- शस्त्र लाइसेंस विभाग से लेकर थाने तक शुरू हो गया है रिश्वतखोरी का खेल

GORAKHPUR: पिस्टल और बंदूक रखने के शौकिन लंबे समय से बंद चल रही शस्त्र लाइसेंस प्रकिया के दोबारा शुरू होने के बाद अब इस मौके को खोना नहीं चाह रहे हैं. लोग अपनी पंसद के शस्त्र का आवेदन कर उसे पाने के जुगाड़ में भी लग गए हैं. पिस्टल, रिवॉल्वर सहित अन्य शस्त्रों के लाइसेंस के लिए लोग एड़ी-चोटी एक कर दे रहे हैं. इसके लिए कोई थाने पर रिश्वत दे रहा है तो कोई शस्त्र विभाग में रिश्वत लेकर शस्त्र लाइसेंस बनवाने का दावा कर रहा है. बीते दिनों शस्त्र विभाग के कंप्यूटर ऑपरेटर द्वारा रिश्वत लेकर शस्त्र लाइसेंस बनवाने का एक मामला भी सामने आया जिसमें सिटी मजिस्ट्रेट द्वारा कार्रवाई की गई है. जिसके बाद लाइसेंस बनवाने के बड़े-बड़े दावे करने वाले बाबूओं को जिला प्रशासन ने अपने राडार पर ले लिया है. जिला प्रशासन की मानें तो बहुत जल्द ही इस खेल के मेन सरगना के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की जाएगी.

दिसंबर से शुरू हुआ आवेदन

बता दें, शस्त्र लाइसेंस आवेदन की प्रक्रिया पिछले साल 2018 दिसंबर से शुरू हो चुकी है. कुल चार हजार आवेदन फॉर्म बेचे जा चुके हैं. शस्त्र विभाग इन फॉर्म से जहां 28 लाख रुपए तक की कमाई कर चुका है, वहीं आवेदन फॉर्म की डॉक्युमेंट्स प्रक्रिया को पूरा कराने में थाने की रिपोर्ट से लगाए मेडिकल रिपोर्ट तक बनवाने में रिश्वतखोरी की शिकायतें भी आम हो रही हैं. शस्त्र लाइसेंस विभाग के कंप्यूटर ऑपरेटर के खिलाफ हुए कार्रवाई ने भी यह प्रमाणित कर दिया है कि शस्त्र विभाग से लगाए थाने तक रिश्वतखोरी का खेल शुरू हो चुका है. जिला प्रशासन की मानें तो इस खेल में कंप्यूटर ऑपरेटर तो छोटा प्यादा है. कुछ बड़े खिलाड़ी भी हैं जिनपर आला अधिकारियों की टेढ़ी नजर है. जिला प्रशासन के बड़े अधिकारी ने बताया कि शस्त्र विभाग में कंप्यूटर ऑपरेटर पर लगे आरोप के बाद से उसे हटा दिया गया था, लेकिन इसके बाद शस्त्र विभाग के और बाबूओं का नाम भी सामने आया है. इन बाबूओं को ट्रेस करने के लिए टीम ने गोपनीय ढंग से काम करना शुरू कर दिया है.

आवेदक बन रखेंगे नजर

जिला प्रशासन के उच्च अधिकारी ने बताया कि शस्त्र विभाग में काम करने वाले सभी कर्मचारियों पर नजर रखी जा रही है. आवेदक के रूप में इन कर्मचारियों को ट्रेस करने की प्रक्रिया अपनाई गई है. जिला प्रशासन का कहना है कि अगर कहीं से कोई रिश्वत मांगता है तो उसकी विजुअल और ऑडियो रिकॉर्डिग के साथ डीएम दफ्तर में शिकायत दर्ज की जा सकती है. शिकायत की जांच के बाद संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. अगर थाने से रिश्वत का मामला हो या फिर शस्त्र लाइसेंस विभाग के कर्मचारियों द्वारा, किसी भी मामले में शिकायतकर्ता के पास से प्रूफ मिलने पर कार्रवाई तय है.

वर्जन

बीते दिनों शस्त्र विभाग के कंप्यूटर ऑपरेटर के खिलाफ शिकायत आई थी. उसके खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है. अगर कोई शिकायत करता है और उसके पास एविडेंस है तो तत्काल संबंधित बाबू के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.

- अजीत सिंह, सिटी मजिस्ट्रेट