-ट्रक चोरी होने के बाद इंश्योरेंश कंपनी ने खारिज कर दिया था क्लेम का दावा

-कोर्ट ने वाद डिक्री करते हुए लगाया 11 लाख से अधिक का जुर्माना

BAREILLY :

रोड किनारे खड़ा ट्रक चोरी होने के बाद इंश्योरेंस कंपनी को क्लेम का दावा खारिज करना महंगा पड़ गया. ट्रक ओनर के दायर वाद पर कज्यूमर फोरम ने न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी को दोषी माना. कंज्यूमर फोरम के अध्यक्ष घनश्याम पाठक ने इंश्योरेंस कंपनी पर 11 लाख 20 हजार रुपए बीमा पॉलिसी के क्लेम के मद में डिक्री किया तथा दावे की डेट से वसूली की डेट तक 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज का भी जुर्माना लगाया है. कोर्ट ने इंश्योरेंस कंपनी पर 4 हजार रुपए मानसिक क्षतिपूर्ति और 5 हजार रुपए वाद व्यय का भी जुर्माना लगाया है. कोर्ट ने 45 दिन में जुर्माना राशि अदा करने का भी आदेश दिया है.

30 दिसम्बर को हुआ था ट्रक चोरी

किला थाना हुसैन बाग निवासी शाहित हुसैन ने दायर वाद में बताया कि उन्होंने ट्रक का न्यू इंडिया इश्योंरेंस कंपनी सीबीगंज से 22 फरवरी 2016 से 21 फरवरी 2017 तक के लिए बीमा कराया था. बीमित धनराशि 16 लाख रुपए थी. ट्रक ड्राइवर मो. अल्ताफ न्यूरिया से धनकुला बंडी रोड से होकर पीलीभीत आ रहा था. धनकुला से आगे सेंटर पर पहुंचकर मो. अल्ताफ ने ट्रक को रोड किनारे 30 दिसम्बर को खड़ा कर दिया जहां पर और भी ट्रक खड़े थे. इसके बाद अल्ताफ 2 किलोमीटर दूर रिश्तेदारी में भिखारीपुर चला गया. वहां से अगले दिन वापस आया तो ट्रक नहीं था. मो. अल्ताफ ने काफी तलाशा लेकिन ट्रक नहीं मिला. ट्रक ओनर ने सूचना पर न्यूरिया पीलीभीत थाने में एफआईआर दर्ज करा दी. उसके बाद इश्योरेंस कंपनी में क्लेम का दावा पेश किया.

बीमा की शर्तो में क्षतिपूर्ति क्लेम नहीं

ट्रक ओनर के दायर वाद पर इंश्योरेंस कंपनी ने क्लेम का दावा खारिज करते हुए बताया कि ट्रक का इंश्योरेंस वैध था, लेकिन ड्राइवर सुनसान जगह पर ट्रक को खड़ा करके चला गया. वहां पर कोई देखरेख करने वाला नहीं था. जिस कारण ट्रक चोरी हुआ है. इससे माना जा रहा है असुरक्षित जगह से ट्रक चोरी हुआ है. बीमा की पॉलिसी की शर्तो में भी क्षतिपूर्ति नहीं दिया जा सकता है. इस पर ट्रक ओनर ने अपने सभी पेपर भी पेश किए लेकिन कंपनी ने इंश्योरेंस क्लेम खारिज कर दिया.

इंश्योरेंस कंपनी बचाव में दी मिसाल

-परमजीत कौर प्रति ओरियंटल इश्योरेंस

-ओरियंटल इंडिया कंपनी प्रति श्याम सुंदर

-यूनाइटेड इंडिया प्रति माया

-इफ्को टोकियो प्रति संजय भगवार

-ओरियंटल इंडिया कंपनी प्रति बल सालन

-जगदीश प्रसाद वक्सी प्रति ओरियंटल इंडिया कंपनी

-तेजवीर सिंह प्रति ओरियंटल इंडिया

पीडि़त ने पेश्ा किए दावे

-न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी बनाम प्रवीन क्रोशा टाकरी

-मंजीत सिंह बनाम न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी

-नेशनल इंश्योरेंस कंपनी बनाम नितिन खंडेलवाल

-मंजीत सिंह बनाम न्यू इंडिया इंश्योरेंस

-नेशनल इंश्योरेंस बनाम नितिन ख्ांडेलवाल

कोर्ट ने माना अजीविका का साधन

पीडि़त की तरफ से दायर वाद में यह भी बताया कि ट्रक उसकी अजीविका का साधन था जो चोरी हो गया. इसीलिए उसका क्लेम बगैर किसी आधार के खारिज करना गलत है. कोर्ट ने तेजबीर सिंह प्रति ओरियंटल के वाद में पाया क्लेम न दिए जाने का कारण था कि ड्राइवर वाहन में चाबी लगी छोड़कर चला गया. इसीलिए क्लेम नहीं मिला. वहीं एमएस मिडिल हाईस्कूल प्रति एचडीएफसी कंपनी के मामले में पाया कि पॉलिसी धारक ने शर्तो का उल्लंघन किया. तथ्य भी पूरे अंकित नहंी थे. इसी तरह इंश्योंरेस कंपनी के पेश किए बचाव के अन्य केस का भी अध्ययन किया. जिसके बाद कोर्ट ने पीडि़त के भी पेश किए दावों को अध्यन किया. जिसके बाद कोर्ट ने पाया कि नान स्टैंडर्ड बेसिस बीमित धनराशि का 70 प्रतिशत क्लेम मिलना चाहिए. बीमा कंपनी ने क्लेम खारिज कर उपभोक्ता सेवा प्रदान करने में त्रुटि की है. इसी प्रकार बीमा पॉलिसी की धनराशि 16 लाख रुपए का 70 प्रतिशत ट्रक ओनर पाने का अधिकारी है. इसके साथ दावे की डेट से वसूली की डेट तक 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज पाने का भी अधिकारी है. कोर्ट ने मामले में इंश्योरेंस कंपनी पर 11 लाख 29 हजार रुपए जुर्माना लगा दिया है.