PATNA : दैनिक जागरण आई नेक्स्ट रिपोर्टर राजधानी के कई पेट्रोल पंप पर आम आदमी बनकर गया और हर जगह उसे यही पता चला कि आम आदमी के प्रति पंप संचालकों का नजरिया बेहद खराब है. आम आदमी बनकर जब रिपोर्टर पूरी तरह से तंग हो गया तो वह सीधा विधिक माप विज्ञान कार्यालय पहुंच गया जहां संयुक्त नियंत्रक को शिकायत कर कार्रवाई की मांग की. शिकायत पत्र निरीक्षक पटना अतिरिक्त वन रविकांत संतोष को दिया. इंस्पेक्टर ने कहा कि यह मनमानी है. कार्रवाई होगी. लेकिन इसके पहले किस तरह से जूझना पड़ा वह भी जान लीजिए.

खतरे से खाली नहीं था पड़ताल

पेट्रोल पंप पर आम आदमी को अपने अधिकार की बात करना आसान नहीं है. कोई कंज्यूमर पंप पर गड़बड़ी के खिलाफ आवाज उठाएगा तो उसकी आवाज दबाने के लिए धमकी के साथ उसकी पिटाई भी हो सकती है. इसके लिए पंप पर हर तरह के लोगों की ड्यूटी पर लगाई जाती है. रिपोर्टर को भी ऐसी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा. बात जैसे ही आम आदमी के अधिकार की उठाई तो पंप संचालक दबाव बनाने लगे और स्थिति मारपीट की आ गई. रिपोर्टर कई ऐसे पेट्रोल पंप पर गया जहां संचालक मारपीट पर उतारू हो गए.

एक लीटर नापकर नहीं दूंगा जहां शिकायत करना हो करिए

दैनिक जागरण आई नेक्स्ट रिपोर्टर जब कुर्जी रोड पर स्थित पाटलिपुत्रा सर्विस स्टेशन पहुंचा तो यहां भी काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ा. आम आदमी को लेकर लोगों में क्या धारणा है यह साफ देखने को मिला. पंप संचालकों की नजर में आम आदमी मतलब कुछ भी नहीं और उसके अधिकारों को लेकर तो यहां कोई बात ही नहीं होती. इस पेट्रोल पंप पर न तो एक लीटर का मेजर कर तेल दिया गया और न ही कोई बात सुनी गई. रिपोर्टर को जब सेल्स मैन ने मना कर दिया तो वह मैनेजर के पास पहुंचा लेकिन वहां भी दबंगई का सामना करना पड़ा. आइए आपको बताते हैं कि आम आदमी के साथ कितनी बेरुखी से बात की जाती है.

रिपोर्टर - मुझे एक लीटर पेट्रोल चाहिए था और मैने सेल्स मैन अलग से मेजर करके मांगा तो मना कर दिया?

मैनेजर - ठीक तो किया, हमारे पास एक लीटर का कोई मापक यंत्र नहीं है.

रिपोर्टर - तो हम कैसे मान ले कि आपका नोजल सही पेट्रोल दे रहा है?

मैनेजर - आप पांच लीटर पेट्रोल खरीदो हम मेजर करके देते हैं.

रिपोर्टर - मुझे तो एक ही लीटर चाहिए, मै पांच लीटर क्या करुंगा?

मैनेजर - मैं नहीं दे पाउंगा एक लीटर अलग से नापकर.

रिपोर्टर - तब आप मुझे कंप्लेन बुक दे दीजिए हम अपनी पीड़ा तो लिख दें.

मैनेजर - आप किस बात का कप्लेन करेंगे, क्या बेस है आपके कप्लेन का?

रिपोर्टर - आम आदमी का अधिकार है वह अपनी शिकायत कर सकता है.

मैनेजर - लीजिए बुक कप्लेन कर दीजिए, आपको भी चैन मिल जाएगा.

रिपोर्टर - यह आप आफिस में एक लीटर का मेजर रखें है इससे क्यों नहीं दे रहे हैं?

मैनेजर - यह तो हमारे अपने लिए है आप खरीदकर मापक यंत्र लाइए दे देते हैं.

जान लीजिए नियम और अधिकार

पेट्रोल पंप संचालकों को विधिक माप विज्ञान से लाइसेंस लेना होता है.

जिसमें उपभोक्ता हित में 50 एमएल से लेकर पांच लीटर तक का मापक यंत्र रखने का निर्देश होता है.

इस मापक यत्र को विधिक माप विज्ञान विभाग से मुहर लगवाना होता है.

कोई भी उपभोक्ता शक होने पर इस यंत्र से मापने के बाद तेल ले सकता है.

विभाग मापक यंत्र को लेकर पूरी तरह से गंभीर होता है

विभाग समय समय पर इसकी जांच भी करता है.

अगर पेट्रोल पंप पर नाप तौल में गड़बड़ी की जा रही है तो इसकी शिकायत कंज्यूमर विभाग के अधिकारियों को कर सकता है

जांच में कोई गड़बड़ी मिली तो पंप को बंद तक किया जा सकता है.

विभाग को इतना अधिकार है कि वह किसी भी पंप की गड़बड़ी को लेकर कार्रवाई कर सकता है.