- दालमंडी के दो सफदेपोशों से जुड़ा हुआ था रईस

- हाल ही में बिल्डर को दी थी धमकी, चाहता था पार्टनरशिप

कानपुर और आसपास के शहरों में आतंक कायम करने और पुलिस कस्टडी से भागने के बाद 50 हजार का इनामी रईस बनारस में काफी समय गुजार रहा था. दालमंडी और दशाश्वमेध के इलाके उसके छिपने के लिए मुफीद जगह थी. तमाम माफियाओं की तरह अब वह भी अपने आतंक का फायदा उठाकर रियल स्टेट के कारोबार में घुसना चाहता था. हालांकि विरोधी को ठिकाने लगाने के प्रयास में उसकी मौत हो गई.

दालमंडी से शुरू की वसूली

साल 2012 में इनामी बदमाश हैदर अली की लाश सोनभद्र के हाथी नाला में सड़क किनारे मिली थी. इस मामले में हैदर के परिजनों ने पार्षद अरशद खां उर्फ विक्की और राजकुमार बिंद उर्फ गुड्डू मामा को नामजद किया था. हैदर की मौत के बाद गुड्डू मामा ने रईस को दालमंडी में वसूली का काम सौंपा. इसके बाद रईस ने बेहद शातिर तरीके से दालमंडी में जड़ें जमाना शुरू कर दिया था.

दो विरोधी गिरोहों के संपर्क में था रईस

रईस दालमंडी में दो विरोधी गिरोहों के संपर्क में था. हालांकि दोनों के आका अब अपराध से दूर हो जाने का दावा करते हैं. रईस ने इलाके में कई बिल्डरों को भी साध रखा था और कुछ नए निर्माणों में उसने करोड़ों रुपये भी लगाए थे. हाल ही में उसने नई सड़क क्षेत्र के एक बिल्डर को धमकी दी थी. उसने दस लाख रुपये के साथ ही धंधे में पार्टनरशिप की डिमांड भी रखी थी मगर बिल्डर ने इससे साफ इनकार कर दिया था. सूत्रों की मानें तो रईस बिल्डर पर भी हमले की तैयारी में था.

गैंगवार में ही मारा गया था रईस का साथी

रईस का साथी और मुन्ना बजरंगी का शूटर कृपा चौधरी का दामाद राजेश चौधरी भी एक गैंगवार में ही मारा गया था. नौ अगस्त 2014 को मिर्जापुर के अहरौरा के तारादह स्थित खप्पर बाबा आश्रम पर गैंगवार हुआ था. राजेश के साथ धर्मेद्र उर्फ कल्लू पांडेय और सूरज सिंह की भी बदमाशों ने हत्या कर दी थी. दोनों गिरोहों में लूट के माल के बंटवारे को लेकर झगड़ा हुआ था.