-यूनिवर्सिटी को नहीं मिल पा रहे हैं रिनाउंड ठेकेदार

-हैसियत, कैरेक्टर सर्टिफिकेट के साथ रजिस्ट्रेशन मस्ट होने से बढ़ी परेशानी

-काफी दिनों से चल रही है रजिस्ट्रेशन प्रॉसेस, लेकिन सिर्फ एक ठेकेदार ने किया अप्लाई

GORAKHPUR: डीडीयू गोरखपुर यूनिवर्सिटी को ठेकेदार ढूंढने से भी नहीं मिल रहे हैं. यूनिवर्सिटी में कंस्ट्रक्शन के साथ ही दूसरे काम के लिए यूनिवर्सिटी एडमिनिस्ट्रेशन ने रजिस्ट्रेशन प्रॉसेस शुरू कर दी है. लेकिन तीन माह से ज्यादा का वक्त बीत चुका है मगर अब तक ठेकेदारों ने यूनिवर्सिटी में रजिस्ट्रेशन से दूरी बना रखी है. इसकी सबसे अहम वजह यूनिवर्सिटी की ओर से मांगे गए हैसियत के साथ ही दूसरे दस्तावेज हैं, जिसकी वजह से यूनिवर्सिटी में होने वाले व‌र्क्स के लिए रजिस्ट्रेशन कराने कोई भी ठेकेदार नहीं पहुंचा है.

कैरेक्टर की भ्ाी डिमांड

गोरखपुर यूनिवर्सिटी में इस बार साफ सुथरी छवि के ठेकेदारों से ही काम कराना है, इसकी वजह से रजिस्ट्रेशन कराने वाले कैंडिडेट्स से हैसियत प्रमाण पत्र के साथ ही कैरेक्टर सर्टिफिकेट की भी डिमांड की गई है. वहीं, कैंडिडेट्स का रजिस्ट्रेशन होना भी जरूरी है. इन सभी शर्तो को पूरा करने में यूनिवर्सिटी के लिए इंटरेस्टेड ठेकेदार नाकाम हैं, जिसकी वजह से अब तक कोई भी रजिस्ट्रेशन नहीं हाे सका है.

यूनिवर्सिटी को मिलेगा फायदा

गोरखपुर यूनिवर्सिटी में रिनाउंड और रजिस्टर्ड ठेकेदार हो जाने से यूनिवर्सिटी को काफी फायदा मिलेगा. इससे जहां वर्क प्रोग्रेस काफी तेजी से होगी. वहीं मैटेरियल और क्वालिटी में भी किसी तरह का लेकिन नहीं होगा. इससे यूनिवर्सिटी में सभी कंस्ट्रक्शन टाइमली होंगे और जिस तरह उन्हें कई वर्क कंप्लीट होने के लिए जिम्मेदारों की राह तकनी पड़ रही है, वैसी कंडीशन भी नहीं होने पाएगी.

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दे दिया मां का हैसियत और कैरेक्टर

पिछले कुछ माह से चल रही रजिस्ट्रेशन प्रॉसेस में यूनिवर्सिटी को एक भी वेंडर नहीं मिल सका है. पिछले दिनों एक व्यक्ति रजिस्ट्रेशन के लिए पहुंचा भी तो उसने खुद का कैरेक्टर और हैसियत का सर्टिफिकेट ही नहीं प्रोवाइड किया. जब यूनिवर्सिटी एडमिनिस्ट्रेशन ने दोनों की डिमांड की, तो उसे अपनी मां का हैसियत और कैरेक्टर सर्टिफिकेट सब्मिट कर दिया. जांच के दौरान रजिस्ट्रार ने सर्टिफिकेट को वापस लौटाते हुए खुद कैंडिडेट के सर्टिफिकेट की डिमांड की है.