पिता के अलावा दोनो भाई भी खेलते थे क्रिकेट
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ALLAHABAD : मोहम्मद कैफ को क्रिकेट विरासत में मिला था. उनके पिता मो. तारिक खुद एक अच्छे क्रिकेटर थे. वह रेलवे के लिए खेला करते थे. उन्होंने खुद अपने तीनो बेटों को क्रिकेट की पिच पर उतरने को तैयार होने के लिए प्रेरित किया. तीनो बेटों ने भी उन्हें निराश नहीं किया. अलग बात है कि इंटरनेशनल लेवल पर सिर्फ ही आगे बढ़े. इसके बाद भी तीनो अब भी क्रिकेट से ही जुड़े हुए हैं.
मोहम्मद कैफ के खून में दौड़ता था क्रिकेट,पिता व भाई सभी खेलते थे मैच

क्रास्थवेट स्कूल से की थी पढ़ाई
मो. कैफ के पिता मो. तारिक के तीन बेटे और एक बेटी हैं. बेटी डॉ. उज्मा प्रैक्टिस करती हैं. उनके पति भी डॉक्टर हैं. कैफ के बड़े भाई मो. सैफ वर्तमान समय में ओएनजीसी नई दिल्ली में तैनात हैं. वह भी रणजी खेल चुके हैं. एक भाई मो. आसिफ भी क्रिकेट से जुड़े हुए हैं. वह केपी कॉलेज ग्राउंड पर क्रिकेट की कोचिंग चलाते हैं. कैफ इलाहाबाद में होने पर इस कोचिंग के बच्चों से मिलकर उन्हें टिप्स देने जरूर जाते हैं. कैफ के पिता मो. तारिक के अनुसार कैफ की शुरुआती पढ़ाई क्रास्टवेट स्कूल से हुई है जहां से उन्होंने खुद भी पढ़ाई की थी. हाईस्कूल उन्होंने यमुना क्रिश्चियन इंटर कॉलेज से किया था.

11 साल की उम्र में हुआ स्पो‌र्ट्स हॉस्टल में सेलेक्शन
दैनिक जागरण आई नेक्स्ट से एक्सक्लूसिव बातचीत में कैफ के पिता मो. तारिक ने बताया कि बेटा 11 साल की उम्र में ट्रायल देने कानपुर गया था. यहीं उसका सेलेक्शन ग्रीन पार्क के स्पो‌र्ट्स हॉस्टल के लिए हो गया. इससे पहले ही उनके दोनो भाई मो. सैफ और मो. आसिफ क्रिकेट कोचिंग के लिए चुने जा चुके थे. कैफ ने इलाहाबाद में रहने के दौरान मदन मोहन मालवीय स्टेडियम में क्रिकेट की ट्रेनिंग ली थी. इस ग्राउंड से उन्हें मोह था तभी वह इलाहाबाद में होने के दौरान स्टेडियम में खिलाडि़यों से मिलने जरूर जाते थे.
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पिता ने 18 साल खेली क्रिकेट, भाई चलाते हैं क्रिकेट एकेडमी
मो. कैफ के पिता मो. तारिक भी बेहतर क्रिकेटर रहे हैं. वह बताते हैं कि रेलवे की क्रिकेट टीम से उन्होंने 18 सालों तक रणजी खेली है. इसी के चलते उनका क्रिकेट से भावनात्मक लगाव था और वह चाहते थे कि बेटा भी इसी फील्ड में नाम कमाये.

यश भारती पुरस्कार भी मिल चुका
2002 में इंग्लैंड में नेटवेस्ट सिरीज इंडिया के नाम कराने वाले मो. कैफ की प्रतिभा को तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने सलाम किया था और उन्हें यश भारती पुरस्कार के लिए नामित किया. सरकार की तरफ से उन्हें मिलने वाला यह सबसे बड़ा पुरस्कार था. व‌र्ल्ड कप में टीम इंडिया का हिस्सा होने के चलते उन्हें तमाम पुरस्कार मिले थे.

छत्तीसगढ़ टीम को तैयार कर रहे थे
मो. कैफ वर्तमान समय में भी क्रिकेट से जुड़े हुए है. अलग बात है कि उनका रोल बदल चुका है. पिछले दो साल से अधिक समय से वह छत्तीसगढ़ की क्रिकेट टीम के साथ जुड़े हुए थे. टीम को तैयार करने के बाद उन्होंने क्रिकेट को अलविदा कहने का फैसला लिया.
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2006 के बाद से उन्हें अब तक मौका न मिलना उनके कॅरियर के साथ नाइंसाफी है. कैफ की फिटनेस व उनकी ऊर्जा को देखते हुए मेरा मानना है कि उन्हें रिटायरमेंट नहीं लेने के बजाय मौके की तलाश करनी चाहिए थी.
-अमन मिश्र, क्रिकेट प्रशिक्षणार्थी

यह निर्णय काफी दु:खद है. उन्हें अभी और खेलना चाहिए था. उनकी जबरदस्त फिटनेस और बॉडी लैंग्वेज क्रिकेट के लिए काफी अच्छी है. उनके खेल से यहां क्रिकेट की ट्रेनिंग ले रहे हम जैसे खिलाडि़यों को प्रेरणा मिलती थी.
-रुद्रांस राव, क्रिकेट प्रशिक्षणार्थी

लंबे समय से उन्हें टीम में जगह नहीं मिल रही थी. ऐसे में उनका निर्णय मेरे हिसाब से सही ही है. संन्यास लेकर अब वे कमेंटेटर के रूप में अपने कॅरियर की अच्छी तरह से शुरुआत कर सकते हैं.
-अर्पित श्रीवास्तव, क्रिकेट प्रशिक्षणार्थी

क्रिकेटर मो. कैफ भारतीय टीम के एक मजबूत पिलर रहे हैं. उन्हें इस तरह से अचानक निर्णय नहीं लेना चाहिए. वह एक अच्छे बैट्समैन होने के साथ बेजोड़ फील्डर भी हैं.
-मो. फारान, क्रिकेट प्रशिक्षणार्थी

उनसे खराब प्रदर्शन करने वाले कई ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्हें बराबर मौका मिल रहा है. ऐसे में कैफ जैसे प्लेयर को मौका न दिया जाना गलत है. ऐसी स्थिति में उनका संन्यास लेना मेरी समझ से गलत नहीं है.
-आकाश पाल, क्रिकेट प्रशिक्षणार्थी

मोहम्मद कैफ के लिए यह क्रिकेट से सन्यास लेने का समय नहीं था. उनमें अभी खेलने की अकूत क्षमता है और उन्हें खेलना चाहिए. वह ऐसा निर्णय क्यों लिए यह बात समझ में नहीं आ रही.
-सोनू अग्रहरि, क्रिकेट प्रशिक्षणार्थी

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