RANCHI:एनएसएस के स्टेट ऑफिसर सह रांची यूनिवर्सिटी के एनएसएस को-ऑर्डिनेटर डॉ पीके झा स्कूल लाइफ से ही साइकिल चला रहे हैं. उनकी सेहतमंद जिंदगी का राज साइक्लिंग ही है. बात क्97म्-77 की है, जब डॉ पीके झा रांची में रहकर कॉलेज की पढ़ाई करते थे. वह लोहरदगा साइकिल से ही चले जाते थे. डॉ पीके झा के पिता इंद्रकांत झा(अब नहीं रहे) लोहरदगा में आयुर्वेदिक चिकित्सा पदाधिकारी थे.

हर दिन चलाते हैं साइकिल

डॉ पीके झा हर दिन कम से कम पांच किलोमीटर साइकिल जरूर चलाते हैं. सुबह अपने घर से हरमू मैदान तक वह साइकिल चलाकर जाते हैं. यह सिलसिला लगातार जारी है. डॉ पीके झा स्कूल लाइफ से ही जो साइकिल चला रहे हैं, वो आज तक ब्रेक नहीं हुआ है. डॉ पीके झा ने अभी हाल ही में एक साइकिल भी खरीदी है.

पुरानी साइकिल ज्यादा अच्छी

डॉ पीके झा बताते हैं कि पुराने मॉडल की साइकिल ज्यादा अच्छी होती है. उसके कल-पुर्जे बेहतर होते हैं. नई साइकिलें देखने में तो अच्छी लगती हैं, लेकिन कंफर्टेबल नहीं होती हैं. यही कारण है ह िडॉ पीके झा पुराने मॉडल की साइकिल ही चलाते हैं.

साइकिल चलाना अच्छा एक्सरसाइज

डॉ पीके झा कहते हैं कि एक घंटा एक्सरसाइज करने से ज्यादा अच्छा है कि ख्0 मिनट साइकिल चलाई जाए. साइकिल चलाने से शरीर के सभी हिस्सों का व्यायाम हो जाता है. साथ ही मॉर्निग वॉक भी हो जाता है. डॉ पीके झा कहते हैं कि साइकिल सबसे अच्छा दोस्त है.