विकास दर पर एक नजर
आंकड़ों पर नजर डालें तो पहली तिमाही में आर्थिक वृद्धि पिछले 10 तिमाही की तुलना में सबसे अधिक है. चालू वित्‍त वर्ष की पहली तिमाही में खनन विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों के प्रदर्शन में सुधार होने से आर्थिक विकास दर उम्‍मीद से अधिक बढ़कर ढाई वर्ष के उच्‍चतम स्‍तर 5.7 प्रतिशत पर पहुंच गई.   

कुछ ऐसा है आंकड़ों में सुधार
सरकारी बयान पर नजर डालें तो पिछले वित्‍त वर्ष की पहली तिमाही में यह दर 4.7 प्रतिशत रही थी. वित्तीय वर्ष 2014-15 के अप्रैल-जून तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था 5.7 प्रतिशत की दर से आगे बढ़ी है. ऐसे में विनिर्माण क्षेत्र 3.5 प्रतिशत की दर से बढ़ा जबकि पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में यह 1.2 प्रतिशत ऋणात्मक रहा था. वहीं निर्माण क्षेत्र में 4.8 प्रतिशत की दर से बढ़त हुई है. हालांकि कृषि क्षेत्र का प्रदर्शन पिछले वित्त वर्ष की पहली तिमाही के 4.0 प्रतिशत से घटकर 3.8 प्रतिशत पर आ गया है.

ऐसी हैं अन्‍य विकास दरें
इस बार बिजली गैस और जलापूर्ति क्षेत्र की विकास दर 10.2 प्रतिशत रही जबकि पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में यह 3.8 प्रतिशत थी. इस दौरान वित्त बीमा रियल एस्टेट और कारोबारी सेवा क्षेत्र की विकास दर भी 10.4 प्रतिशत रही है. सामुदायिक सामाजिक एवं व्यक्तिगत सेवाओं की वृद्धि दर 9.1 प्रतिशत रही. पिछले दो वित्त वर्ष में लगातार विकास दर पांच प्रतिशत से नीचे बनी हुई थी लेकिन पहली तिमाही में हुई वृद्धि से अर्थव्यवस्था के लिए अच्छे दिन आ गए हैं.

उद्योग संगठनों में भी आई जान
उद्योग संगठनों ने सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) विकास दर के ढाई साल के उच्चतम स्तर 5.7 प्रतिशत पर पहुंचने पर संतोष जताया है और इसे उम्मीद से बेहतर बताया है. इसके साथ ही यह उम्‍मींद भी जताई है कि सरकार को इसमें और तेजी लाने के लिए आर्थिक सुधारों के रास्ते पर ऐसे ही आगे बढ़ते रहना चाहिए.

अभी है और सुधार की गुंजाइश

एसोचैम के मुताबिक विनिर्माण क्षेत्र में और सुधार की गुंजाइश है. साथ ही खनन तथा सेवा क्षेत्र में होटल और परिवहन में भी अभी और सुधार की जरूरत है. उनका कहना है कि कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी कमी के कारण अर्थव्यवस्था में मांग बढ़ेगी जिससे यह और मजबूत होगी.

क्‍या है फ‍िक्‍की की राय
भारतीय उद्योग एवं वाणिज्य महासंघ (फिक्की) ने इस गति को बरकरार रखने की आवश्यकता जताई है और कहा है कि जनवरी-मार्च की तिमाही में 4.6 प्रतिशत विकास दर के बाद अप्रैल-जून की तिमाही में इसके 5.7 प्रतिशत पर पहुंचने का वह स्वागत करता है. फिक्की के मुताबिक पिछले कुछ महीनों के दौरान आर्थिक धारणा में सुधार हुआ है. फिक्की ने कहा कि उसे विश्वास है कि नई सरकार की ओर से उठाए गए विभिन्न सकारात्मक कदमों से पूरे वित्त वर्ष के दौरान आर्थिक विकास का रुख कायम रहेगा. फिक्की ने विनिर्माण क्षेत्र में दो लगातार तिमाहियों में नकारात्मक विकास के बाद 3.5 प्रतिशत की वृद्धि को राहत देने वाला बताया है. फिक्की ने कहा कि निवेश में हो रही बढ़ोतरी को और आगे ले जाने की जरूरत है. फिक्की ने सरकार द्वारा की गई कुछ घोषाणाओं को और मजबूत किए जाने की आवश्यकता पर भी बल दिया है. फिक्की ने कहा कि प्रधानमंत्री का 'मेक इन इंडिया' का सपना जरूरी नीति के साथ लागू कर भारत को विनिर्माण केंद्र बनाया जा सकता है.

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