कुछ मामलों में एक फॉर्मूला-1 कार और जेट फाइटर लगभग एक जैसे हैं. अगर अन्तर है तो बस यह कि जेट हवा में उड़ता है और फॉर्मूला-1 कार जमीन पर दौड़ती है. मगर एक बात दोनों में कामन है कि दोनों ही हवा से बातें करते हैं. 

किसी jet plane से कम नही हैं ये f-1 कारें

1. फॉर्मूला-1 टीम और ऑटोमोबाइल कंपनियां रेस में इस्तेमाल होने वाली कारों के डेवलपमेंट पर उतना ही खर्च करती हैं जितना कि विमान बनाने वाली कंपनियां जेट पर खर्च करती हैं.

2. किसी जेट की तरह ही ये फॉर्मूला-1 कारें भी कार्बन-फाइबर और बेहद हल्के कल-पुर्जो से बनी होती है.

3. जेट की तरह ही इसका भी मिनिमम वेट तय किया गया है. ड्राइवर के साथ इसका वजन 640 किग्रा से कम नहीं होना चाहिए, कई कारों का वजन 440 किग्रा तक भी होता है. ऐसे में कई बारे टीमें कार का वेट बढ़ाने के लिए एक्स्ट्रा वेट भी इस्तेमाल करती हैं.

4. फार्मूला कारों की इंजीनियरिंग भी जेट्स की तरह की काफी एडवान्स्ड होती है. जैसे किसी जेट का साइज तय होता है उसी तरह ही एफ-1 कार की भी चौड़ाई 180 सेमी और ऊंचाई 95 सेमी तय होती है. हालाकि इसकी लंबाई के लिए कोई नियम नहीं है. लंबाई को चौड़ाई और ऊंचाई के रेशियो में घटा बढ़ा सकते हैं.

5. जेट की तरह ही इन कारों की बैलेंसिंग काफी कठिन होती है. इसे मेंटेन रखने के लिये पंख कार के सस्पेंशन से लेकर उसके ड्राइवर के हेलमेट तक, हर एंगल से एयरोडायनेमिक्स का ध्यान रखा जाता है. मजेदार बात यह है कि जेट की तरह ही इस एयरोडायनेमिक्स में भी सबसे खास कार के पंख होते हैं जो कि 320 किमी प्रति घंटे की रफ्तार तक कार का बैलेंस मेंटेन रखने में की रोल निभाते है और साथ ही कार को जमीन पर और पकड़ बनाने में मददगार साबित होते हैं.

6. एफ-1 कार में दो विंग्स होते हैं, एक आगे और एक पीछे.  2.4 लीटर वी-8 इंजन एफ-1 कार में 2.4 लीटर वी-8 इंजन का इस्तेमाल होता है, जो 18,000 आरपीएम (राउंड पर मिनट) की स्पीड देते हैं. इससे कार 320 किमी प्रति घंटे तक की स्पीड एचीव कर लेती है. यह इंजन 1750 किलो वॉट की एनर्जी निकालता है और इस  दौरान टेंप्रेचर करीब 1000 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है.

किसी jet plane से कम नही हैं ये f-1 कारें

7. जेट की तरह ही इन कारों में फ्यूल इफीसिएंशी का विशेष ध्यान रखा जाता है. एक एवरेज कार के कम्पैरिजन में एफ-1 का इंजन ईधन को 20 फीसदी अधिक क्षमता से ऊर्जा में तब्दील करता है. एफ-1 कार का इंजन ड्राइवर सीट और पिछले एक्सेल के बीच में स्थित होता है.

8. ऐसा नहीं है कि कार को चलाने वाला रेसर किसी जेट पायलेट से कम एनर्जी खर्च करता हो. कार के हाई टेंप्रेचर और जबर्दस्त ग्रेविटेशन फोर्स के दबाव से एक रेस के दौरान एफ-1 ड्राइवर के शरीर से करीब दो लीटर पसीना बह जाता है.

9. ऑटोमेटिक गीयर एफ-1 कार में सात फॉरवर्ड गीयर और एक रिवर्स गीयर होता है. इसका गीयर बॉक्स कार्बन-टाइटेनियम का बना होता है. यह पूरी तरह ऑटोमेटिक होता है. फंक्शनल स्विच से लैस स्टेयरिंग फॉर्मूला-1 कार का स्टेयरिंग कोई साधारण स्टेयरिंग नहीं होता है बल्कि उसमें कई तरह के फंक्शनल स्विच (बटन) लगे होते हैं. रेस के दौरान ड्राइवर स्टेयरिंग पर लगे इन बटनों की मदद से क्लच ऑपरेट करते हैं, गीयर बदलते हैं, फ्यूल (पेट्रोल) और हवा के दबाव पर नजर रखते हैं. स्टेयरिंग पर एक स्क्रीन भी लगी होती है, जिसमें ड्राइवर लैप टाइम, स्पीड, गीयर देख सकते हैं. इस स्टेयरिंग का वजन 1.3 किग्रा तक होता है और यह कार्बन फाइबर का बना होता है.

10. फार्मूला-1 कारों का ब्रेकिंग सिस्टम  बेहद जबर्दस्त होता है और ब्रेक लगाते वक्त पैदा हुए फ्रिक्शन से ब्रेक-पैड के बीच पैदा हुआ 1000 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा का तापमान भी यह आसानी से सह लेता है. कहते हैं कि गाड़ी दौड़ाने से ज्यादा जरूरी है गाड़ी को रोकना. किसी सर्किट पर खतरनाक मोड़ों से निकल रही गाड़ी के लिये ब्रेकिंग सबसे ज्यादा अहम होती है. अच्छे ड्राइवर ब्रेक के अलावा इंजन की स्पीड को कम करके भी रफ्तार को कंट्रोल करते हैं. आप फार्मूला-1 कार के ब्रेकिंग सिस्टम का अन्दाजा इसी बात से लगा सकते हैं कि इसमें ब्रेक लगाने पर 15 मीटर की दूरी में ही 100 किमी प्रतिघंटे की स्पीड को जीरो तक लाया जा सकता है.

11. अब आखिरी बात इनके टायरों की. टायरों के मामले में उडने वाले जेट से कहीं ज्यादा खास ये दौड़ने वाले जेट होते हैं और इनमें सबसे खास इसके टायर होते हैं. सामान्य टायर की तरह ही ये टायर भी रबर के होते हैं. एफ-1 कार के टायर की चौड़ाई 245 मिमी से ज्यादा नहीं होती है. ये टायर एक खास रबर के बने होते हैं. मजेदार बात यह है कि आपकी कार में यूज होने वाले सामान्य टायर की लाइफ 80,000 किमी तक होती है पर एफ-1 कार में लगने वाले स्पेशल टायर की उम्र 300 किमी ही होती है. जेट विमानों में भी टायरों को भी कुछ उड़ानों के बाद की बदल दिया जाता है. 

इतने सारे कम्पैरिजन्स के बाद तो यह मानना ही पड़ेगा कि अगर जेट हवा के हीरो हैं तो F-1 की ये कारें जमीं की बादशाह.