-20 वर्ष बाद आरयू ने बदला डिग्री का प्रारूप

-86 स्टूडेंट को मिलेगी डिग्री और 87 को गोल्ड मेडल

BAREILLY :

आरयू का 4 सितम्बर को होने वाले16वे दीक्षांत समारोह की तैयारियां अंतिम दौर में हैं. इसके लिए आरयू ने प्रशासनिक भवन के सामने सैटरडे को ज्योतिबाफुले की प्रतिमा भी लगा दी है. प्रतिमा लगने के साथ ही फिनिसिंग का काम भी शुरू कर दिया गया है. प्रतिमा के चारों तरफ लगाए गए पत्थर पर भी ज्योतिबा फुले के शिलालेख के पट लगाए गए हैं. दीक्षांत समारोह की यूपी के राज्यपाल राम नाईक की अध्यक्षता में होगा, इसमें मुख्य अतिथि डिप्टी सीएम डॉ. दिनेश शर्मा होंगे.

87 स्टूडेंट्स को गोल्ड मेडल

16वें दीक्षांत समारोह में इस बार आरयू 86 स्टूडेंट्स को गोल्ड मेडल और 87 स्टूडेंट्स को राज्यपाल के हाथों से डिग्री दी जाएगी. जिसके लिए सभी स्टूडेंटस को निमंत्रण पत्र भेज दिया है. वहीं आरयू में डिग्री भी पि्रंट होकर पहुंच चुकी हैं. रजिस्ट्रार अशोक कुमार अरविन्द ने बताया कि इस बार डिग्री का प्रारूप और पेपर में बदलाव किया गया है. इस बार अच्छे और मजबूत पेपर का डिग्री के लिए यूज किया गया है. यह प्रारूप 20 वर्ष बाद बदला गया है. पिछले 1998 से यूज हो रहा कागज और प्रारूप चेंज किया है.

शिलालेख पर ज्योतिबा का जीवन सूत्र

कर्तव्य करते हुए मृत्यु को प्राप्त करना ही अमर हो जाना है.. सत्य ही परमेश्वर है. मानवता ही धर्म है. परस्पर सहयोग ही नीति है. मैं इसी के लिए जीवन भर लड़ता रहा. मुझे काफी कष्ट उठाने पड़े पर मैं अपने मार्ग से विचलित नहीं हुआ.

-मित्रों मैं एक साधारण मनुष्य हूं. मैं मनुष्य के रूप में ही जीवित रहना चाहता हूं. आप मुझे महात्मा की पदवी देकर मनुष्यों के बीच से उठाएं नहीं. हम सब परमेश्वर की ही संतान हैं. वहीं सच्चे अर्थो में महा-आत्मा है. तुम्हारे सबके हृदय में भी वहीं सूक्ष्म रूम में उपस्थित हैं. उसे जागृत करो.

-स्वार्थ के शिकार मत बनो ईश्वर के प्रति आदर रखकर काम में जुट जाओ. भोला किसान और काम करने वाला मजदूर ही तुम्हारा असली देवता है. उनकी पूजा करो. स्वयं भूखे रहकर, अर्धनग्न रहकर यह महादेवता ही जग को जीवित रखता है. उसे भूलने का मतलब है मानवता का खून करना. कल किसान और मजदूर ही नए जग का निर्माण करेगा.