JAMSHEDPUR: दैनिक जागरण आई नेक्स्ट की टीम बुधवार को जेम्को लक्ष्मीनगर पहुंची। मिलेनियल्स स्पिक के तहत राजनी-टी कार्यक्रम में एजुकेशन के मुद्दे पर बेबाक राय रखी। चर्चा के दौरान मिलेनियल्स ने कहा कि युवाओं के लिए महत्वपुर्ण मुद्दा एजुकेशन ही है। कहा कि एजुकेशन में क्रांति लानेवाले की ही सरकार बनाएंगे।

चर्चा की शुरुआत करते हुए विशाल यादव ने कहा एजुकेशन सिस्टम में बदलाव होने से ही देश आगे बढे़गा। कहा कि गवर्नमेंट स्कूलों-कॉलेजों की स्थिति बदतर है। सरकारी स्कूलों की स्थिति किसी से छिपी नहीं है। शहर के अधिकतर कॉलेजों में प्रोफेसर की कमी है। इससे स्टूडेंट्स की क्लास ही नहीं हो पाती हैं। शहर में अधिक से अधिक छात्र सरकारी कॉलेजों में ही पढ़ाई करते हैं। सरकार को डिग्री कॉलेजों की शिक्षा के साथ ही मैट्रिक और इंटरमीडिएट की शिक्षा व्यवस्था में सुधार होना चाहिये। रेहान मिश्रा ने चर्चा को आगे बढ़ाते हुए कहा एजुकेशन सिस्टम में सुधार तो हुआ है, लेकिन और सुधार की जरूरत है। देश में क्वालिटी एजूकेशन में गिरावट आई है। इससे शिक्षित की संख्या तो बढ़ रही है, लेकिन युवा प्रतियोगिताओं में कुछ खास जौहर नहीं दिखा पा रहे हैं। पैसों के बल पर डिग्री बेची और खरीदी जा रही है।

नहीं मिल रही उचित शिक्षा

युवाओं ने चर्चा के दौरान कहा कि स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों के लिए खेल का मैदान, शुद्ध पेयजल की व्यवस्था होनी चाहिये, शहर से जड़े हुए कई प्राथमिक स्कूलों में पीने के पानी की व्यवस्था नहीं हैं। स्कूल में टॉयलेट बना दिए हैं, लेकिन इनका इस्तेमाल छात्रों को नहीं करने दिया जाता है। जिले में 50 प्रतिशत छात्रों को ठंड में स्वेटर ही नहीं दिया गया है। सरकार स्कूलों पढ़ने वाले बच्चों के सर्वागीण विकास का सपना दिखा रही है, जबकि स्कूलों में शिक्षा के अलावा सब कुछ हो रहा है।

मनमानी फीस पर लगे लगाम

चर्चा के दौरान मिलेनियल्स ने कहा कि पिछले पांच सालों में प्राइवेट शिक्षण संस्थानों पर कोई लगाम नहीं लगा है और मनमानी फीस वसूली जा रही है। देश में प्राइवेट विश्वविद्यालय खोलने की अनुमति देकर शिक्षा की क्वालिटी को और बदतर किया जा रहा है। इससे जहां एक ओर छात्र लाखों रुपए लगाकर बीटेक, बीसीए, बीबीए और एमबीए जैसे कोर्स कर रहे हैं, लेकिन जॉब नहीं मिलने से युवाओं को निराशा ही हाथ लग रही है। आज कोई भी राजनेता, अधिकारी और व्यापारी अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में नहीं भेजते हैं, जबकि अधिकांश अधिकारी, राजनेता सरकारी स्कूल-कॉलेज से ही पढ़ाई कर आए हैं। युवाओं ने कहा कि यदि देश के गवर्नमेंट स्कूल-कॉलेज के एजुकेशन सिस्टम को ठीक करना है तो अधिकारी, नेता के बच्चों को ऐसे संस्थानों पर पढ़ना अनिवार्य करना होगा।

मेरी बात

एजूकेशन सिस्टम बदलने से ही देश आगे बढे़गा। गवर्नमेंट स्कूल-कॉलेजों की स्थिति बदतर है। सरकारी स्कूलों की स्थिति किसी से छिपी नहीं है। शहर के अधिकांश कॉलेजों में प्रोफेसर नहीं हैं। इससे स्टूडेंट की क्लास ही नहीं हो पाती हैं। सरकार को डिग्री कॉलेजों की शिक्षा के साथ ही मैट्रिक और इंटरमीडिएट की शिक्षा व्यवस्था में भी सुधार करना होगा।

विशाल यादव

कड़क मुद्दा

एजूकेशन सिस्टम में सुधार तो हुआ है, लेकिन और सुधार की जरूरत है। देश में क्वालिटी एजुकेशन में गिरावट आई है। इससे शिक्षितों की संख्या तो बढ़ रही है, लेकिन युवा प्रतियोगिता परीक्षाओं में कुछ खास जौहर नहीं दिखा पा रहे हैं। पैसों के बल पर डिग्री खरीदी-बेची जा रही है। इसपर सरकार को रोक लगाना चाहिए। वहीं, प्राइवेट शिक्षण संस्थानों द्वारा मनमानी फीस वसूली जा रही है। इससे गरीब स्टूडेंट्स अच्छी शिक्षा के लिए मोहताज है।

रेहान मिश्रा

स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों के लिए खेल का मैदान, शुद्ध पेयजल की व्यवस्था होनी चाहिये। शहर के कई प्राथमिक स्कूलों में पीने के पानी की व्यवस्था नहीं है। इससे बच्चे घर से ही पानी लेकर स्कूल आते हैं। स्कूल में टायलेट बना दिए हैं, लेकिन इनका उपयोग छात्रों को नहीं करने दिया जाता है।

सूरज शर्मा

जिले में 50 प्रतिशत छात्रों को ठंड में स्वेटर ही नहीं दिया गया है। सरकार गवर्नमेंट स्कूलों पढ़ने वाले बच्चों के सर्वागीण विकास का सपना दिखा रही है, जबकि स्कूलों में शिक्षा का हाल किसी से छिपा नहीं है।