सीएम के टर्म पूरा नहीं करने का है मिथक

सीएम हाउस को लेकर मिथक यह है कि यहां रहनेवाले किसी भी मुख्यमंत्री ने अपना कार्यकाल पूरा नहीं किया. राज्य के पहले मुख्यमंत्री रहे बाबूलाल मरांडी से लेकर अर्जुन मुंडा के कार्यकाल का इस बाबत उदाहरण दिया जाता रहा है. हालांकि, जबतक हेमंत सोरेन मुख्यमंत्री के पद पर रहे, सीएम आवास से दूरी बनाए रखा. सीएम आवास में मधु कोड़ा और शिबू सोरेन भी बतौर मुख्यमंत्री रहने के लिए आए, लेकिन बीच में ही उनकी सरकार गिर गई. ऐसे में सीएम आवास को लेकर यह मिथक है कि यहां जो भी रहता है, अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाता है.

पहले भी हो चुके हैं कई बदलाव

सीएम हाउस में पहले भी कई बदलाव हो चुके हैं. जो भी बतौर मुख्यमंत्री यहां रहने आए, उन्होंने अपने हिसाब से वास्तु दोष को दूर करने के लिए कुछ न कुछ बदलाव किए. अर्जुन मुंडा जब हेलीकॉप्टर दुर्घटना में घायल हो गए थे, तो एस्ट्रोलॉजर्स ने उन्हें सलाह दी थी कि सीएम हाउस में हनुमान मंदिर बनाया जाए. इसके बाद यहां मंदिर बना. इसके अलावा पीछे से भी रास्ता खोला गया है और सीएम हाउस से सीएम सेक्रेटेरिएट के बीच के गेट को बंद कर दिया गया है.

सात एकड़ में है सीेएम हाउस

मुख्यमंत्री आवास करीब सात एकड़ जमीन में फैला है. यहां सीएम के रहने के लिए एक बिल्डिंग है. इसमें पांच बेडरूम हैं. फ‌र्स्ट फ्लोर में किचन, पूजा रुम और डाइनिंग रुम है. ग्राउंड फ्लोर में डाइनिंग हॉल है, जहां मेहमानों के बैठने की व्यवस्था है. कैंपस में लॉन भी है. इसके अलावा मेन गेट के पास एक ऑफिस और एक गेस्ट रुम भी बनाया गया है.