- हाईकोर्ट में सजा के खिलाफ की थी अपील, अपने ही जाल में फंसा आरोपी

- जांच में आरोपी, पैरोकार समेत चार दोषी, दो को भेजा गया जेल

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LUCKNOW : नाबालिग से रेप और हत्या के आरोप में सजायाफ्ता को फर्जी जुवनाइल प्रमाण पत्र से जेल से छुड़ा लिया और उसकी सजा माफी का भी प्रयास किया. अपील वापसी के लिए हाईकोर्ट में प्रार्थनापत्र देने पर इस फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ. इसके बाद हाईकोर्ट के आदेश पर मामले की जांच शुरू हुई. जांच में सामने आया कि न केवल कोर्ट का फर्जी आदेश बनाया गया, बल्कि जेजे बोर्ड में जुवनाइल प्रमाणपत्र पेश किया गया. पुलिस की जांच में चार लोगों को दोषी पाया गया. जिसमें पैरोकार और अभियुक्त को जेल भेज दिया गया. वहीं इस मामले में पुलिस व दो अन्य आरोपियों के खिलाफ हुकुम तहरीर जारी की है.

क्या था मामला
साल 2012 में मोहनलालगंज में रेप और हत्या का एक मामला दर्ज किया गया था. जिसमें पुतई और दिलीप को जेल भेजा गया था. सेशन कोर्ट ने 2014 में पुतई को फांसी और दिलीप को उम्रकैद की सजा सुनाई थी. सेशन कोर्ट ने दोनों की सजा कायम रखने के लिए अप्रूवल हाईकोर्ट भेजा था. इसी दौरान दोनों मुल्जिमों ने हाईकोर्ट में सजा माफी की अपील की, जिसकी सुनवाई चल रही थी. इस दौरान दोनों मुल्जिम जेल में थे.

दस्तावेज में किया फर्जीवाड़ा
सीओ आलमबाग संजीव सिन्हा ने बताया कि दिलीप का मार्कशीट के जरिए जुवनाइल सर्टिफिकेट बनाया गया और लोअर कोर्ट से फर्जी पत्र तैयार कर उसने जुवनाइल बोर्ड में दायर किया गया. कोर्ट में ट्रायल के दौरान दिलीप को जुवनाइल घोषित किया गया. चूंकि वह पांच साल सजा काट चुका था इसलिए कोर्ट ने उसे छोड़ने का निर्देश भी दे दिया. इसी ग्राउंड पर दिलीप भी जेल से बाहर आ गया. हालांकि रिहाई के लिए फरमान आने पर जेल सुप्रिंटेंडेंट ने क्योरी लगाते हुए कोर्ट को पत्र भी लिखा था.

अपने ही जाल में फंसे आरोपी
जेल से रिहाई के बाद आरोपी के परिजनों ने हाईकोर्ट में प्रार्थनापत्र दिया कि जुवनाइल होने के कारण उसे रिहाई मिल गई है, इसलिए अपील की सुनवाई रद की जाए. इस प्रार्थनापत्र को हाईकोर्ट ने संज्ञान लेते हुए कहा कि जब पहले माफी की अपील हाईकोर्ट में दायर की गई तो किस आधार पर निचली कोर्ट ने जुवनाइल के तहत आरोपी को रिहा किया. पुलिस के राजपत्रित अधिकारी से मामले की जांच का आदेश दिया.

जांच में दोषी पाए गए पैरोकार
हाईकोर्ट के आदेश पर जांच की जानकारी मिलने पर जेजे बोर्ड की तरफ से पारा थाना में जुवनाइल बोर्ड में फर्जी दस्तावेज लगाकर रिहाई पाने के मामले में केस दर्ज कराया गया. मामले की जांच सीओ आलमबाग संजीव सिन्हा को सौंपी गई. जांच में बोर्ड के पैरोकार, आरोपी और उसकी मां के साथ वकील को भी आरोपी बनाया गया. पुलिस ने आरोपी दिलीप को पहले ही गिरफ्तार कर दोबारा जेल भेज दिया था. शुक्रवार को पुलिस ने बोर्ड के पैरोकार को भी जेल भेज दिया. अब पुलिस आरोपी की मां और उसकी महिला वकील के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी कर रही है.

रेप और मर्डर केस का एक आरोपी फर्जी दस्तावेज लगाकर जुवनाइल बोर्ड से नाबालिग होने का दावा पेश कर जेल से रिहा हो गया था. हाईकोर्ट के आदेश पर जांच की गई. जिसमें आरोपी के साथ बोर्ड के पैरोकार और वकील को दोषी पाया गया है. इस मामले दो लोगों को जेल भेजा जा चुका है, दो अन्य की गिरफ्तारी जल्द की जाएगी.
संजीव सिन्हा, सीओ आलमबाग