- नगर निगम में पीएफ घोटाले का मामला, कंपनियों के स्टेटमेंट नहीं देने के बाद भी हो गया भुगतान

- नियमानुसार पिछले महीने का जमा होना चाहिए स्टेटमेंट, अभी तक पता ही नहीं

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GORAKHPUR: नगर निगम में दो हजार से अधिक सफाई कर्मियों के पीएफ व ईएसआईसी के नाम हुए करोड़ों की हेराफेरी को लेकर अब निगम प्रशासन पर ही सवाल खड़े हो रहे हैं. कर्मचारियों के अकाउंट में पीएफ व ईएसआईसी का पैसा नहीं जमा होने के बाद भी कंपनियों को लगातार पेमेंट किया गया. जबकि नियमानुसार कर्मचारी भविष्य निधि संगठन की ओर से कर्मचारियों के अकाउंट में जमा किए गए पैसों के स्टेटमेंट के बाद ही पेमेंट किया जाना चाहिए था. दोनों कंपनियों ने अभी तक कोई स्टेटमेंट नहीं जमा किया है, लेकिन इसके बाद भी लगातार पांच महीने तक पेमेंट किया गया. नियमों को दरकिनार कर हुए पेमेंट को लेकर जिम्मेदारों की भूमिका भी संदिग्ध लग रही है.

कुछ और ही कहता है नियम

नियोक्ता द्वारा ठेकेदार के जरिए कर्मचारियों का पेमेंट जमा करने के नियम कुछ और ही कहते हैं. कर्मचारी भविष्य निधि योजना 1952 के पैराग्राफ 36 बी के अनुसार 'प्रत्येक ठेकेदार अपने द्वारा या अपने जरिए नियोजित कर्मचारियों से की गई अंशदान की कटौतियों का विवरण हर माह की समाप्ति के सात दिनों के अंदर-अंदर मुख्य नियोक्ता को देगा. साथ ही साथ मुख्य नियोक्ता द्वारा योजना के अंतर्गत आयुक्त को भेजने के लिए मांगी जाने वाली सभी सूचनाएं उपलब्ध कराएगा'. कंपनियों की ओर से पीएफ व ईएसआईसी नहीं जमा करना और डिटेल नगर निगम को नहीं देना सरासर नियमों का उल्लंघन है.

फाइल आते ही होता है पेमेंट

सूत्रों की मानें तो दोनों कंपनियों को नगर निगम अधिकारियों और 'शहर के रसूखदारों' की सरपरस्ती प्राप्त है. पेमेंट की फाइल नगर निगम में आते ही कर्मचारियों को तुरंत ही निपटाने का दबाव होता है. हालांकि अभी तक नगर निगम की ओर से आधा दर्जन पत्र जारी कर कंपनियों ने ईपीएफ व ईएसआईसी जमा करने का वार्ड स्टेटमेंट मांगा गया है. पत्र में लिखे सख्त शब्दों के बाद भी दोनों कंपनियों ने अभी तक इसे गंभीरता से नहीं लिया है. ताज्जुब है कि इसके बाद भी अभी तक इन पर कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है. 10 जनवरी को भी पेमेंट का स्टेटमेंट नहीं देने पर दंडात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई थी पर यह भी हवा-हवाई साबित हुई.

4-4 वार्डो के ठेकेदार बदले

नगर निगम में अभी दो मुख्य कंपनियां ही शहर की सफाई व्यवस्था संभाल रही थीं. सफाई एवं प्रभारी निरीक्षक आकांक्षा राना ने दोनों कंपनियों से 4-4 वार्डो की सफाई का ठेका वापस ले लिया है. इन वार्डो को स्थानीय ठेकेदार को दे दिया गया है. आशंका जताई जा रही है कि मार्च तक शहर के अन्य वार्डो की भी सफाई व्यवस्था को बदला जा सकता है.