-आयोग के आदेश के बाद मैन्युअल हुई पोस्टल बैलेट की काउंटिंग

-देशभर में एकसाथ पोस्टल बैलेट की स्क्रीनिंग के चलते ठप हो गया सॉफ्टवेयर-आब्जर्वर

MEERUT : भारत निर्वाचन आयोग का पायलट प्रोजेक्ट इलेक्ट्रानिकली ट्रांसमीडेट वोटर बैलेट सिस्टम फेल हो गया। सर्विस वोटर्स के पोस्टल बैलेट की प्रमाणिकता के परीक्षण के लिए इस बार आयोग ने ऑनलाइन ईटीपीबीएस सिस्टम को एडॉप्ट किया तो वहीं ऐन मौके पर सर्विस वोटर्स की गिनती से पूर्व यह ऑनलाइन सिस्टम ठप हो गया। सुबह 8 बज से संचालित होने वाली सर्विस वोटर्स के पोस्टल बैलेट की गिनती दोपहर 1 बजे तक शुरू हो सकी। इस दौरान जिला प्रशासन ने माथे पर बल पड़े रहे।

फेल हो गया पायलट प्रोजेक्ट

देशभर में सर्विस वोटर्स को निर्वाचन आयोग ने प्रथमवार ऑनलाइन वोटिंग प्रक्रिया से जोड़कर एक पायलट प्रोजेक्ट लांच किया था। भविष्य की योजना पर गौर करें तो देश के आम नागरिक के लिए ऑनलाइन वोटिंग प्रक्रिया की दिशा में आयोग का यह पहला प्रयास था। हालांकि सबकुछ ठीकठाक रहा किंतु देशभर में एकसाथ 23 मई को प्रात: 8 बजे से सर्विस वोटर्स की स्क्रीनिंग शुरू होते ही ऑनलाइन सिस्टम दम तोड़ गया। और सर्वर के डाउन होने से स्क्रीनिंग प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी। मेरठ में एडीएम एलएल ज्ञानेंद्र कुमार सिंह के नेतृत्व में टीम देर तक सर्वर दुरुस्त होने का इंतजार करती रही तो वहीं सामान्य आब्जर्वर नरेंद्र कुमार गुप्ता पल-पल आयोग के संपर्क में रहे।

आदेश के बाद मैन्युअल काउंटिंग

दोपहर 12:13 बजे सामान्य आब्जर्वर के मोबाइल पर आयोग द्वारा एक आदेश आया जिसमें देश के कुछ स्थानों पर सर्वर ठप होने का हवाला देते हुए सर्विस वोटर्स की गिनती मैन्युअल करने के आदेश दिए गए थे। आयोग के आदेश के बाद दोपहर 1 बजे सर्विस वोटर्स की गिनती शुरू की गई तो शाम 5 बजे तक चली। आब्जर्वर ने बताया कि इस दौरान सर्विस वोटर्स के वोट की प्रमाणिकता की पुष्टि के लिए 12 अंकों के डिजिटल कोड का मिलान किया गया। मेरठ-हापुड़ लोकसभा सीट पर कुल 4585 सर्विस वोटर्स में से 2956 सर्विस वोटर्स का पोस्टल बैलेट जिला निर्वाचन कार्यालय को प्राप्त हो गया था जिसकी काउंटिंग कराई गई। काउंटिंग सेंटर पर निर्वाचन आयोग के निर्देश पर 5 टेबल पर सर्विस वोटर्स के पोस्टल बैलेट की काउंटिंग हुई।

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सर्विस वोटर्स ने भी दबाया नोटा

मेरठ-हापुड़ लोस सीट पर सर्विस वोटर्स के पोस्टल बैलेट के रिजल्ट का आंकलन करें तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आएंगे। एक तो यह कि लोकसभा चुनाव में पहली बार सर्वाधिक (64.47 प्रतिशत) सर्विस वोटर्स की भागेदारी रही तो वहीं कुल सर्विस वोटर्स में 299 को एक भी प्रत्याशी पसंद नहीं था और उन्होंने नोटा को वोट दिया है। यह आंकड़ा कुल वोट का 10 प्रतिशत से अधिक है। वहीं सर्वाधिक वोट भाजपा प्रत्याशी राजेंद्र अग्रवाल को मिले हैं। दूसरे नंबर पर नोटा और तीसरे नंबर पर बसपा प्रत्याशी सर्विस वोटर की पसंद रही।

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ईटीपीबीएस के फेल होने के बाद आयोग के निर्देश के बाद सर्विस वोटर की दोपहर 3 बजे से मैन्युअल काउंटिंग शुरू कर दी गई थी। शाम 5 बजे तक सर्विस वोटर और पोस्टल बैलेट की काउंटिंग का पूरा कर दिया गया था। एकसाथ देशभर में सर्विस वोटर्स की ऑनलाइन स्क्रीनिंग के चलते सिस्टम ठप हो गया था।

-नरेंद्र कुमार गुप्ता, सामान्य प्रेक्षक, मेरठ

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