- कर्मचारियों का काटा गया ईएसआई व पीएफ, नहीं हुआ जमा

- 2000 कर्मचारियों के पीएफ का पैसा हो गया लापता

- अगस्त से काम कर रही कंपनियों ने किया करोड़ों का किया गोलमाल

GORAKHPUR@inext.co.in
GORAKHPUR: नगर निगम के 70 वार्डो में तैनात आउट सोर्सिग सफाई कर्मचारियों के पीएफ व ईएसआईसी फंड में करोड़ों के घोटाले की आशंका जताई जा रही है। नगर निगम की ओर से पीएफ व ईएसआईसी का पैसा जमा करने के बाद भी पैसा कर्मचारियों के खाते में नहीं जमा हो रहा है। दोनों कंपनियों ने अगस्त 2018 से शहर के सफाई की जिम्मेदारी संभाली है। शरुआती दिनों से पीएफ अकाउंट खोलने के दावे के बाद ही अभी भी आधे से अधिक सफाई कर्मचारियों का पीएफ अकाउंट तक नहीं खुल सका है। जोन 1 व 2 के 36 वार्डो की सफाई कर रहे विशाल प्रोटेक्शन फोर्स के अंतर्गत करीब 900 व जोन 3 व 4 के 34 वार्डो में सर्विस दे रही हिंदुस्तान सिक्योरिटी कंपनी के तहत 1000 से अधिक सफाई कर्मचारी काम कर रहे हैं।

निगम ने किया करोड़ों का भुगतान
नगर निगम ने दोनों कंपनियों को अगस्त महीने से ही भुगतान करना शुरू कर दिया है। जिसमें मस्टर रोल के अनुसार कर्मचारियों की सैलरी सहित पीएफ व ईएसआईसी का भी भुगतान किया जाता है। निगम व कंपनियों के बीच हुए कॉन्ट्रैक्ट के तहत कंपनियों को आरटीजीएस के जरिए सफाई कर्मचारियों के खाते में भुगतान करना था। लेकिन अभी तक ज्यादातर कर्मचारियों के पीएफ अकाउंट ही नहीं खोले गए हैं। जिनके खुले हैं उनमें नियमित भुगतान नहीं किया जाता है। पहले से ही जिन कर्मचारियों के एकाउंट में पैसे जमा हो रहे थे। उनमें भी पैसे आने बंद हो गए हैं।

नहीं मिल रहे हैं जमा 1.70 करोड़
नगर निगम अगस्त महीने से दिसंबर 2018 तक दोनों कंपनियों को पीएफ व ईएसआईसी के लिए 1.08 करोड़ रुपए का भुगतान कर चुका है। जिसमें पीएफ के तहत 79,06,937 व ईएसआईसी का 28,89,063 करोड़ रुपया है। पीएफ अकाउंट में कर्मचारी के वेतन का 12 प्रतिशत व नियोक्ता की ओर से 13 प्रतिशत भुगतान किया जाता है। कर्मचारियों के वेतन से फंड में जमा करने के लिए 12 प्रतिशत की कटौती हर महीने की जाती है। पीएफ के नाम पर करीब 60,02,180 की कटौती होती है। इस तरह से 70 वार्डो में तैनात सफाई कर्मचारियों के खाते में ईएसआई व पीएफ के रूप में अब तक 1,78,96,000 रुपए जमा होना चाहिए। लेकिन इनका कोई पता नहीं चल पा रहा है।

कंपनियों के डाटा में उलझा निगम
कंपनियों को भुगतान के लिए नगर निगम उनसे पीएफ फंड में जमा की गई रकम का स्टेटमेंट मांगता है। एक कंपनी ने स्टेटमेंट के नाम पर जो डॉक्युमेंट निगम को सौंपा है उसका मिलान शहर के वार्डो में काम कर रहे कर्मचारियों के डाटा से नहीं हो रहा है। कई दिनों तक डाटा पर माथा पच्ची करने के बाद निगम ने दोनों कंपनियों से वार्डवार मस्टर रोल के अनुसार पीएफ अमाउंट के डाटा की मांग की है। लेकिन दिसंबर से जनवरी तक आधा दर्जन पत्र जारी करने के बाद भी अभी तक कंपनियों ने निगम को डाटा नहीं सौंपा है।

नहीं सौंपा डाटा तो होगी कार्रवाई
7 जनवरी को हिन्दुस्तान सिक्योरिटी कंपनी व विशाल प्रोटेक्शन फोर्स दोनों कंपनियों को नगर आयुक्त व डीएम के विजयेंद्र पांडियन ने पत्र जारी कर 10 जनवरी तक डाटा उपलब्ध कराने को कहा है। पूर्व में लिखे पत्रों का हवाला देते हुए दोनों कपंनियों से आरटीजीएस, ईपीएफ तथा ईएसआईसी अंशदान जमा किए जाने के प्रमाण पत्रों की मांग की है। पत्र में हिदायत दी गई है कि प्रमाण पत्र में कर्मियों का नाम व मस्टर रोल में अंकित नाम एक ही होना चाहिए ताकि कर्मचारियों के डाटा का आसानी से मिलान किया जा सके। सख्त चेतावनी दी गई है कि 10 जनवरी तक डाटा नहीं देने पर दंडात्मक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

अगस्त से दिसंबर तक कंपनियों को भुगतान

विशाल प्रोटेक्शन फोर्स

कर्मचारियों का वेतन- 3,27,31,517

ईपीएफ 13 प्रतिशत- 42,55,097

ईएसआईसी 4.75 प्रतिशत - 15,54, 747

हिन्दुस्तान सिक्योरिटी कंपनी

कर्मचारियों का वेतन- 2,80,91,075

ईपीएफ 13 प्रतिशत - 36,51,840

ईएसआईसी 4.75 प्रतिशत - 13,34,326