-लगातार बढ़ रहे सुसाइड के मामले समाज के लिए बने चुनौती

-लोगों को जागरुक करने के लिए स्वास्थ्य विभाग चलाएगा अभियान

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ALLAHABAD: दौड़-भाग, काम का तनाव, अपनों से दूरी, एकाकी परिवार, प्रेम और पैसे का अभाव यह शब्द हमारे जीवन का हिस्सा बन चुके हैं. इनकी वजह से लोग डिप्रेशन का शिकार हो रहे हैं. परिणाम, लगातार बढ़ते सुसाइड के मामले समाज के लिए चुनौती बन चुके हैं. यही कारण है कि इस बार व‌र्ल्ड सुसाइड प्रिवेंशन डे की थीम वर्किंग टुगेदर टु प्रिवेंट सुसाइड रखी गई है. ताकि ऐसे मामलों पर रोक लगाई जा सके.

केस-1

सात सितंबर को पूर्व आईजी राम अधार के बेटे आलोक प्रकाश ने खुद को गोली मार ली. वह कमलानगर मोहल्ले के रहने वाले थे. इस सुसाइड ने भरे पूरे परिवार को हिलाकर रख दिया. पुलिस अभी भी कारणों का पता लगा रही है.

केस-2

सीडीए पेंशन में कार्यरत आलोक ने कुछ दिन पूर्व फांसी लगा ली. उसकी शादी तय हो गई थी और सगाई की डेट भी फिक्स हो चुकी थी. मूल रूप से फतेहपुर के रहने वाले आलोक धूमनगंज के विष्णुपुरी कलोनी में रहते थे. इस घटना से परिवार स्तब्ध है.

केस-3

22 अगस्त को जॉर्ज टाउन के रहने वाले 45 वर्षीय राजेश कुमार हितैषी ने आत्महत्या कर ली. वह एलआईसी कर्मचारी थे. बताया गया कि वह बीमारी से लंबे समय से परेशान थे इसलिए इतना घातक कदम उठा लिया.

केस-4

छह अप्रैल को इलाहाबाद विवि के रिसर्च स्कॉलर एसएस पॉल ने हॉस्टल में फांसी लगाकर जान दे दी. वह गोल्ड मेडलिस्ट था. जानकारी के मुताबिक किसी कारणवश वह लंबे समय से डिप्रेशन का शिकार था.

केस-5

अपने ऊपर लगाए गए जमीन हड़पने के गलत आरोप व मुकदमे से परेशान रिटायर्ड प्रिंसिपल आरके गवन ने इसी साल 19 अप्रैल को सुसाइड किया था. हायर लिट्रेट पर्सनैलिटी के इस तरह कदम उठा लेने की घटना ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया.

सुसाइड की प्रमुख वजहें

-शोक, यौन शोषण, वित्तीय समस्याएं, पश्चाताप, किसी प्रकार की अस्वीकृति, रिश्ता टूटना या बेरोजगारी आदि.

इन लक्षणों को पहचानना जरूरी

-अकेले रहना

-बार-बार मूड बदलना

-आशाहीन

-शराब या दूसरे नशे का शिकार

-रूटीन में बदलाव

-अजीबोगरीब व्यवहार, चिंता या उत्तेजना आदि.

सुसाइड का केमिकल कनेक्शन

सेरोटोनिन एक प्रकार का मस्तिष्क का केमिकल (न्यूरो ट्रांसमीटर) होता है जो मूड, चिंता और आवेगशीलता को पैदा करता है. आत्महत्या करने वालों में इस केमिकल का स्तर सामान्य रूप से कम पाया जाता है.

ऐसे बनेगी सुसाइड से दूरी

-परिवार से सहारा मिलना

-शराब व अन्य नशे से दूरी

-व्यायाम करना

-7 से 8 घंटे की नींद

-सेल्फ हेल्प ग्रुप में उपस्थित होना

-डॉक्टर से सलाह मशविरा

शुआट्स में होगा जागरुकता कार्यक्रम

व‌र्ल्ड सुसाइड प्रिवेंशन डे के मौके पर सोमवार को नैनी शुआट्स में स्वास्थ्य विभाग की ओर से जागरुकता कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है. एनसीडीसेल के डॉ. वीके मिश्रा और काल्विन हॉस्पिटल के सायकाट्रिस्ट डॉ. राकेश पासवान के नेतृत्व में स्टूडेंट्स और टीचर्स को सुसाइड के कारणों व बचाव के बारे में बताया जाएगा. उन्हें सोसायटी को इस विभीषिका से बचाने के लिए प्रेरित भी किया जाएगा.

वर्जन..

डिप्रेशन और फ्रस्ट्रेशन वर्तमान में दो ऐसी चीजें हैं जो युवाओं में भटकाव का कारण बनी हैं. इससे व्यक्ति सुसाइड की ओर से चला जाता है. कुछ ऐसे एग्जाम्पल्स भी ऐसे सामने आए हैं जो हमें सोचने पर मजबूर करते हैं. लोगों में उच्च शिक्षा का भी अभाव है.

-डॉ. गिरिजाशंकर बाजपेई, सीएमओ, इलाहाबाद

हमारे देश में हर साल डेढ़ लाख सुसाइड कर रहे हैं. यह आंकड़े चौकाने वाले हैं. इलाहाबाद में भी सुसाइड की घटनाएं आए दिन हो रही हैं. इसलिए समय आ गया है कि लोगों को जागरुक किया जाए. इसी क्रम में स्कूल-कॉलेजों में समय-समय पर अवेयरनेस ड्राइव चलाई जा रही हैं.

-डॉ. राकेश पासवान, सायकायट्रिस्ट, काल्विन हॉस्पिटल