क्त्रन्हृष्ट॥ढ्ढ : रांची नगर निगम के डिप्टी मेयर संजीव विजयवर्गीय की सलाह पर जिस ठेकेदार को विभिन्न वार्डो में प्रधानमंत्री आवास बनाने का ठेका मिला था, वह बड़ा ठग निकला. पीएम आवास के नाम पर 1600 लाभुकों को करीब 7.20 करोड़ का चूना लगाने के बाद से वह फरार है. इस बात का खुलासा उस वक्त हुआ, जब डीएमसी संजय कुमार सोमवार को पीएम आवास के काम की प्रगति व जांच के सिलसिले में चूना भट्ठा पहुंचे. यहां प्रधानमंत्री आवास का काम बंद होने की बाबत लाभुकों ने पूछा तो उन्होंने बताया कि जिस ठेकेदार को काम मिला है, उसने पहले फेज का पैसा लेने के बाद भी आवास निर्माण का काम शुरू नहीं किया. अब हमारे पास इतने पैसे नहीं हैं कि अपने बलबूते आवास बनाने का काम पूरा कर सकें. यही वजह है मजबूरी में आवास बनाने का काम बीच में रोक देना पड़ा है.

ठेकेदार को कई वार्ड में ठेका

प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत लाभुकों को अपनी जमीन पर अपने स्तर पर मकान बनाना है. इसके लिए सरकार द्वारा लाभुकों को काम की प्रगति के आधार पर चार चरण में राशि का आवंटन किया जाता है. लेकिन, डिप्टी मेयर संजीव विजयवर्गीय ने लाभुकों को भरोसा दिलाया कि वे उनके बताए ठेकेदार को आवास बनाने का काम सौंप दें. लाभुकों ने भी उनकी बात पर विश्वास करते हुए पहले फेज में मिले रुपए ठेकेदार को सौंप दिए, ताकि आवास बनाने का काम जल्द से जल्द शुरू हो सके. यह किसी एक लाभुक या वार्ड का मामला नहीं है. कई वार्डो में करीब 1600 लाभुकों ने डिप्टी मेयर के बताए ठेकेदार को 45-45 हजार रुपए दे दिए, लेकिन आजतक उनका घर नहीं बन सका है.

1600 लाभुकों से लिए 45-45 हजार रुपए

डिप्टी मेयर के बताए ठेकेदार पर 1600 लाभुकों से 45-45 हजार रुपए बतौर एडवांस लेने का प्रधानमंत्री आवास नहीं बनाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है. इस हिसाब से देखें तो करीब 7.20 करोड़ रुपए का चूना वह प्रधानमंत्री आवास योजना के नाम पर लाभुकों को लगा चुका है. रुपए की वसूली करने के बाद से ठेकेदार कहां फरार है, इसकी जानकारी नहीं मिल पा रही है. अब लाभुक समझ नहीं पा रहे हैं कि आखिर वे कैसे अपना मकान बनाएं.

रुपए लेकर ठेकेदार फरार, लाभुक परेशान

सबसे अहम बात है कि डिप्टी मेयर का बताया ठेकेदार लाभुकों से 7.20 करोड़ की वसूली करने के बाद से फरार चल रहा है. कुछ दिनों तक लाभुक इस आशा में रहे कि ठेकेदार उनके आवास को बनाने के लिए पहल करेगा, पर निराशा हाथ नहीं लगी. अब उनके पास पैसे भी नहीं हैं कि वे घर बना सकें, तो दूसरी ओर आवास निर्माण का काम पूरा नहीं होने पर कानूनी कार्रवाई का डर भी उन्हें सता रहा है.

पैसे की किल्लत बना पीएम आवास का रोड़ा (बॉक्स)

अब लाभुकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती है कि वे प्रधानमंत्री आवास का निर्माण कार्य कैसे पूरा करें. पहले फेज की मिली राशि लेकर ठेकेदार फरार हो चुका है और काम अधूरा होने की वजह से अगले फेज की राशि भी नहीं निर्गत की जा रही है. उनके पास इतने पैसे भी नहीं है कि पहले चरण के लिए निर्धारित स्तर तक का आवास बना सकें. डीएमसी को कुछ लाभुकों ने यह भी बताया कि उनके द्वारा काम पूरा किया जा चुका है, लेकिन नेक्स्ट फेज की राशि नहीं दी जा रही है, वहीं कुछ लाभुकों ने काम करने में असमर्थता जताई. ऐसे में डीएमसी ने कहा कि उनका पीएम आवास का सैंक्शन ऑर्डर सरेंडर किया जाएगा.