-दैनिक जागरण शिशु स्वास्थ्यशाला में शहर की माओं ने सीखे परवरिश के तौर-तरीके

-गीलेपन से होती है प्रॉब्लम, पल-पल टूटती है नींद

-छह माह तक मां का दूध अहम, मौजूद होते हैं सभी पोषक तत्व

GORAKHPUR: जितनी अच्छी नींद आपके लाडले को मिलेगी, उतना ही वह हेल्दी और वेल्दी रहेगा. भरपूर और सकून भरी नींद के लिए जरूरी है कि बच्चों को गीलेपन से छुटकारा मिले. वहीं मच्छर, भूख भी उन्हें न परेशान करे. इसका ख्याल सभी माओं को रखना जरूरी है. इसके लिए वह टाइम टू टाइम फीडिंग कराने के साथ ही अपने बच्चों को होने वाली प्रॉब्लम का सॉल्युशन भी करें, जिससे वह अच्छी नींद ले सके और उसका स्वास्थ्य बिल्कुल सही रहे. यह बातें सामने आई दैनिक जागरण और पैंपर्स की ओर से अंबे पैलेस में ऑर्गनाइज शिशु स्वास्थ्यशाला में, जहां फील्ड के दिग्गज डॉक्टर्स ने वहां मौजूद मांताओं को लाडले की परवरिश के तौर-तरीके बताए. वहीं उन्हें होने वाली छोटी-मोटी प्रॉब्लम से निपटने के नुस्खे शेयर किए.

सबने पूछे सवाल

दैनिक जागरण की ओर से ऑर्गनाइज इस प्रोग्राम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई. इस मौके पर सीएमओ डॉ. श्रीकांत तिवारी, एडमिशनल सीएमओ डॉ. आईवी विश्वकर्मा, मुख्य चिकित्सा सूचना अधिकारी डॉ. ओपीजी राव, पूर्व मेयर डॉ. सत्या पांडेय, पैंपर्स के रिप्रेजेंटेटिव और दैनिक जागरण आई नेक्स्ट एडिटोरियल इंचार्ज संजय कुमार ने दीप प्रज्ज्वलित किया. इसके बाद तुलसी का पौधा देकर अतिथियों का स्वागत किया गया. इसके बाद प्रोग्राम की शुरुआत हुई और वक्ताओं ने अपनी बातें रखने के साथ ही वहां मौजूद माताओं की ओर से पूछे गए सवालों के जवाब दिए.

मां का दूध बच्चों के िलए सबसे अहम

शिशु स्वास्थ्य में एक्सप‌र्ट्स ने बताया कि मां का दूध बच्चों के लिए वरदान है. छह माह तक बच्चों को सिर्फ मां का ही दूध पिलाना चाहिए. इसमें नवजात बच्चों के लिए जरूरी सभी पौष्टिक पदार्थ रहते हैं, जो न सिर्फ बच्चों की सेहत को बेहतर करते हैं, बल्कि उन्हें बीमारियों से भी बचाते हैं. स्तनपान कराने के शुरुआती दौर में मां का दूध पानी और पोषक तत्वों की कमी को पूरा करता है. छह माह तक के बच्चों को डायरिया होने पर मां का दूध ओआरएस की तरह काम करता है. इसलिए स्तनपान कराने को लेकर किसी भी प्रकार का भ्रम नहीं पालना चाहिए. कम से कम दो साल तक के बच्चों को स्तनपान कराना चाहिए. इसके बाद धीरे-धीरे खानपान में बदलाव लाना चाहिए. उन्होंने बच्चों का टीकाकरण समय से कराने की भी सलाह दी. कहा कि टीकाककरण से बच्चों को विभिन्न बीमारियों से दूर रखा जा सकता है.

हाथ ने न जांचे बुखार

एक्सप‌र्ट्स ने बताया कि दो साल तक के बच्चों का हाथ, तलुआ और सिर बड़े लोगों की तुलना में ज्यादा गर्म रहता है. इसलिए हाथ, तलुआ या सिर गर्म है, तो यह जरूरी नहीं है कि बच्चे को बुखार ही हो. इसे कंफर्म करने के लिए थर्मामीटर का इस्तेमाल करना चाहिए. डॉक्टर्स की मानें तो बच्चों का ब्रेन डेवलपमेंट पांच साल में जाकर पूर्ण होता है, इसीलिए कभी-कभी पांच साल तक के बच्चे चिड़चिड़े भी होते हैं. ऐसे में बच्चों को डांटने के बजाए उन्हें बहलाना चाहिए. मां अक्सर ये शिकायत रहती है कि बच्चा कुछ खाता नहीं है. डॉक्टर्स की मानें तो खाने का मेन्यू और चार्ट तैयार करना चाहिए. कई बार बच्चे अपनी पसंद और नापसंद नहीं बता पाते. इसलिए खुद भी नोटिस करें कि बच्चा क्या चीज चाव से खा रहा है और उसे मेन्यू में शामिल करें. इसीलिए तरह रोज का चार्ट तय करें और इसी के हिसाब से डाइट तय करें.

मीठा कम पसंद करते हैं बच्चे

बच्चे मीठा कम पसंद करते हैं. जीभ चार किस्म का स्वाद पहचानती है. नमकीन, मीठा, खट्टा और तीखा. बालरोग विशेषज्ञ के मुताबिक आमतौर पर बच्चे मीठा कम पसंद करते हैं, जबकि घर में महिलाएं बच्चों को खिलाने के लिए हर वस्तु में चीनी आदि मिला देती हैं. बच्चों को सबसे ज्यादा नमकीन वस्तुएं पसंद आती हैं. इसलिए बच्चों के स्वाद की भी पहचान करनी चाहिए. बहुत से बच्चों को घी भी काफी पसंद होता है. ऐसे में दो साल के अधिक के बच्चों को दाल आदि में बहुत थोड़ी मात्रा में घी भी देना चाहिए. इससे बच्चों की खाने की इच्छा बढ़ती है.

बार-बार न पिलाएं दूध

डॉक्टर्स की मानें तो बच्चों के रोने पर बार-बार दूध पिलाने के बजाए उन्हें टहलाना चाहिए. कई बार माहौल की अनुकूलता नहीं होने की वजह से भी बच्चे रोने लगते हैं. ऐसे में अंदाजा नहीं होने पर महिलाएं उन्हें बार-बार दूध पिलाती है, जबकि बच्चों की रोने की वजह कुछ और होती है. कई बार बिस्तर या कपड़ों की अनुकूलता न होने पर या सर्द, गर्म के एहसास की वजह से भी बच्चे रोते हैं, जबकि आम तौर पर होता यह है कि दस मिनट पहले ही दूध पिलाने वाली मां, फिर से दूध पिलाने लग जाती हैं. इसलिए बेहतर यह है कि यदि किसी बच्चे ने दूध पिलाने के दस मिनट बाद ही रोना शुरू कर दिया, तो इसकी बाकी वजह भी जाननी चाहिए.

बच्चों को रखें पास तो बनेगा दूध

डॉक्टर्स ने बताया कि कई बार माताओं की यह शिकायत होती है कि दूध नहीं बनता. इसकी वजह कई बार बच्चों का मां से दूर रहना भी है. स्तनपान कराने वाली महिलाओं को पर्याप्त नींद और संतुलित भोजन के साथ ही बच्चों को हमेशा अपने करीब रखना चाहिए. बच्चों के माताओं के करीब रहने से दूध नहीं बनने की शिकायत दूर हो जाती है. इसके साथ ही नींद और खानपान पर भी खास ध्यान देने की जरूरत है.

वजन के हिसाब से पहनाएं डायपर

स्वास्थ्यशाला में डायपर के इस्तेमाल और उनको यूज करने का तरीका और फायदा भी बताया गया. सबसे अहम जानकारी यह रही कि बच्चों को उम्र नहीं, बल्कि वजन के हिसाब से डायपर पहनाना चाहिए. साथ ही पैंपर्स की खूबियां भी गिनाई गईं. संचालन कर रहे अमित शर्मा ने पैंपर्स की खासियत और इस्तेमाल के तरीके बताए. साथ ही सबके सामने पैंपर्स में मौजूद होने वाले मैजिक जेल का लाइव डेमो भी दिया गया. कार्यक्रम के दौरान आशा बहुएं, आंगनवाड़ी कार्यकत्रियां, मुकामी महिलाएं और पेरेंट्स मौजूद थे.

इनका हुआ सम्मान

कार्यक्रम को सफल बनाने में लता मेडिकल स्टोर के प्रशांत, एके मेडिकल एजेंसीज एके अग्रवाल, इरम जनरल स्टोर खालिद अहमद, गरुण सुपर बाजार के रजनीकांत राय, मेसर्स डेली नीड के अजीत कुशवाहा, सेंट्रल प्लाजा के चंचल गुप्ता, सिद्धि विनायक सुपर मार्केट विजय गुप्ता, आलोक इंटरप्राइजेज के आलोक यादव, प्रजापति किराना स्टोर के नागेंद्र प्रजापति, विवेक प्रोविजन स्टोर के सुदर्शन चौरसिया, राज किराना स्टोर के विवेक कश्यप, न्यू अंबे मेडिसिंस के गणेश कुमार जायसवाल, मां गायत्री पोवीजन स्टोर के पंकज मिश्रा, लक्ष्मी नारायण ट्रेडर्स के सतीश्वर गुप्ता को ट्रेड वेंचर्स प्रा. लि. पार्टनर पी एंड जी प्रॉडक्ट बिजनेस एग्जिक्युटिव राकेश श्रीवास्तव और कैंपेन मैनेजर कौशल कुमार ने लोगों को सम्मानित किया.