Meerut: मवाना के गांव भैंसा में रहने वाले रवि कुमार ने कॉम्नवैल्थ में अपनी राइफल के बिना ब्रांज मेडल जीता. रवि कुमार ने दो बार अपनी पिस्टल के लिए आवेदन किया, लेकिन दोनो ही बार फाइल गुम हो गई. लाइसेंस की फाइल को धरती निगल गई या फिर आसमां खा गया, इस बात को असलाह बाबू बताने के लिए तैयार नहीं हैं. बहरहाल डीएम ने इस मामले को गंभीरता से लिया है. उन्होंने आश्वासन दिया कि इस बार फाइल मिलते ही लाइसेंस अप्रूव किया जाएगा.

एअर फोर्स की पिस्टल

भैंसा गांव के रहने वाले रवि कुमार ने रविवार को गोल्ड कोस्ट में 10 मीटर एअर पिस्टल में ब्रांज मेडल जीतकर मेरठ का नाम रोशन कर दिया. एअर फोर्स गाजियाबाद में तैनात रवि कुमार को एअर फोर्स ने ही राइफल उपलब्ध कराई. उसी राइफल से रवि कुमार ने ब्रांज मेडल जीता है.

नहीं बना लाइसेंस

रवि कुमार ने बताया कि दो बार मेरी लाइसेंस की फाइल गुम हो गई. सोच रहा हूं कि दिल्ली से ही राइफल का लाइसेंस बनवा लूं, लेकिन मुश्किल यह आ रही है कि वहां पर पता किसका दिखाया जाए. या तो पोस्टिंग वहां पर करवानी पड़ेगी. उसके बाद ही लाईसेंस बन पाएगा. 11 अप्रैल को आने के बाद देखा जाएगा.

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किसान का बेटा है रवि

रवि कुमार के पिता भैंसा गांव में किसानी करते हैं. पिता ने बहुत मुश्किल से रवि कुमार को शूटिंग करने के लिए भेजा. रवि कुमार ने सबसे पहले बागपत के जोहड़ी गांव में निशानेबाजी सीखी. रवि के नाना डॉ. राजपाल सिंह ने ही वह शूटिंग रेंज बनाई थी. फिलहाल रवि दिल्ली में कोच मनोज कुमार तथा चंड़ीगढ़ में शूटर अभिनव बिंद्रा से कोचिंग लेता हैं.

मामला संज्ञान में नहीं है. लाइसेंस फाइल का गुम होना आश्चर्य की बात है. फाइल की तलाश करवाई जाएगी. यदि मिलती है तो तुरंत ही लाइसेंस बन जाएगा. वरना दोबारा आवेदन लेकर लाइसेंस बनवाया जाएगा.

अनिल ढींगरा, डीएम, मेरठ