- हाई कोर्ट ने दिए तीन माह के भीतर बुग्यालों से स्थाई निर्माण हटाने के आदेश

- 6 माह में प्लास्टिक कचरा हटाने की जिम्मेदारी डीएम को

नैनीताल: प्रदेश के बुग्यालों (उच्च हिमालयी क्षेत्रों में हरी घास के मैदान) में कोई भी टूरिस्ट नाइट हॉल्ट नहीं कर पाएगा और यहां सारे स्थाई निर्माण ध्वस्त कराए जाएंगे. हाई कोर्ट ने आदेश जारी करते हुए राज्य सरकार को स्थाई निर्माण हटाने के लिए तीन माह का समय दिया है. कोर्ट ने गुरु ग्रंथ साहब के एक वाक्य का हवाला देते हुए कहा है कि हवा, पानी, धरती व आकाश, भगवान का घर है.

याचिका पर हुई सुनवाई

अलबेदनी बागजी बुग्याल संघर्ष समिति चमोली की ओर से जनहित याचिका दायर कर बुग्यालों में गेस्ट हाउस, पक्के निर्माण व व्यावसायिक चरागाह आदि पर रोक लगाने की मांग की गई थी. मंगलवार को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजीव शर्मा व न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह की खंडपीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य के सभी बुग्यालों से तीन माह के भीतर पक्के निर्माण हटाने के आदेश पारित किए. खंडपीठ ने प्रकृति, पर्यावरण व पारिस्थितिक तंत्र के संरक्षण के लिए छह हफ्ते के भीतर ईको डेवलपमेंट कमेटी बनाने के भी निर्देश दिए हैं. बुग्यालों में किसी भी प्रकार के निर्माण पर रोक लगाते हुए रात्रि विश्राम को भी प्रतिबंधित कर दिया गया है. खंडपीठ ने बुग्यालों का व्यावसायिक चारागाह के रूप में उपयोग करने पर रोक लगा दी है मगर स्थानीय चरवाहों को इससे छूट दी गई है. सभी डीएम को निर्देश दिए हैं कि छह सप्ताह के भीतर बुग्यालों से प्लास्टिक का कचरा हटाएं और अतिक्रमण पर प्रभावी रोक लगाएं. कोर्ट ने

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सार्वजनिक स्थल पर कुर्बानी नहीं

नैनीताल : हाई कोर्ट ने सार्वजनिक स्थानों पर पशुबलि व कुर्बानी दिए जाने पर रोक लगाई है. राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि आदेश का सख्ती से पालन किया जाए. कोर्ट ने यह भी साफ किया है कि किसी भी दशा में गाय, गोवंश और ऊंट की कुर्बानी नहीं होगी और इसके लिए डीएम को जवाबदेह बनाया गया है. इसके अलावा भैंसा, बकरा व भेड़ की कुर्बानी भी सार्वजनिक स्थान पर करने पर रोक लगाई है. ंिहंदू महासभा हल्द्वानी के अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल ने इस संबंध में हाई कोर्ट को पत्र भेजा था.