बरसात में भैंसाली डिपो पर जगह -जगह जलभराव से यात्री परेशान

पांच करोड़ की लागत से दो साल में हुआ है निर्माण पूरा

Meerut. पांच करोड़ की लागत, दो साल के लंबे इंतजार और एनजीटी के विवाद के बाद आखिरकार भैंसाली डिपो अपने नए रंग रुप में बनकर तैयार हो गया. अगले माह डिपो के विधिवत रुप से उदघाटन की भी तैयारी की जा रही है, लेकिन हकीकत यह है कि करोड़ों की लागत से बना यह बस अड्डा मानसून की मामूली बारिश भी झेलने के लायक नही है. बस अड्डे पर जगह-जगह पानी भरा है जिसके कारण यात्रियों को पानी के बीच से बस में चढ़ना उतरना पड़ रहा है.

जल निकासी के प्रबंध्ान में चूक

भैंसाली बस डिपो के फ्लोर को ऊंचाकर प्लेटफार्म का निर्माण कराया गया है. ताकि बसें सीधा प्लेटफार्म पर रुकें और यात्रियों को बिना किसी परेशानी के लिए बस में चढ़ व उतर सकें लेकिन इस व्यवस्था में रोडवेज की लापरवाही हावी हो गई. प्लेटफार्म के पास बनाई गई सीवर लाइन जाम होने के कारण प्लेटफार्म के किनारे जगह जगह जलभराव हो गंदगी का जमावड़ा है. यहां जल निकासी के लिए नालियां भी अभी चालू नही हो सकी है. जिस कारण से बस से उतरने और चढ़ने में यात्रियों को जलभराव से जूझना पड़ रहा है.

जगह-जगह जलभराव

करीब 11671 वर्ग मीटर एरिया में फैले भैंसाली डिपो के 60 प्रतिशत एरिया को ऊंचा उठाकर सीसी टाईल्स से कवर किया गया है, लेकिन इस कवरिंग में भी निर्माण एजेंसी की लापरवाही के चलते जगह जगह फ्लोर ऊपर नीचे बना हुआ है, जिसके कारण डिपो परिसर में जगह-जगह पानी भरा हुआ है. वहीं बसों के आवागमन के कारण इस फ्लोर को लेवल लगातार बिगड़ता जा रहा है.

बेकार साबित हो रहा प्लेटफार्म

डिपो के मुख्य प्लेटफार्म को यात्रियों की सुविधा के लिए बरसात और धूप से बचने के लिए बनाया गया था. लेकिन प्लेटफार्म के शेडो की अधिक ऊंचाई के कारण बरसात के दौरान प्लेटफार्म पर खडे़ यात्रियों को बरसात के पानी से बचना मुश्किल हो जाता है. सामने की बारिश में प्लेटफार्म पर अंदर तक पानी आता है जिस कारण से बारिश में प्लेटफार्म का शेडो बेकार साबित हो रहा है.

जलनिकासी के लिए प्लेटफार्म से कनेक्टिंग लाइन बनाई गई है, लेकिन अभी लाइन चालू नही हो सकी है जिस कारण से पानी रुक रहा है. जल्द लाइन चालू करा दी जाएगी. कुछ सुधार अभी होने हैं इसलिए अभी काम चालू है.

अनिल अग्रवाल, एआरएम भैंसाली डिपो