-रोहनिया से कार खरीदकर लौट समय फ्लाईओवर हादसे का शिकार

-बीम गिरते समय समय ससुर ने दामाद को कार से धकेलकर बाहर निकाला

-खुद को बचा नहीं सका, मौके पर हुई मौत

बेटी का सुहाग बचाकर एक पिता ने मौत को गले लगा लिया. चौकाघाट-लहरतारा फ्लाईओवर हादसे में काल के गाल में समाए बस्ती के रूदौली निवासी रिटायर्ड लेखपाल भैरवनाथ ने दामाद राजेश भाष्कर की जान बचाकर बेटी के माथे का सिंदूर मिटने से बचा लिया. ट्रामा सेंटर में जख्मी राजेश की तबियत का हाल जानने पहुंचे पिता सीआर भाष्कर इस हादसे से स्तब्ध दिखे. आंखों में आंसूओं का सैलाब लिए परिवारजन बस यही कहते रहे कि ससुर ने प्राण देकर बेटी का सुहाग बचा लिया. नक्खीघाट निवासी राजेश भाष्कर के पिता सीआर भाष्कर ने बताया कि रिटायर्ड लेखपाल भैरवनाथ कार खरीदने के लिए बस्ती से बनारस आए थे. राजेश के साथ रोहनिया शोरूम गए और क्विड कार खरीदकर वापस नक्खीघाट लौट रहे थे. कार राजेश ही चला रहा था. आगे उसके ससुर भैरवनाथ बैठे हुए थे और पीछे एक लड़का भी बैठा हुआ था. जैसे ही फ्लाईओवर के नीचे कार पहुंची कि कार पर ही बिम गिर गया. बिम के कुछ अटकने के दौरान तुरंत ही भैरवनाथ ने कार के अंदर से ही ड्राइविंग सीट पर बैठे राजेश को धक्का देकर बाहर निकाल दिया. पीछे बैठा लड़का भी गेट खोलकर बाहर निकल गया. मगर, भैरवनाथ को बचने का मौका नहीं मिल सका.

आंसुओं ने बयां किया दर्द

बीएचयू ट्रामा सेंटर में जिंदगी और मौत जूझ रहे राजेश भाष्कर के लब नहीं चल रहे थे. मगर, आंखों से बहते आंसुओं ने यह संकेत जरूर किया कि खौफ का मंजर ताउम्र भूलने वाला नहीं है. हादसे में दम तोड़ चुके ससुर की मौत ने राजेश को हिलाकर रख दिया है.