फायर ब्रिगेड करा रहा सर्वे, दुर्गाकुंड सहित अन्य इलाकों में किसी ने नहीं ली है एनओसी

पांच सौ से अधिक दो मंजिला बिल्डिंगों में चलाए जा रहे हैं कोचिंग इंस्टीट्यूट

VARANASI:

दुर्गाकुंड के कबीरनगर इलाके में सैकड़ो कोचिंग-इंस्टीट्यूट चल रहे हैं। दो, चार-पांच को छोड़ दिया जाए तो किसी के यहां आग से बचाव के संसाधन नहीं हैं। ग्राउंड फ्लोर पर ऑफिस और सेकेंड, थर्ड, फोर्थ फ्लोर पर क्लासेस चलाई जा रही हैं। बिना एनओसी के कुछ ऐसी भी बिल्डिंग हैं जिसमें नीचे कोचिंग और ऊपर हास्टल भी संचालित हो रहे हैं। इसके अलावा ब्रह्मानंद कालोनी, साकेतनगर, रोहितनगर में भी यही हाल है। दुर्गाकुंड का कबीनगर एरिया तो कोचिंग की मंडी है।

इमरजेंसी रास्ते भी नहीं

दुर्गाकुंड एरिया के धर्मसंघ के पास एक नामी कोचिंग में कम से कम दो हजार से अधिक स्टूडेंटस हैं। एक क्लास में कम से कम 80 स्टूडेंट्स बैठते हैं। बेसमेंट से लेकर फोर्थ फ्लोर तक क्लासेज संचालित हो रही हैं। यहां पूरी बिल्डिंग में कहीं भी फायर सेफ्टी के इंतजाम नहीं हैं। यही नहीं, इमरजेंसी में बाहर निकलने के रास्ते भी नहीं बनाए गए हैं। चार फुट की गैलरी से बच्चों का आना-जाना होता है।

ईश्वर भरोसे आग से लड़ाई

यह तो महज एक एरिया का हाल है, शहर के विभिन्न हिस्सों में कोचिंग-इंस्टीट्यूट बिना मानक के चल रहे हैं। चाहे वे फाउंडेशन कोर्स चलाने वाले हों या फिर प्रतियोगी परीक्षा की तैयारियां कराने वाले कोचिंग-इंस्टीट्यूट हो, सभी में मानक का मखौल उड़ाया जा रहा है। अब फायर सर्विस ने सर्वे की प्रक्रिया शुरू की है।

पैरेंट्स ने पूछा, क्या है इंतजाम?

सूरत की कोचिंग अग्निकांड में खाक हुई 20 मासूमों की जिंदगियों के बाद बनारस में भी हर कोई दहल गया है। अभिभावकों से लेकर बच्चों तक को अब कोचिंग में अग्निशमन यंत्र की सुध आई है। कितने बच्चों ने तो कोचिंग में पहुंचते ही एडमिनिस्ट्रेशन से फायर सेफ्टी को लेकर सवाल भी दागे। कई अभिभावक भी शनिवार को बच्चों को कोचिंग छोड़ने आए तो संचालकों से आग से बचाव के इंतजाम भी पूछे। गोलमोल जवाब देकर कोचिंग संचालक पीछा छुड़ाकर भाग खड़े हुए।

कबीरनगर एरिया है डेंजर

सूरत की घटना के बाद से चीफ फायर आफिसर के निर्देश पर भेलूपुर फायर स्टेशन ऑफिसर ने सर्वे शुरू कराया है। चेतगंज फायर स्टेशन ऑफिसर को भी सर्वे के लिए निर्देशित किया गया है। शहर में कितने कोचिंग-इंस्टीट्यूट चल रहे हैं और कितनों ने एनओसी ले रखी है, इसका डाटा फायर ऑफिसर के पास उपलब्ध नहीं है। यही कारण है कि घटना के बाद से सीएफओ ने सर्वे कराना शुरू कर दिया है। जिन बिल्डिंग में कोचिंग-इंस्टीट्यूट संचालित पाए गए और एनओसी नहीं मिली तो नोटिस देने के साथ ही नियमानुसार कार्रवाई भी की जाएगी। जांच पड़ताल में सामने आया है कि दुर्गाकुंड के कबीरनगर एरिया के दर्जनों कोचिंग में आग से बचाव के इंतजाम शून्य हैं।

घर-घर हास्टल, कोचिंग

इंजीनियर, मेडिकल सहित अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाली कोचिंग-इंस्टीट्यूट का दुर्गाकुंड में भरमार है। गुरुधाम, दुर्गाकुंड, कबीरनगर, ब्रह्मानंद कालोनी, साकेतनगर आदि इलाकों में घर-घर कोचिंग-हास्टल संचालित हो रहे हैं। एक बिल्डिंग में 50 से अधिक बच्चों को रखा जाता है। मेस आदि सभी व्यवस्थाएं हैं, लेकिन आग से बचाव के इंतजाम नहीं हैं।

जितने कोचिंग-इंस्टीट्यूट संचालित हो रहे हैं, सबका सर्वे कराया जा रहा है। पहले दिन दुर्गाकुंड, कबीरनगर एरिया में सर्वे हुआ। जांच पड़ताल में कई बिल्डिंग में कोचिंग मानक पर खरी नहीं उतरी है। बिल्डिंग संचालक सहित कोचिंग संचालक को भी नोटिस देकर कार्रवाई की जाएगी।

अनिमेष सिंह, सीएफओ

यहां घर-घर कोचिंग-हास्टल संचालित हो रहे हैं। किसी की जांच पड़ताल नहीं होती है। 50 बच्चों के बैच में 150 से 200 तक बच्चों को पढ़ाया जा रहा है।

कुलदीप पांडेय, कबीरनगर

नीचे ऑफिस और ऊपर कोचिंग क्लास चलती है। एक कोचिंग में एक बार में 250 बच्चों की क्लास चलती है। सभी तीसरी, चौथी मंजिल पर क्लासेज हैं। किसी के पास फायर सेफ्टी नहीं है।

मनीष चौबे, ब्रह्मानंद कालोनी

50 से अधिक छात्र संख्या होने पर फायर सर्विस से अनापत्ति प्रमाणपत्र जरूरी होता है। अनापत्ति प्रमाणपत्र के बिना कोचिंग की मान्यता नहीं दी जाती है। अग्निकांड को देखते हुए सभी कोचिंग को फायर सर्विस से अनापत्ति प्रमाणपत्र का नवीनीकरण कराने को कहा गया है।

ज्ञान प्रकाश वर्मा, क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी