यूपी बोर्ड अधिकारियों ने पूरे मामले को लेकर की कार्रवाई की तैयारी

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ALLAHABAD: यूपी बोर्ड ने इस बार इतिहास रचते हुए अप्रैल में ही बोर्ड परीक्षा परिणाम जारी कर दिए. हालांकि कॉपियों के मूल्यांकन के दौरान जिस प्रकार के तथ्य और स्टूडेंट्स की स्थिति सामने आयी थी. परिणाम उससे काफी बदला हुआ नजर आया. यही कारण है कि कई जगह परीक्षा परिणामों को लेकर अंगूली उठने लगी. इस बीच 10वीं व 12वीं की परीक्षा में एवार्ड ब्लैंक ओएमआर शीट सार्वजनिक होने के बाद बोर्ड परीक्षा ही सवालों में के घेरे में है. बोर्ड अफसरों ने सोशल मीडिया पर आए एवार्ड ब्लैंक ओएमआर शीट का संज्ञान लेकर कुछ परीक्षकों से पूछताछ शुरू की. मामले में दो शिक्षकों को बोर्ड मुख्यालय बुलाकर उनका पक्ष भी लिया गया. अधिकारियों की माने तो पूरे मामले में कड़ी कार्रवाई की तैयारी है.

वाट्सएप पर हुई थी वायरल

इस बार बोर्ड परीक्षा में नकल पर नकेल कसने के साथ ही केन्द्र निर्धारण के नियम भी सही प्रकार से फालो करने का प्रयास किया गया. सरकार की सख्ती से नकल माफियाओं पर अंकुश लगने के बाद बोर्ड के शानदार परिणाम के बीच ही गोपनीयता भंग करने का मामला सामने आ गया. इसने बोर्ड के साथ ही सूबे की सरकार को भी कटघरे में खड़ा कर दिया.

परीक्षकों ने ही तोड़े नियम

मूल्यांकन केंद्रों से क्षेत्रीय कार्यालयों को भेजी जाने वाली एवार्ड ब्लैंक ओएमआर शीट के अंक सार्वजनिक होने से पूरी परीक्षा ही तमाशा बन गई, क्योंकि परीक्षार्थियों को इकाई में अंक मिले हैं, वे अच्छे अंकों से उत्तीर्ण हो गए हैं. यह प्रकरण उस समय सार्वजनिक हुए जब सीसीटीवी कैमरे के सामने मूल्यांकन कराने का बोर्ड की तरफ से दावा किया गया. मूल्यांकन केंद्रों पर मोबाइल आदि के उपयोग पर प्रतिबंध रहा है. बोर्ड प्रशासन के अंग कहे जाने वाले परीक्षकों ने ही कई नियम तोड़ दिए.

सार्वजनिक करने की मची होड़

खास बात यह है कि गोपनीय ओएमआर शीट पहले चुनिंदा लोगों के बीच में सार्वजनिक हुई, इसके बाद सोशल मीडिया पर मानों यह शीट वायरल करने की होड़ मच गई. लगभग हर जिले में परीक्षकों ने बोर्ड की गोपनीयता भंग करने में संकोच नहीं किया. बोर्ड प्रशासन ने पिछले दिनों ओएमआर शीट नंबर के जरिए कुछ परीक्षकों को पूछताछ के लिए बुलाया था, क्योंकि इस मामले में प्रदेश सरकार व बड़े अफसरों ने गंभीर एतराज जताया है. तैयारी है कि कुछ परीक्षकों को मूल्यांकन केंद्रों के उप नियंत्रक आदि पर कार्रवाई होगी. परीक्षकों को डिबार करके नोटिस थमाया जा सकता है. बोर्ड प्रशासन इस मामले में अभी मौन है.